किडनी फेल होने का कारण क्यों बनती है डायबिटीज, जानें मधुमेह और गुर्दे का रिश्ता
स्वास्थ्य

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डायबिटीज (Diabetes) का सबसे बड़ा कारण अस्वस्थ जीवनशैली है। जिसके कारण अधिकतर वयस्कों के शरीर में ब्लड शुगर का लेवल हाई हो जाता है। इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के मुताबिक भारत में 3 मार्च 2020 तक करीब 7 करोड़ 70 लाख वयस्क लोग मधुमेह की समस्या से पीड़ित थे। एक सामान्य आंकड़े की बात करें, तो डायबिटिक मरीजों में से करीब एक चौथाई मरीजों को किडनी फेलियर (Kidney Failure) का खतरा होता है। किडनी का कार्य बाधित हो जाने पर ही डायलिसिस की जरूरत पड़ती है, जिसकी मदद से शरीर में मौजूद रक्त को फिल्टर करके शुद्ध किया जाता है। जिसमें हजारों-लाखों रुपये का खर्चा आता है। मगर क्या आप ने कभी सोचा है कि आखिर मधुमेह और किडनी का क्या रिश्ता है और इससे किडनी फेल होने का खतरा कैसे होता है?

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आइए सबसे पहले जानते हैं कि मधुमेह क्या है?
मधुमेह की समस्या में मरीज के शरीर में ब्लड शुगर का लेवल बढ़ने लगता है। जिसके मुख्य रूप से तीन प्रकार होते हैं, जैसे- टाइप-1 डायबिटीज, टाइप-2 डायबिटीज और जेस्टेशनल डायबिटीज। मधुमेह के तीनों प्रकारों में इंसुलिन की भूमिका अहम होती है। क्योंकि इंसुलिन हमारे शरीर में ब्लड ग्लूकोज को कंट्रोल करने में मदद करता है।

  • टाइप-1 डायबिटीज में आपका इम्यून सिस्टम इंसुलिन का उत्पादन करने वाली सेल्स को गलती से खतरा समझकर नष्ट करने लगता है।
  • टाइप-2 डायबिटीज सबसे आम प्रकार है, जिसमें आपके शरीर में इंसुलिन पैदा करने वाली सेल्स अपर्याप्त या ना के बराबर मात्रा में इंसुलिन का उत्पादन करती हैं।
  • जेस्टेशनल डायबिटीज तब होती है, जब गर्भावस्था के दौरान या उसकी वजह से महिलाओं को मधुमेह हो जाए।

किडनी की जरूरत क्यों है और इसके अस्वस्थ होने से क्या हो सकता है?
हमारे शरीर से अशुद्धियां निकालने के लिए किडनी दिन-रात कार्य करती रहती हैं। यह ब्लड से अपशिष्ट पदार्थ को पेशाब के रास्ते बाहर निकालने में मदद करती है। किडनी के अस्वस्थ होने व खराब होने के कारण धीरे-धीरे इसका कार्य बाधित होता रहता है। किडनी की समस्या का सबसे बड़ा डर यह है कि इसके बारे में अक्सर समस्या के गंभीर होने पर पता लगता है। जब किडनी रक्त को शुद्ध नहीं कर पाती है, तो डायलिसिस की मदद से ब्लड को फिल्टर करवाया जाता है। अगर सही समय पर इलाज न मिल पाए, तो किडनी फेल हो जाती है।

