World Heart Day 2020: जानें महिलाओं के हार्ट हेल्थ से कैसे जुड़ा है अनियमित पीरियड्स
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World Heart Day 2020: जानें महिलाओं के हार्ट हेल्थ से कैसे जुड़ा है अनियमित पीरियड्स | women-special – News in Hindi

मासिक धर्म, माहवारी, पीरियड्स- (Menstruation) नाम चाहे जो हो, चूंकि हर महीने आता है इसलिए यह बेहद आसान है और इसके बारे में बात करने लायक जैसी कोई बात नहीं है- ऐसा बिलकुल नहीं है. अनियमित पीरियड्स कई लड़कियों और महिलाओं के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर सकता है. इस बारे में अब तक जितने भी शोध या अध्ययन हुए हैं उनसे पता चला है कि जिन महिलाओं को आमतौर पर अनियमित पीरियड्स की समस्या होती है उन महिलाओं में नियमित मासिक धर्म वाली महिलाओं की तुलना में हृदय रोग विकसित होने का खतरा 28 प्रतिशत अधिक होता है. 29 सितंबर को हर साल दुनियाभर में वर्ल्ड हार्ट डे (World Heart Day) मनाया जाता है और इस मौके पर हम आपको अनियमित मेन्स्ट्रुएशन साइकल और हार्ट हेल्थ के बीच क्या संबंध है इस बारे में बता रहे हैं.

भारत में पीसीओएस के बारे में जागरुकता की कमी
जिन महिलाओं को पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) की बीमारी होती है, (यह बीमारी महिलाओं के शरीर में पुरुष हार्मोन के उच्च स्तर के कारण होती है) उन महिलाओं में अक्सर अनियमित पीरियड्स की शिकायत रहती है, उनका वजन अधिक होता है या वे मोटापे का शिकार होती हैं, उन्हें डायबिटीज या हाइपरटेंशन की भी शिकायत होती है और ये सारे ही फैक्टर्स हृदय रोग और स्ट्रोक के लिए जिम्मेदार अहम जोखिम कारक हैं. पीसीओएस के कुछ और सामान्य लक्षणों की बात करें तो इसमें पीरियड्स के दौरान हद से ज्यादा दर्द होना, शरीर पर अतिरिक्त अनचाहे बालों की मौजूदगी, सिर से बालों का तेजी से झड़ना, मुंहासे और गर्भवती होने में कठिनाई होना शामिल है.समस्या ये है कि भारत में महिलाएं चुपचाप इस दर्द और समस्या को सहती रहती हैं. अनियमित मासिक धर्म वाली महिलाएं अक्सर इसे किसी बीमारी के लक्षण के तौर पर देखती भी नहीं हैं और उन्हें लगता है कि यह तो सामान्य सी बात है. जबकि सच्चाई यह है कि अनियमित और अप्रत्याशित पीरियड्स उन प्रमुख लक्षणों में से एक है जो पीसीओएस को डायग्नोज करने में मदद कर सकता है. यहां तक ​​कि मुंहासे और चेहरे पर अतिरिक्त बाल भी ज्यादातर महिलाओं के मन में किसी तरह की आशंका को जन्म नहीं देते हैं.

भारत में यौन और प्रजनन स्वास्थ्य को लेकर लोगों के बीच जागरूकता कि कितनी कमी है, यह बातें उसी की ओर इशारा करती हैं. जिन महिलाओं को पीसीओएस होता है, वे कई बार महीने में दो बार पीरियड्स का अनुभव कर लेती हैं तो कई बार ऐसा भी होता है कि कई-कई महीनों तक पीरियड्स आता ही नहीं है. मासिक धर्म के दौरान होने वाला रक्तस्त्राव या तो बहुत हल्का हो सकता है या फिर इतना अधिक की पीड़ित महिला को एनीमिया हो जाए. एनीमिया, एक ऐसी स्थिति है जो कई भारतीय महिलाओं को प्रभावित करती है और उनके हृदय की सेहत के लिए हानिकारक हो सकती है.

