Side Effects of Holi Colours: केमिकल युक्त होली कलर्स सिर से लेकर पैरों तक पहुंचाते हैं नुकसान, दूर रहें इनसे
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Side Effects of Holi Colours: केमिकल युक्त होली कलर्स सिर से लेकर पैरों तक पहुंचाते हैं नुकसान, दूर रहें इनसे

Side Effects of Holi Colours: होली 18 मार्च (Holi 2022) को है और हर किसी को इस त्योहार का बेसब्री से इंतजार है. लोग अभी से शॉपिंग करने लगे हैं. बाजार रंग-बिरंगे होली कलर्स से सज गया है. हालांकि, मार्केट में मिलने वाले अधिकतर होली कलर्स कृत्रिम (Synthetic) होते हैं, जिन्हें तैयार करने के लिए कई तरह के हानिकारक केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है. इन रंगों में लेड ऑक्साइड, कॉपर सल्फेट, मरकरी सल्फाइट, क्रोमियम आयोडाइड, एल्युमिनियम ब्रोमाइड आदि होते हैं. ये सभी रसायन (chemicals) बाल, त्वचा, आंखों, फेफड़ों, किडनी आदि को नुकसान पहुंचा सकते हैं. आइए जानते हैं आर्टिफिशियल रंगों (synthetic colours) के सेहत पर होने वाले नुकसान (Holi colors ke nuksan) क्या हैं.

होली कलर्स के सेहत पर होने वाले नुकसान
स्पीकिंगट्री में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, हरे रंग में कॉपर सल्फेट होता है, जो आंखों की एलर्जी और अस्थायी अंधापन (temporary blindness) का कारण बन सकता है. लाल रंग में मौजूद मरकरी सल्फाइड त्वचा के कैंसर और अन्य समस्याओं जैसे मानसिक मंदता (mental retardation), खराब दृष्टि और पक्षाघात (paralysis) के जोखिम को बढ़ा सकता है. बैंगनी रंग में मौजूद क्रोमियम आयोडाइड ब्रोन्कियल अस्थमा और एलर्जी का कारण बनता है. सिल्वर रंग में मौजूद एल्युमिनियम आयोडाइड कार्सिनोजेनिक (कैंसर के रिस्क को बढ़ाने वाले) होते हैं. नीले रंग में पाया जाने वाला प्रशियन ब्लू कॉन्टैक्ट डर्मटाइटिस का कारण बन सकता है.

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त्वचा को पहुंचाते हैं नुकसान
होली में बनने वाले कृत्रिम रंगों में इंडस्ट्रियल केमिकल्स का इस्तेमाल होता है. काले रंग में लेड ऑक्साइड, हरे में कॉपर सल्फेट, नीले में कोबाल्ट नाइट्रेट, जिंक सॉल्ट, लाल रंग में मरकरी सल्फेट जैसे रसायन मिले होते हैं. रंगों को शाइन देने के लिए मिका और ग्लास पार्टिकल्स भी मिलाए जाते हैं. इन केमिकल्स के कारण त्वचा पर एलर्जी, खुजली, ड्राईनेस, चकत्ते, फोड़े-फुंसी, घाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं. बेहतर है कि होली के दिन हर्बल रंगों का इस्तेमाल करें, खासकर वे लोग जिनकी त्वचा बहुत ज्यादा संवेदनशील है.

आंखों के लिए है अनहेल्दी
कृत्रिम रंग (synthetic colours) होली खेलते समय आंखों में चले जाएं, तो आपकी आंखें अस्थायी रूप से खराब हो सकती हैं. इससे आंखों में जलन, चुभन, आंखों का लाल होना, एलर्जी, कॉर्नियल अल्सर, कंजंक्टिवाइटिस, अस्थायी ब्लाइंडनेस हो सकती है. आंखों में रंग चला जाए, तो आंखों को रगड़ें नहीं और तुरंत पानी से छींटे मारकर साफ करने की कोशिश करें.

किडनी को करता है प्रभावित
होली में इस्तेमाल किए जाने वाले काले रंग में मौजूद लेड ऑक्साइड सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करके किडनी को डायरेक्ट नुकसान पहुंचा सकते हैं. होली खेलते समय किसी के भी आंख, नाक, कान, मुंह में जबरदस्ती रंग ना डालें.

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अस्थमा के मरीज दूर रहें रंगों से
यदि आपको सांस संबंधित कोई भी समस्या है या फिर अस्थमा है, तो आपको भूलकर भी केमिकल युक्त रंगों से होली नहीं खेलनी चाहिए. नाक के जरिए होली कलर्स में मौजूद नुकसानदायक रसायन, पार्टिकल्स सांस की नली में पहुंचकर समस्या पैदा कर सकते हैं. इससे आपको अस्थमा अटैक आ सकता है. पर्पल रंग में मौजूद क्लोरिन आयोडिन अस्थमा को ट्रिगर कर सकते हैं. आप होली खेलने के लिए घर से बाहर ना निकलें, बेहतर है कि मास्क या मुंह-नाक पर रूमाल बांधकर रहें.

कैंसर, मेंटल रिटार्डेशन का जोखिम बढ़ाए
कुछ रंग मानसिक सेहत को भी नुकसान पहुंचाते हैं. ये नवर्स सिस्टम पर अटैक करके मेंटल रिटार्डेशन के जोखिम को बढ़ा सकते हैं. इसके अलावा, कई रंग त्वचा पर अधिक दिनों तक रह जाएं, तो त्वचा कैंसर होने का भी खतरा बढ़ जाता है.

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