Post-traumatic stress disorder के लक्षण, कारण और इलाज के बारे में जानें
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Post-traumatic stress disorder के लक्षण, कारण और इलाज के बारे में जानें | health – News in Hindi

पोस्ट-ट्रमटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर यानी पीटीएसडी मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी स्थिति है. इसका कारण जीवन में घटी कोई भयानक घटना, जिसकी वजह से अपने या किसी करीबी के जीवन पर खतरा हो होती है. जब भरसक कोशिशों के बावजूद व्यक्ति उस घटना को भूल नहीं पाता है और रह-रहकर वह घटना आंखों में तैरने लगती है तो यह मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती है. वह दुर्घटना बार-बार याद आकर व्यक्ति के दैनिक कार्यों पर असर डालने लगती है. पीटीएसडी का कोई भी संबंध उम्र से नहीं है, यानी यह किसी भी उम्र व लिंग के व्यक्ति के साथ हो सकती है. अत्यधिक दुखद या दिल दहला देने वाली किसी ऐसी घटना के बाद मस्तिष्क में रासायनिक व न्यूरोलॉजिक परिवर्तन के कारण पीटीएसडी की समस्या पैदा होती है.

पीटीएसडी में व्यक्ति सामान्य रूप से आम लोगों की तरह काम कर सकता है. इससे व्यक्ति में किसी भी तरह की कोई कमजोरी या कमी नहीं आती है. चलिए जानते हैं पीटीएसडी के लक्षण, कारण और इलाज…

पीटीएडी के लक्षणपीटीएसडी के लक्षण कुछ लोगों में दुर्घटना के तुरंत बाद, जबकि कुछ लोगों में सालों बाद भी नजर आते हैं. इन लक्षणों की वजह से सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों में भी समस्याएं आने लगती हैं. घटना की यादों को चाहकर भी न भूल पाना, नकारात्मक सोच या मनोदशा और शारीरिक व भावनात्मक प्रतिक्रियाओं में परिवर्तन इसके आम लक्षण हैं. पीटीएसडी के अन्य सामान्य लक्षण निम्न हैं –

  • उस भयावह घटना की बार-बार याद आना, व्यवहार में चिड़चिड़ापन, गुस्सा और आक्रामकता होना
  • सोने और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, दर्दनाक घटना को लेकर बुरे सपने आना
  • उस दुर्घटना के बारे में बात करने से बचने की कोशिश करना
  • दुर्घटना वाले स्थान या उन लोगों से मिलने से बचना, जिन्हें देखकर दुर्घटना की याद आती हो
  • करीबी लोगों से रिश्ते बनाए रखने में दिक्कत
  • परिवार और दोस्तों से अलग महसूस करना
  • जिन कामों में पहले मजा आता था, अब उनसे बचना

पीटीएडी के कारण

किसी प्राकृतिक आपदा, हमले, युद्ध, गंभीर दुर्घटना का दिमाग पर गहरा असर होने की वजह से पीटीएसडी हो सकता है. हालांकि, हर उस व्यक्ति में पीएसडी होना जरूरी नहीं है, जो ऐसी किसी दुर्घटना के चश्मदीद हों.

हमारे मस्तिष्क का वह हिस्सा जो यादों और भावनाओं के अनुभव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है उसे हिप्पोकैम्पस कहा जाता है. पीटीएसडी से ग्रसित व्यक्तियों का हिप्पोकैम्पस सामान्य से छोटा होता है. यह तथ्य साल 2008 में किए गए एक अध्ययन में सामने आए थे. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ऐसे लोगों हिप्पोकैम्पस का आकार पहले से ही छोटा होता है या फिर दुर्घटना के बाद ऐसा हुआ है. इस विषय में अभी और भी शोध की जरूरत है. विशेषज्ञों ने अपनी स्टडी में पाया कि पीटीएसडी से ग्रसित लोगों में तनाव पैदा करने वाले हार्मोन का स्तर असामान्य होता है.

विशेषज्ञों ने अपने अध्ययनों में पाया है कि हार्ट अटैक के शिकार हर आठ में से एक व्यक्ति में पीटीएसडी के लक्षण विकसित हो सकते हैं. यह भी जरूरी नहीं कि जिनमें पीटीएसडी के लक्षण विकसित हुए हैं, वे किसी बड़ी दुर्घटना से गुजरे हों. कई बार दिमाग पर छोटी सी बीमारी या सर्जरी का भी बुरा असर पड़ सकता है.

पीटीएसडी का इलाज

इसके इलाज का मुख्य लक्ष्य व्यक्ति के भावनात्मक व शारीरिक लक्षणों को करना होता है, ताकि दैनिक कामकाज में सुधार किया जा सके. यही नहीं पीटीएसडी को ट्रिगर करने वाली घटनाओं को नियंत्रित करने की कोशिश भी की जाती है, मनोचिकित्सा और दवाएं भी इसमें फायदेमंद होती हैं.

कॉग्नेटिव बिहैवियर थेरेपी – इस थेरेपी के जरिए डॉक्टर यह समझने की कोशिश करते हैं कि किन बातों से रोगी में लक्षण गंभीर हो जाते हैं. व्यक्ति में उभर रही नकारात्मक सोच, बुरे सपनों, डर और यादों को दूर करने की कोशिश भी इस थेरेपी के माध्यम से होता है.

एक्सपोजर थेरेपी – इस थेरेपी के जरिए अतीत में हुई किसी दुर्घटना या बुरे सपने के बारे में जानने में आसानी होती है. इसके जरिए दुर्घटना के बारे में समझकर, लक्षणों की गंभीरता के आधार पर आगे के इलाज की रूप-रेखा तैयार की जाती है.

फेमिली थेरेपी – पीटीएसडी से ग्रसित व्यक्ति के जीवन में चल रही परेशानी की वजह से परिवार के अन्य लोग भी प्रभावित हो सकते हैं, ऐसे में फेमिली थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है.

पीटीएसडी के लिए दवाएं – पीटीएसडी के इलाज के लिए दवाओं का भी इस्तेमाल किया जाता है. इनसे लक्षणों को नियंत्रित किया जाता है. (अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, पोस्ट ट्रमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर के लक्षण, कारण और इलाज के बारे में विस्तार से पढ़ें।) (न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं। सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है। myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं।)



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