एक तरफ तो पीसीओएस से पीड़ित करीब 80% महिलाएं मोटापे से ग्रस्त होती हैं, तो वहीं दूसरी तरफ मोटापे के कारण पीसीओएस नहीं होता और ऐसा जरूरी नहीं है कि पीसीओएस के कारण मोटापा हो ही. पीसीओएस, मेटाबॉलिज्म में गड़बड़ी से जुड़ा हुआ है, जिसके कारण वजन आसानी से बढ़ने लगता है लेकिन वजन कम करना मुश्किल हो जाता है. यह भी देखा गया है कि पीसीओएस वाली महिलाओं में आमतौर पर इंसुलिन प्रतिरोध की भी समस्या होती है, जिसके कारण शरीर में इंसुलिन का स्तर बढ़ जाता है और डायबिटीज का खतरा भी और नतीजतन हृदय रोग. इतना ही नहीं, हाई ब्लड प्रेशर, लिवर की बीमारी और स्लीप ऐप्निया तक होने का खतरा बढ़ जाता है.

हार्ट हेल्थ और पीसीओएस

पीसीओएस वाली महिलाओं में हृदय रोग के बढ़ते जोखिम का एक संभावित कारण यह भी हो सकता है कि अपनी हमउम्र बाकी महिलाओं की तुलना में पीसीओएस से पीड़ित महिलाएं ओवरवेट होती हैं और उनमें हाई बीपी और डायबिटीज भी होता है. वेट गेन, मुंहासे, चेहरे पर अनचाहे बाल और बांझपन- ये सारी चीजें किसी भी महिला के आत्मसम्मान को प्रभावित करती हैं जिससे उनका तनाव बढ़ता है, जो जीवन में हृदय रोग को जल्दी विकसित करने में प्रमुख योगदान देता है.

आपको बता दें कि वैसे तो पीसीओएस बीमारी का कोई निश्चित इलाज मौजूद नहीं है लेकिन अपने लाइफस्टाइल में जरूरी बदलाव करके पीसीओएस को आसानी से मैनेज जरूर किया जा सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं को अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखने के लिए सक्रिय रहने की जरूरत है. अतिरिक्त वजन कम करने से पीसीओएस के कुछ लक्षणों की गंभीरता कम की जा सकती है. अगर पीसीओएस से पीड़ित महिलाएं अपने वजन में सिर्फ 5 से 10 प्रतिशत की भी कमी कर लें तो इसका सेहत पर बेहतर प्रभाव नजर आता है जिसमें- मासिक धर्म चक्र का नियमित होना, मूड का बेहतर रहना और डायबिटीज और हृदय रोग का जोखिम भी कम होना शामिल है.

अगर किसी महिला के मासिक धर्म चक्र में परिवर्तन होता है उन्हें इस बात को नोट करना चाहिए क्योंकि ये चीजें सेहत से जुड़ी समस्याओं के बारे में जानने में मदद कर सकती हैं. अगर आपके परिवार में किसी बीमारी की फैमिली हिस्ट्री है तो आपको और ज्यादा सतर्क रहना चाहिए. स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, नियमित रूप से व्यायाम करना और स्वस्थ और संतुलित आहार का सेवन करके आप न सिर्फ अपने वजन को नियंत्रित कर सकती हैं बल्कि पीसीओएस और इससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को भी मैनेज करने में मदद मिल सकती है. पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं में डिप्रेशन, ऐंग्जाइटी, खाने से जुड़ी बीमारियां और यौन रोग विकसित होने का भी खतरा अधिक होता है।.

इस आर्टिकल को माइ उपचार के लिए डॉ अपर्णा जसवाल ने लिखा है जो फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट, ओखला रोड, नई दिल्ली में कार्डिएक पेसिंग एंड इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी
विभाग की अतिरिक्त निदेशक हैं.
अधिक जानकारी के लिए पढ़ें हमारा आर्टिकल पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं में हृदय रोग का खतरा अधिकन्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है. myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.



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