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स्वास्थ्य

Yoga Session: स्वस्थ जीवन के लिए करें ये योग, जानें फायदे

Yoga Session: आज के लाइव योगा सेशन (Live Yoga Session) में हमने कई छोटे-छोटे योगाभ्यासों को सीखा. इस समय जो लोग अभी भी वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं उनके लिए इन आसनों को रूटीन में शामिल करना जरूरी है. योग स्‍वास्‍थ्‍य को बेहतर बनाए रखते हैं. वहीं इम्युनिटी को बेहतर बनाए रखने में भी योग की महत्वपूर्ण भूमिका है. इन आसन के जरिए स्वास्‍थ्‍य (Health) ठीक रहता है और तनाव (Stress) से भी मुक्ति मिलती है. इन आसनों के जरिये शरीर लचीला बना रहता है और हाथों, पैरों में मजबूती आती है. योगाभ्‍यास करते समय इस बात का ध्‍यान रखें कि इन्‍हें धीरे-धीरे करना चाहिए. व्‍यायाम से पहले ये तीन नियम जरूर ध्‍यान रखें कि अच्‍छा गहरा लंबा श्‍वास लें, गति का पालन करें और अपनी क्षमता के अनुसार ही योग करें

ताड़ासन: सबसे पहले आप खड़े हो जाएं और अपने कमर और गर्दन को सीधा रखें. अब आप अपने हाथ को सिर के ऊपर करें और सांस लेते हुए धीरे धीरे पूरे शरीर को खींचें. खिंचाव को पैर की उंगली से लेकर हाथ की उंगलियों तक महसूस करें. इस अवस्था को कुछ समय के लिए बनाए रखें ओर सांस ले सांस छोड़ें. फिर सांस छोड़ते हुए धीरे धीरे अपने हाथ और शरीर को पहली अवस्था में लेकर आएं. इस तरह से एक चक्र पूरा होता है. ताड़ासन योग पूरे शरीर को लचीला बनाता है. यह एक ऐसा योगासन है जो मांसपेशियों में काफी हद तक लचीलापन लाता है. यह शरीर को हल्का करता है और आराम देता है. इसके अलावा शरीर को सुडौल और खूबसूरती भी प्रदान करता है. शरीर की अतिरिक्त चर्बी को पिघालता है और आपके पर्सनैलिटी में नई निखार लेकर आता है.

कपालभारती: कपालभारती बहुत ऊर्जावान उच्च उदर श्वास व्यायाम है. कपाल अर्थात मस्तिष्क और भाति यानी स्वच्छता अर्थात ‘कपालभारती’ वह प्राणायाम है जिससे मस्तिष्क स्वच्छ होता है और इस स्थिति में मस्तिष्क की कार्यप्रणाली सुचारु रूप से संचालित होती है. वैसे इस प्राणायाम के अन्य लाभ भी हैं. लीवर किडनी और गैस की समस्या के लिए बहुत लाभ कारी है. कपालभाति प्राणायाम करने के लिए रीढ़ को सीधा रखते हुए किसी भी ध्यानात्मक आसन, सुखासन या फिर कुर्सी पर बैठें. इसके बाद तेजी से नाक के दोनों छिद्रों से सांस को यथासंभव बाहर फेंकें. साथ ही पेट को भी यथासंभव अंदर की ओर संकुचित करें. इसके तुरंत बाद नाक के दोनों छिद्रों से सांस को अंदर खीचतें हैं और पेट को यथासम्भव बाहर आने देते हैं. इस क्रिया को शक्ति व आवश्यकतानुसार 50 बार से धीरे-धीरे बढ़ाते हुए 500 बार तक कर सकते हैं लेकिन एक क्रम में 50 बार से अधिक न करें. क्रम धीरे-धीरे बढ़ाएं. इसे कम से कम 5 मिनट और अधिकतम 30 मिनट तक कर सकते हैं.

कपालभारती के फायदे
-सांस संबंधी बीमारियों को दूर करमे में मदद मिलती है. विशेष रूप से अस्थमा के पेशेंट्स को खास लाभ होता है.
-महिलाओं के लिए बहुत लाभकारी
-पेट की चर्बी को कम करता है
-पेट संबंधी रोगों और कब्ज की परेशानी दूर होती है
-रात को नींद अच्छी आती है
-ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है.

ये लोग कपालभारती न करें
-प्रेग्नेंट महिलाओं को इसे करने से बचना चाहिए
-जिनकी कोई सर्जरी हुई हो वह इसे न करें
-गैसट्रिक और एसिटिडी वाले पेशेंट्स इसे धीरे-धीरे करने की कोशिश करें.
-पीरियड्स में बिल्कुल न करें.
-हाई बीपी और हार्ट संबंधी रोगों के पैशेंट्स इसे करने से बचें.

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उज्जायी प्राणायाम
उज्जायी प्राणायाम करना बहुत आसान है. इससे जहां सीने की जकड़न, बलगम की समस्‍या से छुटकारा मिलता है, वहीं तनाव दूर करने में भी यह मददगार है. इसके अलावा यह कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है और पुरानी सर्दी, खांसी, अस्थमा की समस्या और सांस संबंधी अन्‍य बीमारियों में भी बहुत फायदेमंद है. उज्जायी प्राणायाम करने के लिए सबसे पहले आप आंखें बंद करके पद्मासन, सुखासन आदि ध्यान मुद्रा में सीधे बैठ जाएं. फिर अपनी नाक के जरिये धीरे-धीरे गहरी सांस लें. इसके बाद मुंह खोल कर धीरे-धीरे सांस छोड़ें. इस प्रक्रिया को कई बार दोहराएं. इसे आप सुबह या शाम कर सकते हैं.

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