World No Tobacco Day 2022: तंबाकू से कैंसर का खतरा 25 गुना ज्यादा, एंटीबॉडी के लिए है बेहद खतरनाक
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World No Tobacco Day 2022: तंबाकू से कैंसर का खतरा 25 गुना ज्यादा, एंटीबॉडी के लिए है बेहद खतरनाक

World No Tobacco Day : हर साल 31 मई को वर्ल्ड नो टोबैको डे (तंबाकू निषेध दिवस) के रूप में जाना जाता है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार, पूरी दुनिया में हर साल तंबाकू से 80 लाख से ज्यादा लोगों की मौत होती है. तंबाकू सेवन करने वाले लोगों को तो नुकसान पहुंचाता ही है, साथ ही इसके संपर्क में आने वाले लोगों को भी नुकसान पहुंचाता है. दुनिया में तंबाकू से होने वाली मौतों में 70 लाख से ज्यादा मौतें प्रत्यक्ष तंबाकू के इस्तेमाल की वजह से होती है, जबकि लगभग 12 लाख मौतें इसके धुएं के संपर्क में आने का परिणाम हैं. अगर हम भारत की बात करें तो, डब्लूएचओ के अनुसार तंबाकू उत्पादों के सेवन से भारत में हर साल लगभग 13.5 लाख मौतें होती हैं. डब्लूएचओ के ही आंकड़े बताते हैं कि हर साल लगभग 41 हजार युवा और लगभग 400 बच्चों की मौत प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से तंबाकू के धुएं के संपर्क में आने के कारण हो जाती है. जब आप तंबाकू या सिगरेट छोड़ते हैं, तो इसमें पाया जाने वाला निकोटिन 3 से 10 दिन तक ब्लड में बना रहता है.

दरअसल, एक मीडियम साइज की सिगरेट में 10 मिग्रा निकोटिन पाया जाता है, जबकि शरीर केवल 1 मिली ग्राम निकोटिन ही अवशोषित कर पाता है. तंबाकू के सेवन के दौरान शरीर में पाए जाने वाले एंजाइम इसे बाय-प्रोडक्ट कोटिनिन (Cotinine) में तोड़ देते हैं. ये शरीर में ज्यादा समय तक रहता है. एक्सरसाइज इससे छुटकारा दिलाने में कारगर है. दिल्ली के द्वारका स्थित मनीपाल अस्पताल (Manipal Hospital) में रेस्पिरेटरी मेडिसिन के एचओडी डॉ. पुनीत खन्ना (Dr. Puneet Khanna) ने बताया कि कैसे तंबाकू हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाता है.

बीमारियों का खतरा
अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDS) के अनुसार तंबाकू का सेवन या स्मोकिंग करने वाले लोगों में कोरोनरी हार्ट डिजीज (Coronary heart disease) का खतरा 2 से 4 गुना, स्ट्रोक का खतरा 2 से 4 गुना और फेफड़ों के कैंसर होने का खतरा 25 गुना तक ज्यादा होता है. इससे टीबी और श्वसन (Respiration) से जुड़ी गंभीर बीमारियां भी होती हैं.

हार्ट
तंबाकू के धुएं में पाई जाने वाली कार्बन मोनोक्साइड गैस ब्लड में ऑक्सीजन को घटाती है. इसमें पाया जाने वाला निकोटिन ब्रेन और मसल्स की एक्टिविटी को इफैक्ट कर ब्लड प्रेशर को बढ़ाता है. इसके अलावा धुंआ ब्लडवेसल्स को डैमेज कर इन्हें मोटा और संकरा (Thick and Narrow) कर देता है. इससे दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, नतीजा ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है. हार्ट संबंधी रोग होने लगते हैं.

इम्यूनिटी
निकोटिन न्यूट्रोफिल (Neutrophils) की क्षमता को कमजोर करता है, इससे शरीर की इम्यूनिटी घटने लगती है. इसके अलावा स्मोकिंग से बनने वाला टार अन्य टॉक्सिन के साथ मिलकर बीमारी लड़ने में मददगार एंटीबॉडी को नष्ट करता है.

ब्रेन
स्मोकिंग दिमाग के सबकॉर्टिकल भाग को प्रभावित करता है. ब्रेन का ये हिस्सा आनंद, हार्मोन उत्पादन और याददाश्त से जुड़ा है. स्मोकिंग से ब्रेन का वॉल्यूम कम हो जाता है. इससे डिमेंशिया या विचलन (Disorientation) जैसी जटिल समस्याएं होती है.

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फेफड़े
तंबाकू का धुंआ फेफड़ों के म्यूकस (बलगम) वाले सेल्स को बढ़ाता है. क्योंकि फेफड़े म्यूकस को खुद नहीं हटा सकते हैं, ऐसे में ये वायुमार्ग में इकट्ठा होने लगता है. यही म्यूकस संक्रमण बढ़ाता है. इसके अलावा धुंआ फेफड़ों में पाई जाने वाली सिलिया (Cilia) नामक फाइबर्स की एक्टिविटी को धीमा कर देता है. सिलिया का काम फेफड़ों की सफाई करने और म्यूकस को मुंह के रास्ते बाहर की ओर धकेलने का है. लगातार सिगरेट पीने से फेफड़ों में इनकी संख्या भी घटती जाती है. इसके अलावा फेफड़े के कैंसर का सबसे प्रमुख कारण स्मोकिंग ही है.

आंखें
तंबाकू में ऐसे केमिकल पाए जाते हैं जो ब्रेन के विजन के लिए जिम्मेदार हिस्से को प्रभावित करते हैं. नतीजतन रोशनी का काम होना, मोतियाबिंद, ग्लूकोमा और डायबिटीज रेटिनोपैथी जैसी समस्याएं समय से पहले होने लगती हैं.

कैसे छोड़े तंबाकू और स्मोकिंग?

क्यों छोड़ना चाहते हैं इसे लिख लें
कहते हैं कागज पर लिखा हमेशा मोटीवेट करता है. इसलिए तंबाकू या सिगरेट छोड़ने का जब भी फैसला करें, उसे एक कागज पर लिख लें. हमेशा उस कारण को याद रखें कि आप इसे क्यों छोड़ना चाहते हैं. ये आपको हमेशा मोटीवेट करेगा.

कब से छोड़ना है ये तय कर लें
आप अक्सर ये सोचते हैं कि बस, आज के बाद नहीं. लेकिन फिर वही रूटीन शुरू हो जाता है. इसलिए  अगर आप सच में तंबाकू या सिगरेट छोड़ना चाहते हैं, तो इसकी तारीख तय कर लें. और इसके बाद छोड़ने की प्रैक्टिस शुरू करें. सबसे पहले दिन भर में पी जाने वाली सिगरेट या गुटखा आदि की संख्या घटाएं. जैसे कि चाय और भोजन के बाद या बिलकुल सुबह, वॉक के दौरान सिगरेट पीना या तंबाकू चबाना. इन्हें कम करें.

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ट्रिगर को पहचानें
कहते हैं कि जिस तरह से अच्छे काम को मैनेज किया जाता है, उसी तरह से तंबाकू छोड़ना भी एक अच्छा काम है. इसे भी मैनेज करें. इसका मैनेजमेंट ही आपकी लत या आदत को खत्म कर देता है, इसलिए ट्रिगर को पहचानें, ट्रिगर दो तरह के होते हैं. पहला आदत और दूसरा इमोशन. इनमें डेली रुटीन, घटनाएं, एक्टिविटी और भावनाएं शामिल रहती हैं. तंबाकू चबाने या सिगरेट पीने के बाद कैसा महसूस करते हैं, इसे ट्रैक करें. यही आपके ट्रिगर हैं. इन्हें मैनेज करने के लिए कुछ अन्य चीजें जैस कि कद्दू के बीज, भुनी अलसी फायदेमंद है. टूथपिक्स, स्ट्रॉ या दालचीनी स्टिक चबाएं. ये तंबाकू की इच्छा को कम करते हैं.

Tags: Health, Health News, Lifestyle, World No Tobacco Day

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