World Physiotherapy Day - Physiotherapy is effective in keeping players fit - World Physiotherapy Day
स्वास्थ्य

World Physiotherapy Day – Physiotherapy is effective in keeping players fit – World Physiotherapy Day

World Physiotherapy Day: 8 सितंबर को वर्ल्ड फिजियोथेरेपी डे (World Physiotherapy Day) मनाया जाता है. आपको बता दें कि फिजियोथेरेपी (Physiotherapy) इलाज की ऐसी तकनीक है जिसमें एक्सरसाइज के जरिए मांसपेशियों (Muscles) को एक्टिव किया जाता है. मतलब ये कि अगर आपके शरीर के किसी हिस्से में दर्द है और आप दवाइयां नहीं लेना चाहते हैं तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. फिजियोथेरेपी के जरिए आप दवा लिए बिना अपनी तकलीफ दूर कर सकते हैं लेकिन इसके लिए फिजियोथेरेपिस्ट की एडवाइज लेना जरूही है. यूं तो आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अपने शरीक के लिए कुछ समय निकालना सबसे अहम है और फिजिकली फिट और चुस्त रहने के लिए फिजियोथेरेपी (Physiotherapy) बहुत जरूरी है.

दैनिक जागरण में छपी रिपोर्ट में सीनियर फिजियोथेरेपिस्ट डॉ सर्वोत्तम चौहान बताते हैं कि किसी को एक्सीडेंट या खेल के दौरान अगर गंभीर चोट लगी हो या फिर कोई पैरालिसिस (Paralysis) का मरीज हो, तो इलाज के बाद उनकी बॉडी के कई पार्ट्स को एक्टिव बनाने में फिजियोथेरपी की अहम भूमिका रही है. आपने देखा होगा कि किसी भी खेल में एक ट्रेनर की तरह ही टीम के साथ उसके फिजियो भी काम करते हैं और प्लेयर को शारीरिक रूप से फिट बनाते हैं. एक फिजियो के उत्साह और कड़ी मेहनत से ही खिलाड़ी अच्छा परफॉर्मेंस दे पाते हैं.

आमतौर पर काम के दौरान हमें कई तरह की चोटें लग जाती हैं. डॉ चौहान के अनुसार, हम इन्हें वर्क रिलेडेट इंजरी कहते हैं. फिजियोथेरेपी से इनका इलाज संभव है.

कार्पल टनल सिंड्रोम (Carpal tunnel syndrome)
कंप्यूटर पर ज्यादा देर बैठने से आमतौर पर ये दिक्कत होती है. जब हम कीबोर्ड और माउस का ज्यादा यूज करते हैं तो इससे अंगूठे और उंगलियों में तेज दर्ज होता है. ये दर्द कलाई के अंदर की नस पर पड़ने वाले दबाव के कारण होता है.

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टेनिस एल्बो और गोल्फर्स एल्बो (Tennis Elbow and Golfers Elbow)
कोहनी में होने वाला ऐसा दर्द है जो बाहर और अंदर की तरफ होता है. डॉ चौहान के अनुसार, ये मांसपेशियों के ज्यादा काम करने से होता है और इसका कारण कोहनी का ज्यादा घर्षण भी होता है.

सर्वाइकल स्पोंडलाइटिस (Cervical Spondylitis)
डॉ चौहान ने बताया कि आज के दौर में ये एक आम समस्या बन गई है. ये एक ही जगह पर लंबे समय तक काम करने से मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है. जिसके कारण हाथों में भी झनझनाहट पैदा होती है.

टीनो-साइनोवइटिस (Teno-synovitis)
ये एक तरह का ऐसा अंदरूनी बदलाव है, जिसका हमें काफी देर से पता लगता है. जिससे जोड़ों में पानी जैसा भरने लगता है और आगे चलकर ये दर्द पैदा करता है.

प्लेयर्स की परफोर्मेंस के पीछे भी फिजियो 

-सही मायने में फिजियोथेरेपिस्ट (फिजियो) खिलाड़ी की क्षमता और खेल के परफॉर्मेंस का सही आंकलन कर लेते हैं. इससे यह तय हो जाता है कि कौन-कौन सी एक्सरसाइज करवाई जाए, जिससे खिलाड़ी अच्छे से खेल सके.

-फिजियो खिलाड़ी की मांसपेशियों औऱ ताकत के हिसाब से उसको स्ट्रेंथ कंडीशनिंग एक्ससरसाइज की ट्रेनिंग देते हैं, जिससे वह कम समय में बेहतर परफॉर्मेंस के लिए रेडी हो सके.

-खिलाड़ी को फिजियो इस तरह तैयार करते हैं कि वे कम से कम चोट के शिकार हों और अपना खेल पूरा कर सकें. जिससे उनकी परफोर्मेंस में रुकावट न आए.

-फिजियो के लिए यह भी महत्वपूर्ण होता कि अगर किसी प्लेयर को चोट लग जाती है, लेकिन उसे जल्द ही मैदान में वापस भेजना है. ऐसे में फिजियो खिलाड़ी को इसके लिए मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से तैयार करते हैं.

-बहुत से खेल ऐसे हैं जिसमें इंजरी ज्यादा होती है. जैसे फुटबॉल, इसमें घुटने की चोट बहुत कॉमन होती है. यदि यह चोट एक या दो ग्रेड की है, तो फिजियो की सहायता से इसकी रिकवरी काफी हद तक हो जाती है और किसी प्रकार के ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ती है. इसमें बहुत कम समय में खिलाड़ी फिर मैदान में होता है.

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