कोरोना संक्रमण से जूझ रहे 'गंभीर' मरीजों के लिए ये दवा साबित हो रही अमृत!
स्वास्थ्य

this medicine will miracle for corona patient | कोरोना संक्रमण से जूझ रहे ‘गंभीर’ मरीजों के लिए ये दवा साबित हो रही अमृत!

नई दिल्ली: दुनियाभर में कोरोना से लड़ने के लिए वैक्सीन की खोज तो जारी है, लेकिन अब तक वैक्सीन नहीं आ पाई है. हालांकि, वैक्सीन से पहले कुछ दवाइयां हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और रेमडेसिविर कोरोना से लड़ने में मददगार साबित हो रही हैं. इन सबसे भी असरदार एक दवा है, जो कोरोना के इलाज में सबसे कारगर मानी जा रही है. हाल ही में हुए एक शोध से साफ हुआ कि डेक्सामेथासोन कोरोना से होने वाली मृत्युदर को 20-33 फीसदी तक कम कर देती है. 

पिछले दिनों  भी ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (Oxford University) के वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि उन्हें ऐसे रिजल्ट मिले हैं कि डेक्सामेथासोन (Dexamethasone) दवा के इस्तेमाल से कोरोना के गंभीर मरीज ठीक हो रहे हैं. यूनिवर्सिटी की रिचर्स में कहा गया कि डेक्सामेथासोन नाम के स्टेराइड से गंभीर मरीजों की मृत्यु दर एक तिहाई तक घट गई. अब  “न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन” ने भी  साफ किया है कि ये दवा कोरोना संक्रमण से जूझ रहे ‘गंभीर’ मरीजों के इलाज के लिए मददगार है. ग्लूकोकॉर्टीकॉइड डेक्सामेथासोन से फायदा सबसे ज्यादा उन मरीजों को हुआ जो मेकैनिकल वेंटिलेशन पर थे.

रिसर्च के दौरान नार्मल मरीजों में 41.4% की तुलना में डेक्सामेथासोन समूह में रोगियों के लिए 29.3% की 28-दिवसीय मृत्यु दर देखी गई. ये सभी गंभीर श्रेणी में आते हैं. दवा का अच्छा रिस्पांस देखने को मिला. लेकिन ऐसे रोगियों में डेक्सामेथासोन के लिए कोई फायदा नहीं देखा गया जिन्हें ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं थी. यानी कि वो मॉडरेट केस थे. डेक्सामेथासोन का उपयोग पहले से ही कई उपचार दिशानिर्देश पैनल द्वारा किए जा रहे हैं जिसमें यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ शामिल था.

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डेक्सामेथासोन एक बहुत ही सस्ता स्टेराइड (steroid) है और इसका इस्तेमाल कई रोगों के इलाज में किया जाता है. रिचर्स बताती है कि अगर COVID-19 के मरीज में ऑक्सीजन की कमी है और वह वेंटिलेटर पर है, ऐसे मरीज को अगर डेक्सामेथासोन दवा दी जाती है, उसके बचने के उम्मीद ज्यादा रहती है और इस पर खर्चा भी बहुत कम आता है.

जानकारों की मानें तो डेक्सामेथासोन दवा डॉक्टरों की निगरानी में केवल गंभीर मरीजों को ही देनी चाहिए. इसको लेकर ऐसे प्रमाण नहीं मिले है कि यह दवा कोरोना के मामूली असर वाले मरीजों पर भी काम करती है, बल्कि यह उन्हें नुकसान भी पहुंचा सकती है. इस दवा के मामूली साइट इफेक्ट हो सकते हैं.

 



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