World Rabies Day 2020: जानें इंसानों और जानवरों में इस संक्रमण को फैलने से रोकने के ये खास टिप्स
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World Rabies Day 2020: जानें इंसानों और जानवरों में इस संक्रमण को फैलने से रोकने के ये खास टिप्स | health – News in Hindi

अपने जानवरों को हमेशा नियंत्रण में रखें, ताकि वे न तो किसी को काट पाएं और ना ही अन्य जानवर उन्हें काटें.

रेबीज वायरस (Rabies Virus) आमतौर पर जानवरों के काटने से इंसानों में फैलता है और भारत जैसे देशों में ऐसे काफी मामले सामने आते हैं.



  • Last Updated:
    September 28, 2020, 11:36 AM IST

रेबीज (Rabies) के बारे में जागरूकता फैलाने और इसके खात्मे के वास्ते वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए हर साल 28 सितंबर को विश्व रेबीज दिवस (World Rabies Day 2020) मनाया जाता है. बता दें कि रेबीज एक बेहद घातक वायरस है जो इंसानों और जानवरों को संक्रमित (Infection) करता है. यह संक्रमण केंद्रीय तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क पर हमला करता है और अगर इसके लक्षण दिखने शुरू हो जाएं तो यह घातक हो सकता है. घबराने की जरूरत नहीं है, अगर आप समय पर सही कदम उठाएंगे तो इस बीमारी को रोका जा सकता है.

भारत में रेबीज

रेबीज वायरस आमतौर पर जानवरों के काटने से इंसानों में फैलता है और भारत जैसे देशों में ऐसे काफी मामले सामने आते हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार भारत में रेबीज के काफी ज्यादा मामले सामने आते हैं और यह आंकड़ा पूरे विश्व का 36 फीसद है. इंडियन नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) के अनुसार अंडमान और निकोबार व लक्षदीप को छोड़कर पूरे देश में ऐसे मामले सामने आते रहते हैं.इंसानों में रेबीज के कारण मौत और बीमारी से जुड़े 96 फीसद मामले कुत्तों के काटने की वजह से होते हैं. बिल्लियों, बंदरों, भेड़ियों, गीदड़ और नेवलों के काटने और खरोंच की वजह से भी रेबीज के मामले दर्ज किए गए हैं. हालांकि, भारत में चमगादड़ों की वजह से होने वाले रेबीज के मामले सामने नहीं आते हैं, लेकिन अमेरिका जैसे अन्य देशों में ऐसी घटनाएं आम हैं. किसी भी गर्म खून वाले जानवर के काटने या खरोंच से रेबीज का खतरा रहता है.

रेबीज की वजह से उत्पन्न गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करने के लिए WHO और NCDC ने साल 2013 में हाथ मिलाया. इस गठजोड़ का मकसद देश में रेबीज के बारे में जागरूकता फैलाना, स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करना और वैक्सीन प्रदान करना है.

जानवरों में रेबीज की रोकथाम

भारत में कुत्तों की आबादी पर रोकथाम और उचित प्रबंधन ही कुत्तों में रेबीज की रोकथाम का सर्वोत्तम कदम है. निम्न कुछ सामान्य कदम उठाकर आप जानवरों में रेबीज की रोकथाम कर सकते हैं.

  • गर्म खून वाले अपने पालतू जानवरों (कुत्ता, बिल्ली, खरगोश और फेरेट) का नियमित टीकाकरण करवाएं. अपने पालतू जानवरों के रेबीज टीकाकरण और वैक्सीनेशन का अच्छा रिकॉर्ड रखें.
  • अपने जानवरों को हमेशा नियंत्रण में रखें, ताकि वे न तो किसी को काट पाएं और ना ही अन्य जानवर उन्हें काटें.
  • अगर आप नहीं चाहते कि आपके पालतू जानवर प्रजनन करें तो उनका बधिया या नसबंदी करवा दें.
  • अपने स्थानीय नगर निकाय या एनिमल वेलफेयर एजेंसी के सहयोग से आसपास के आवारा कुत्तों और बिल्लियों का टीकाकरण सुनिश्चित करें.
  • यदि आपके पालतू जानवर को किसी अन्य जानवर ने काट लिया है तो उसके घाव को पानी की तेज धार के बीच साबुन से धोएं. यही नहीं आप उसे जल्द से जल्द जानवरों के डॉक्टर के पास ले जाकर रेबीज और टेटनस का इंजेक्शन भी लगवाएं. इसके बाद भी अपने पालतू पर 10 दिन तक करीब से नजर रखें.
  • अपने पड़ोसियों, दोस्तों, परिवारजनों और अन्य पशु मालिकों को भी ऊपर बताए गए कदमों का अनुसरण करने का आग्रह करें.

इंसानों में रेबीज की रोकथाम

इंसानों में रेबीज से रोकथाम का संबंध घर के बाहर अच्छे व्यवहार और सही फर्स्ट एड व जानवरों के काटने या खरोंच के बाद रोगनिरोधक की जानकारी से जुड़ा है. निम्न उपाय अपनाकर आप रेबीज से खुद और अन्य लोगों को बचा सकते हैं.

  • जानवरों को अकेला छोड़ दें. घर से बाहर किसी बिल्ली, कुत्ते, बंदर या अन्य जानवर को कभी ना उकसाएं. जब आप चिड़ियाघर जाएं, किसी गुफा या सफारी पर जाएं तो जंगली जानवरों से भी दूर ही रहें.
  • यदि आप या आपके किसी करीबी को जानवर ने काट लिया है या खरोंच दिया है तो तुरंत घाव को पानी की तेज धार के नीचे लगाएं, साबुन या प्रोविडोन आयोडीन से घाव को अच्छी तरह से धो दें.
  • यदि आपको या आपके किसी करीबी को जानवर ने काट लिया है तो तुरंत घाव को धो दें और जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलकर रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन इंजेक्शन लगवाएं. इसके साथ ही रेबीज व सेप्सिस से बचने के लिए टेटनस का इंजेक्शन और उचित एंटीबायोटिक लें.
  • यदि किसी जानवर ने काट लिया है तो इसे हल्के में ना लें. इसके साथ ही हल्दी, मिर्च और चूने जैसी हानिकारक चीज का इस्तेमाल ना करें.
  • ऊपर बताई गई सावधानियों के संबंध में अन्य लोगों को भी बताएं और फर्स्ट एड टिप्स भी बताएं, ताकि उन्हें भी रेबीज से सुरक्षा मिले.अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, रेबीज क्या है, इसके प्रकार, लक्षण, कारण, बचाव, इलाज, जोखिम और दवा पढ़ें. न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है. myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.

अस्वीकरण : इस लेख में दी गयी जानकारी कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों और उनके संभावित उपचार के संबंध में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी योग्य और लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवा, जांच, निदान और इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आप, आपका बच्चा या कोई करीबी ऐसी किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है, जिसके बारे में यहां बताया गया है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। यहां पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के ना करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको होने वाले किसी भी तरह से संभावित नुकसान के लिए ना तो myUpchar और ना ही News18 जिम्मेदार होगा।



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