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डायबिटीज से किडनी कैसे खराब होती है?
देश के मशहूर जीवनशैली विशेषज्ञ और होम्योपैथी के पूर्व सहायक प्रोफेसर डॉ. एच के खरबंदा के मुताबिक, गुर्दे हमारे रक्त को छानने और टॉक्सिन्स को निकालने के लिए जिम्मेदार होते हैं। जब लगातार 6 महीने से ज्यादा समय तक डायबिटीज असंतुलित रहती है, तो उसके कारण गुर्दे के कार्य में गड़बड़ी हो जाती है। इसी वजह से क्रॉनिक किडनी डिजीज (Chronic Kidney Disease) विकसित हो सकती है। ऐसे मामलों में दवाएं, डायलिसिस और किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है। डॉ. खरबंदा आगे बताते हैं कि मधुमेह के कारण गुर्दे पर असर पड़ने से असंतुलित ब्लड प्रेशर, यूरिन में एल्ब्यूमिन प्रोटीन आना, आंखों, हाथों, पैरों और टखनों में सूजन, बार-बार पेशाब आना, मेंटल कंफ्यूजन होना, सांस लेने में दिक्कत होना, उल्टी, जी मिचलाना, थकान या त्वचा पर खुजली जैसे लक्षण दिख सकते हैं। मधुमेह के कारण आपके गुर्दे (किडनी) निम्नलिखित तरीकों से खराब हो सकते हैं।

  1. खून को साफ करने के लिए मुख्य रूप से किडनी में मौजूद रक्त धमनियों का इस्तेमाल होता है। मधुमेह के दौरान ब्लड शुगर बढ़ने से यह रक्त धमनियां सिकुड़ जाती हैं या बाधित हो जाती हैं। जिससे किडनी को पर्याप्त खून और पोषण नहीं मिल पाता है। पोषण न मिलने के कारण किडनी ढंग से कार्य नहीं कर पाती है और शरीर के लिए जरूरी एल्ब्यूमिन प्रोटीन (Albumin Protein) पेशाब के सहारे बाहर निकल जाता है।
  2. शरीर के अलग-अलग कार्यों के लिए संकेत देने का काम हमारा नर्वस सिस्टम करता है। लेकिन ब्लड शुगर उच्च हो जाने के कारण शरीर की रक्त धमनियां सिकुड़ जाती हैं और नर्वस सिस्टम को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता है। जिससे वह पेशाब से ब्लैडर भर जाने पर भी शरीर को पेशाब करने का संकेत नहीं भेजता है। इस वजह से ब्लैडर के साथ किडनी पर भी काफी दबाव पड़ता है और उसके भी क्षतिग्रस्त होने का खतरा बन जाता है।
  3. ब्लैडर बार-बार भरने या समय पर खाली न होने के कारण इसमें यूरिन इंफेक्शन हो सकता है। धीरे-धीरे इस इंफेक्शन के कारण बैक्टीरिया किडनी तक पहुंच जाते हैं और उसे भी संक्रमित कर सकते हैं।

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मधुमेह के दौरान किडनी डिजीज से बचने के उपाय
मधुमेह, थायरॉइड जैसी जीवनशैली की समस्याओं को लाइफस्टाइल में बदलाव करवाकर रिवर्स करने में महारत प्राप्त कर चुके डॉ. खरबंदा ने कहा कि, मधुमेह रोगियों में किडनी की समस्या का कोई स्थाई इलाज नहीं होता है और इसका उपचार पूरी जिंदगी चलता है। हालांकि, इसे कंट्रोल किया जा सकता है। जिसके लिए आपको निम्नलिखित बातें ध्यान रखनी चाहिए।

  • अपना ब्लड शुगर लेवल सामान्य रखें। नियमित टेस्ट से अपना ब्लड शुगर खाली पेट 100mg/dL और रैंडम ब्लड शुगर टेस्ट का रिजल्ट 150mg/dL के आसपास रखें।
  • अपना HbA1c टेस्ट का रिजल्ट 6.5 तक रखें। यह टेस्ट पिछले तीन महीने का डायबिटीज का कंट्रोल बताता है। ऐसा करने से पूरी उम्र बिना किसी शारीरिक हिस्से को नुकसान पहुंचाए, मधुमेह को नियंत्रित रखा जा सकता है।
  • डायबिटीज रोगी को किडनी रोग का समय पर पता लगाने और गंभीर नुकसान से बचने के लिए साल में एक बार किडनी अल्ट्रासाउंड टेस्ट, सीरम, यूरिया, यूरिक एसिड और क्रिएटिनिन टेस्ट, यूरिन फॉर माइक्रो एल्ब्यूमिन यूरिया टेस्ट करवाना चाहिए।

यहां दी गई जानकारी किसी भी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है।



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