Home
स्वास्थ्य

yogasans for breathing lungs will be strong yoga session by savita yadav pur– News18 Hindi

शरीर को लचीला बनाए रखने के लिए योगासन (Yogasan) अहम भूमिका निभाते हैं. सिर्फ इतना ही नहीं योगाभ्यास करने से इम्यूनिटी (Immunity) भी मजबूत होती है जो कि आज के समय में बहुत ही जरूरी है. कुछ खास योग मुद्राओं को करने से सांस की परेशानी नहीं होती और फेफड़े मजबूत होते हैं. ऐसे में आपको कुछ खास योगासनों का अभ्यास करना चाहिए. योग करने से शरीर स्वस्थ रहता है. वहीं आसनों को करने के बाद शरीर को आराम देने के लिए प्राणायाम जरूर करें. इससे शरीर की थकान दूर होती है. शरीर को संतुलित बनाए रखने के लिए प्राणायाम बहुत अच्‍छा आसन है.

अनुलोम विलोम प्राणायाम

सबसे पहले चौकड़ी मार कर बैठें. इसके बाद दाएं अंगूठे से अपनी दाहिनी नासिका पकड़ें और बाई नासिका से सांस अंदर लें लीजिए. अब अनामिका उंगली से बाई नासिका को बंद कर दें. इसके बाद दाहिनी नासिका खोलें और सांस बाहर छोड़ दें. अब दाहिने नासिका से ही सांस अंदर लें और उसी प्रक्रिया को दोहराते हुए बाई नासिका से सांस बाहर छोड़ दें.

यह भी पढ़ें:  Yoga Session: बढ़ते बच्चों के लिए बेस्ट है ये एक्सरसाइज, बढ़ती है लंबाई 

अनुलोम विलोम प्राणायाम के फायदे

-फेफड़े मजबूत होते हैं

-बदलते मौसम में शरीर जल्दी बीमार नहीं होता.

-वजन कम करने में मददगार

-पाचन तंत्र को दुरुस्त बनाता है

-तनाव या डिप्रेशन को दूर करने के लिए मददगार

-गठिया के लिए भी फायदेमंद

तितली आसन

बटरफ्लाई आसन बहुत ही एफेक्‍टेड है. इसे तितली आसन भी कहते हैं. महिलाओं के लिए ये आसन विशेष रूप से लाभकारी है. बटरफ्लाई आसन करने के लिए पैरों को सामने की ओर फैलाते हुए बैठ जाएं,रीढ़ की हड्डी सीधी रखें. घुटनो को मोड़ें और दोनों पैरों को श्रोणि की ओर लाएं. दोनों हाथों से अपने दोनों पांव को कस कर पकड़ लें. सहारे के लिए अपने हाथों को पांव के नीचे रख सकते हैं. एड़ी को जननांगों के जितना करीब हो सके लाने का प्रयास करें. लंबी,गहरी सांस लें, सांस छोड़ते हुए घटनों एवं जांघो को जमीन की तरफ दबाव डालें. तितली के पंखों की तरह दोनों पैरों को ऊपर नीचे हिलाना शुरू करें. धीरे धीरे तेज करें. सांस लें और सांस छोड़ें. शुरुआत में इसे जितना हो सके उतना ही करें. धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाएं.
भ्रामरी प्राणायाम

भ्रामरी प्राणायाम करने के लिए जमीन पर बैठ जाएं. इसके बाद दोनों हाथों की कोहनियों को मोड़कर कानों तक ले जाएं और अंगूठे के सहारे से कानों को बंद कर लें. कानों को बंद करने के बाद हाथों की तर्जनी उंगली और मध्यमा, कनिष्का उंगली को आंखों के ऊपर ऐसे रखें जिससे पूरा चेहरा कवर हो जाए. इसके बाद मुंह को बंद करके नाक से हल्की-हल्की सांस को अंदर और बाहर छोड़े. 15 सेकेंड तक ये आसान करने के बाद वापस से नॉर्मल स्थिति में आ जाएं. इस प्राणयाम को 10 से 20 बार दोहराएं. आप चाहे तो शुरुआत में इसे 5 से 10 भी कर सकती हैं. अगर आपको अनिद्रा की शिकायत है तो भ्रामरी प्राणायाम आपके लिए फायदेमंद है.

ग्रीवा शक्ति आसन
ग्रीवा शक्ति आसन करने के लिए अपनी जगह पर खड़े हो जाएं. जो लोग खड़े होकर इस क्रिया को करने में असमर्थ हैं वे इसे बैठकर भी कर सकते हैं. जो जमीन पर नहीं बैठ सकते वे कुर्सी पर बैठकर भी इसका अभ्यास कर सकते हैं. कंफर्टेबल पोजीशन में खड़े होकर हाथों को कमर पर टिकाएं. शरीर को ढीला रखें. कंधों को पूरी तरह से रिलैक्स रखें. सांस छोड़ते हुए गर्दन को आगे की ओर लेकर आएं. चिन को लॉक करने की कोशिश करें. जिन लोगों को सर्वाइकल या गर्दन में दर्द की समस्या हो वह गर्दन को ढीला छोड़ें चिन लॉक न करें. इसके बाद सांस भरते हुए गर्दन को पीछे की ओर लेकर जाएं.

कपालभाति

पद्मासन लगाकर बैठ जाएं और कपालभारती करें. सांसे भरें सांसे बाहर छोड़ें. तेजी से नाक के दोनों छिद्रों से सांस को यथासंभव बाहर फेंकें. साथ ही पेट को भी यथासंभव अंदर की ओर संकुचित करें. इसके तुरंत बाद नाक के दोनों छिद्रों से सांस को अंदर खीचतें हैं और पेट को यथासम्भव बाहर आने देते हैं. इस क्रिया को शक्ति व आवश्यकतानुसार 50 बार से धीरे-धीरे बढ़ाते हुए 500 बार तक कर सकते हैं. कपालभारती से ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है, सांस संबंधी बीमारियों को दूर करमे में मदद मिलती है. विशेष रूप से अस्थमा के पेशेंट्स को खास लाभ होता है. महिलाओं के लिए बहुत लाभकारी है. पेट की चर्बी को कम करता है, पेट संबंधी रोगों और कब्ज की परेशानी दूर होती है, रात को नींद अच्छी आती है. हीमोग्लोबिन ठीक होता है और सिस्ट की समस्या ठीक होती है.

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *