World suicide prevention day 2021 why this day celebrated what is the history
स्वास्थ्य

World suicide prevention day 2021 why this day celebrated what is the history

World Suicide Prevention Day: आत्महत्या (Suicide) को रोकने के तरीकों के बारे में जागरुकता पैदा करने के लिए हर साल 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस (WSPD) मनाया जाता है. इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, लक्ष्य है मुद्दों पर प्रकाश डालना, वो भी उन लोगों तक पहुंचने की उम्मीद में जो संघर्ष कर रहे हैं. महामारी के दौर में नौकरियां छिन जाने, अपने करीबियों को खोने और अकेलेपन ने लोगों को चिंतित, उदास और अतिसंवेदनशील बना दिया है. जिसके चलते भी कई लोग इस गलत रास्ते यानीआत्महत्या की तरफ मुंह करके खड़े हैं. आत्महत्या को रोकने का सबसे अच्छा तरीका चेतावनी के संकेतों को पहचानना और इस तरह के संकट का जवाब देना है.

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस का इतिहास
इस दिन को मनाने की शुरुआत 10 सितंबर 2003 को इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सुसाइड प्रिवेंशन (IASP) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मिलकर एक बहुत ही महत्वपूर्ण संदेश ‘आत्महत्याओं को रोका जा सकता है’ देने के लिए की.

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इस दिवस को मनाने का पहला वर्ष सफल रहा, इसलिए 2004 में, डब्ल्यूएचओ औपचारिक रूप से इस आयोजन को फिर से सह-प्रायोजक करने के लिए सहमत हो गया, जिससे यह एक वार्षिक मान्यता प्राप्त दिन (Annually Recognized Day) बन गया. हर साल इस दिवस को मनाने के लिए आईएएसपी (IASP) 60 से अधिक देशों में सैकड़ों कार्यक्रम आयोजित करता है.

वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे 2021 की थीम
वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे 2021 की थीम “कार्रवाई के माध्यम से आशा बनाना” है, जो आत्महत्या की रोकथाम की दिशा में एक सामूहिक पहल का वादा करता है.

इस दिन का महत्व
आत्महत्या से बचने और किसी भी कीमत पर इसे रोकने के लिए लोगों में जागरुकता पैदा करने के उद्देश्य से हर साल यह दिन मनाया जाता है. वॉलंटियर्स को पीड़ितों के साथ आत्महत्या को रोकने के तरीकों पर चर्चा करनी चाहिए, ताकि उनके मन में जीवन के प्रति जो निराशा हो वो कम हो.

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सुसाइड के कॉमन फैक्टर्स
डिप्रेशन जैसे शारीरिक और विशेष रूप से मानसिक स्वास्थ्य को अक्षम करने वाले कारक इस बड़ी लिस्ट में सबसे आम है. इसके अलावा फाइनेंशियल कंडीशन से उपजी चिड़चिड़ाहट, आक्रामकता, शोषण और दुर्व्यवहार के अनुभव तक परस्पर संबंधित कारक हैं, जो आत्महत्या के लिए उकासाने वाली दर्द और निराशा की भावनाओं को बढ़ावा दे सकते हैं.आत्महत्या के रोकथाम और इसके खिलाफ बनाई गई रणनीतियां आमतौर पर इस आत्मघाती व्यवहार के बारे में जन जागरूकता पर जोर देती हैं.

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