किताब का दावा- प्रोसेस्ड फूड, ड्रग्स जितना खतरनाक, इंसान को है इसकी लत
स्वास्थ्य

process food is addictive like dangerous drugs book claimed samp | किताब का दावा- प्रोसेस्ड फूड, ड्रग्स जितना खतरनाक, इंसान को है इसकी लत

नई दिल्लीः समय के साथ हमारी खानपान की आदतों में काफी बदलाव आया है. इन्हीं बदलावों के तहत प्रोसेस्ड फूड का चलन काफी ज्यादा बढ़ता जा रहा है. लेकिन एक किताब में इन प्रोसेस फूड्स खासकर शुगर और कार्बोहाइड्रेट वाले प्रोसेस्ड फूड का हमारी सेहत और मस्तिष्क पर पड़ने वाले असर को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया गया है. दरअसल जूलिया रॉस द्वारा लिखी गई मशहूर किताब The Craving Cure में बताया गया है कि प्रोसेस्ड फूड लोग जितना ज्यादा खा रहे हैं, लोगों को उसकी उतनी ही लत लग रही है और गौरतलब है कि यह लत कोकीन जैसे खतरनाक ड्रग्स से भी कहीं ज्यादा बड़ी है. 

किताब में फूड इंडस्ट्री पर लगाए बड़े आरोप
अपनी किताब में जूलिया रॉस लिखती हैं कि ‘फूड इंडस्ट्री यह कहकर बचती रही है कि ‘यह उपभोक्ता की पसंद है कि वह क्या खाना चाहते हैं, हम किसी को कुछ खाने के लिए जबरदस्ती नहीं करते हैं’, लेकिन विज्ञान भी इसे लेकर चिंता जाहिर कर चुका है. साल 2010 में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने के चीफ रहे डेविड केसलर ने एक किताब लिखी थी. इस किताब का नाम है The End of Overeating. इस किताब में केसलर ने फूड इंडस्ट्री के तत्कालीन लीडर्स के हवाले से कहा था कि उन्हें पता है कि उनके फूड प्रोडक्ट्स लोगों की सेहत बिगाड़ रहे हैं. फूड इंडस्ट्री के लोगों ने ये भी खुलासा किया कि हम लोग इन प्रोसेस्ड फूड को खाना बंद नहीं कर सकते क्योंकि हम लोगों को इनकी लत लग चुकी है!

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वैज्ञानिकों ने भी की लत की पुष्टि
जो वैज्ञानिक विभिन्न लतों (Addiction) पर रिसर्च करते हैं, उन्हें एडिक्शन साइंटिस्ट कहते हैं. साल 2007 में यूनिवर्सिटी ऑफ बॉरडॉक्स में एडिक्शन साइंटिस्ट ने एक अध्ययन किया था. इस अध्ययन में उसी तरीके का इस्तेमाल किया गया, जिससे यह पता लगाया गया था कि कोकीन अभी तक की सबसे ज्यादा एडिक्टिड ड्रग है. मतलब इसकी लत सबसे खतरनाक है. वैज्ञानिकों ने दावा किया कि कोकीन के मुकाबले दोगुनी तेजी से टेबल शुगर की लत लगती है. बता दें कि टेबल शुगर पानी में घुलने वाली शुक्रोज है, जिसे केमिकल तरीके से प्रोसेस्ड किया जाता है. The End of Overeating किताब में दावा किया गया है कि फूड इंडस्ट्री तकनीक की मदद से इन खाद्य पदार्थों को एडिक्टिव बना रही है. 

