Seepage aka sahajan Benefits for health Shashi kant Mishra Bhojpuri - Bhojpuri में पढ़ें
स्वास्थ्य

Seepage aka sahajan Benefits for health Shashi kant Mishra Bhojpuri – Bhojpuri में पढ़ें

नाम सुनले त जरूर होखब लेकिन इ शायद पता ना होइ कि सहजन से जादे चमत्कारी आ परोपकारी पौधा इ संसार में कौनो दोसर नइखे. जइसे माई भगवान बनके बच्चा के देखरेख करे ले, ओही तरह सहजन वैद्य बन के इंसान के चुस्त दूरूस्त रखे ला. एकर चमत्कारी गुण के वजह से ही प्रधानमंत्री मोदी जी आपन फिट इंडिया प्रोग्राम में सहजन के जिक्र कइले रहनीं.

सहजन के कई गो नाम से जानल जाला-सहजना, सुजना, सेंजन, मुनगा. अंग्रेजी में एकरा के ड्रम स्टिक कहल जाला. एकर खेती ऑल ओवर इंडिया में कइल जाला. आपन पूर्वांचल के माटी आ मौसम त सहजन खातिर परफेक्ट बा. ओइसे रऊंवा के बता दीं कि सहजन में एडजेस्टिंग पॉवर गजब के ह. इ कइसनो माटी में बम बम कइ सकेला, जाड़ा,गर्मी, बरसात, कौनो मौसम के एकरा पर जादे असर ना होला. बस एकरा के तेज हवा से बचावे के इंतजाम करे के पड़ेला काहें कि एकर गांछ हवा में लचक जाला.

सहजन दू तरह के होला-देसीया आ नयका हाईब्रिड वाला. देसीया सहजन साल में एक बार फर देला, ओही जी हाईब्रिड वाला साल में दू बार. कमाई धमाई के हिसाब से हाईब्रिड वाला वैराइटी जादा अच्छा बा. पी.के.एम.1, पी.के.एम.2, कोयंबटूर 1,कोयंबटूर 2 हाईब्रिड के मेन वैराइट ह. रऊंवा एकरा में से कौनो लगा सकेनी.

हाईब्रिड वैराइटी के गांछ लगावे से पहिले गड्डा के बढ़िया से तैयार कइ लीं. वर्मी कम्पोस्ट चाहें गोबर के सड़ल खाद दे दिहीं, खाद में नीम के पत्तई चाहें नीम के तेल मिला दिहीं ताकि कीड़ा मकोड़ा जड़ के ना काटे. सहजन के साथे अच्छा बात ह कि एकरा में रोग व्याधि के जादा असर ना होला. बस भूइरी एकर दुश्मन बिया. सहजन के सुंगध मिलते पहुंच जाइ आ पूरा पत्तीईये चबा जाइ. भुइरी से बचावे के खातिर कीटनाशक के छिड़काव करब.

सहजन लगावे के टाइम बरसात बाद से ठंडा के पहिले तक ह. शुरू में सहजन के जादे पानी आ पाला से बचावे के पड़ेला. सहजन के गांछ में तीन से चार महीने में फूल आवे ला आ पांच से छह महीना में फर. फर के आराम से मोटावे देब लेकिन रेशा पड़े से पहिले फर तुर लेब काहें कि रेशा वाला फर के रेट कम मिलेला.

सहजन के गांछ चार से पांच साल बढ़िया फर देला. एक फर ले ला के बाद ओकर के छंटाइया कइ देबे के चाहीं ताकि गांछ नीचे घना होखे आ जादे ऊपर ना भागे. सहजन के एगो बढ़िया तैयार गांछ से एक सीजन में 40 से 50 किलो फर आराम से मिल जाला. सहजन के खेती हर्बल आ आयुर्वेदिक एग्रीकल्चर के कैटेगरी में आवेला आ टाइम टाइम पर सरकार एकरा में अनुदान भी देले. सरकारी स्कीम के बारे में रउंवा आपन जिला के कृषि केंद्र से पता कइ सकत बानी.

सहजन के बाजार भाव आजकल गजबे के टाइट बा. गांव देहात के बाजार में भी सहजन के फरी सौ पार कइले बा. बड़ शहर के त बाते छोड़ दिहीं. मजेदार बात इ बा कि सहजन के फर के साथ साथ ओकर फूल, पत्तई, छिलका, जड़ सब बिकाला. नेचुरल रूप में भी, नया नया प्रोडक्ट तौर पर भी. रऊंवा इ बात जान के हैरान हो जाइब कि अब आयुर्वेदिक कंपनी कुल एकर गोलीओ बनावत बानी सन. त चलीं रऊंवो सहजन से कमाई में जुट जाइं. सहजन के लगाईं इ साल आ अगिला साल बइठे के पीटीं माल! जय हो

(शशिकांत मिश्र वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

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