Techno Karbz का मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव
उल्लेखनीय है कि इस मुद्दे पर एक, दो नहीं बल्कि सैकड़ों स्टडी पेपर छप चुके हैं. इन स्टडीज में दावा किया गया है कि इन प्रोसेस्ड फूड में Techno Karbz पाए जाते हैं, जो हमारे मस्तिष्क (Brain) पर वैसा ही मिलता-जुलता असर डालते हैं, जो कोकीन, हीरोइन जैसी खतरनाक ड्रग्स डालती हैं. बता दें कि किताब की लेखिका जूलिया रॉस ने किताब में टेक्नो कार्ब्ज नामक टर्म का जिक्र किया है. इसका मतलब है कि वो कार्बोहाइड्रेट, जिन्हें रासायनिक तौर पर बदलाव किया गया है. इनमें अधिकतर शुगर ही होते हैं. इनमें हाई फ्रक्टोज कोर्न सीरप, प्रोसेस्ड गेहूं, जिनसे ब्रेड, बिस्किट, केक और अन्य जंक फूड बनाया जाता है, टेक्नो कार्ब्ज की श्रेणी में आते हैं. दरअसल इन टेक्नो कार्ब्ज में रासायनिक बदलाव कर इन्हें ज्यादा स्वादिष्ट बनाने की कोशिश की जाती है. यही वजह है कि इनके सेवन से हमारे मस्तिष्क का मध्य भाग सक्रिय हो जाता है और हम धीरे-धीरे इन फूड्स की लत के शिकार हो जाते हैं. 

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हमारे खाने का 60 फीसदी हिस्सा ये Techno Karbz
आज जब जंक फूड की डिमांड इतनी ज्यादा बढ़ती जा रही है तो यही वजह है कि ये टेक्नो कार्ब्ज हमारी थाली का भोजन समाप्त करते जा रहे हैं. दरअसल Cereal, जूस, आइसक्रीम, बिस्किट और चिप्स, बर्गर के बन, चिकन के घोल, पिज्जा के रूप में ये टेक्नो कार्ब्ज हमारे शरीर में जा रहे हैं. हम जंक फूड में सब्जियां वगैरह हेल्दी चीज भी खाते हैं लेकिन चूंकि ये सब्जियां आर्टिफिशियल शुगर या घोल के रूप में मौजूद टेक्नो कार्ब्ज के साथ मिलकर हमारे खाने के टेबल पर आती हैं तो वह फिर हमारे लिए हेल्दी नहीं रह जातीं. यही वजह है कि अब धीरे धीरे हमारी प्लेट से असली भोजन कम होता जा रहा है. दावा किया जा रहा है कि हमारी डाइट में से 60 फीसदी खाना अब आर्टिफिशियल शुगर, स्टार्च या कहें कि टेक्नो कार्ब्ज के रूप में हमारे सामने आता है. जो हमारे लिए बिल्कुल भी हेल्दी नहीं है.  

रिफाइंड शुगर और स्टार्च दुनिया की सबसे खतरनाक ड्रग
किताब में दावा किया गया है कि शुगर और स्टार्च दुनिया की सबसे ज्यादा बिकने वाली और सबसे खतरनाक ड्रग हैं. ऐसे में इन के पैकेटों पर चेतावनी जारी की जानी चाहिए. लेकिन इसके बजाय इन टेक्नो कार्ब्ज की पैकिंग को सुंदर और आकर्षक बनाया जाता है. इनके विज्ञापनों पर करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं. टेक्नो कार्ब्ज एक तरह से खाने के पैकेट में मौजूद ड्रग है, जो कि हीरोइन और कोकीन जितनी ही खतरनाक हैं. कई अध्ययनों में पता चला है कि इन रिफाइंड शुगर और स्टार्च को खाने से हमारे दिमाग को उतनी ही खुशी मिलती है, जितनी एक ड्रग एडिक्ट को ड्रग लेने पर मिलती है. 

अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन ड्रग एब्यूज (NIDA) के न्यूरोसाइंटिस्ट नोरा वोलकोव का कहना है कि  कई रिसर्च में यह खुलासा हुआ है कि टेक्नो कार्ब्ज उतने ही एडिक्टिव हैं, जितनी ड्रग्स. इनसे करोड़ों की संख्या में लोग प्रभावित होते हैं लेकिन अभी तक इनकी काट नहीं ढूंढी जा सकी है. 

बता दें कि The Craving Cure की लेखिका जूलिया रॉस ने The Mood Cure और The Diet Cure जैसी किताबें भी लिखी हैं.



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