Online classes can affected the eyes of children corona period Know parents and doctors opinions nodrss
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Online classes can affected the eyes of children corona period Know parents and doctors opinions nodrss

नई दिल्ली. छात्रों के ऑनलाइन क्लासेज (Online Classes) को लेकर सोशल साइट्स (Social Sites) पर कई तरह की खबरें वायरल (Viral) हो रही हैं. कुछ डॉक्टर्स (Doctors) का मानना है कि ऑनलाइन क्लास के कारण छोटे बच्चों की आंखों (Eyes) पर बुरा प्रभाव पड़ता है. वहीं, कुछ डॉक्टरों का मानना है कि ऑनलाइन क्लासेज से बच्चों (Children) की आंखों पर कोई दुष्पप्रभाव नहीं पड़ता है. बता दें कि पिछले दो सालों से भी ज्यादा समय से बच्चों का ज्यादातर समय स्मार्टफोन, लैपटॉप, टैबलेट या कंप्यूटर के आगे ही बीता है. इस दौरान बच्चों ने ऑनलाइन क्लास के लिए मोबाइल का खूब इस्तेमाल किया, इससे बच्चों का स्क्रीन टाइम पहले की तुलना में काफी बढ़ गया.

कुछ पैरेंट्स सोशल साइट्स पर लिख रहे हैं कि दो साल से ऑनलाइन क्लास करने से मेरे बेटे की आंख खराब हो गई है. इससे अब मेरे बेटे को चश्मा लगाने की नौबत आ गई है. इन लोगों का कहना है कि कोरोना से पहले उनका बेटा क्लासरुम में पीछे बैठ कर भी ब्लैकबोर्ड पर लिखे अक्षर को आसानी से पढ़ लेता था. लेकिन, अब उसे ब्लैकबोर्ड पर लिखे अक्षर पढ़ने और देखने में दिक्कत होती है.

ऑनलाइन क्लास में लगातार मोबाइल पर बने रहने के कारण आंखों में ड्राइनेस की समस्या शुरू हो जाती है. (सांकेतिक तस्वीर)

ऑनलाइन क्लासेज के साइड इफेक्ट्स
रोहिणी के सेक्टर- 25 में रहने वाले पैरेंट्स न्यूज- 18 से बातचीत में कहते हैं, ‘मेरा भतीजा केंद्रीय विद्यालय में पढ़ता है. वह 11वीं कक्षा का छात्र है. कोरोना काल में वह लगातार ऑनलाइन क्लास कर रहा था. स्कूल खुलने के बाद उसने कम दिखाई देने की शिकायत की. उसका कहना था कि क्लास में पीछे बैठने पर ब्लैकबोर्ड पर लिखा अक्षर धुंधला दिखाई देता है. साथ ही वह सिरदर्द की भी शिकायत कर रहा था. डॉक्टर के पास ले जाने के बाद पता चला कि उसके आंख का पावर बढ़ गया है. डॉक्टर ने उसको चश्मा लगाने की सलाह दी है.’

मोबाइल से क्या आंखों में ड्राइनेस की समस्या आती है?
डॉक्टरों का मानना है कि ऑनलाइन क्लास में लगातार मोबाइल पर बने रहने के कारण आंखों में ड्राइनेस की समस्या शुरू हो जाती है. इसी से बच्चों में सिरदर्द और चक्कर आने की समस्या भी शुरू हो जाती है. ज्यादातर बच्चों में मोबाइल औऱ टैबलेट की वजह से आंखों में दिक्कत आ रही है. लेकिन, यह दिक्कत ऑनलाइन क्लासेज की वजह से ही हो रही है यह कहना मुश्किल है.

क्या कहते हैं विशेषज्ञ
दिल्ली के बड़े अस्पतालों में से एक सर गंगाराम अस्पताल के वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. एस एन झा न्यूज-18 हिंदी से बातचीत में कहते हैं, ‘कोरोना के प्रभाव के कारण लंबे समय से स्कूल और कॉलेज बंद थे. स्कूल खुलने के बाद से बच्चे सिर दर्द, चक्कर और आंखों की रोशनी की समस्या लेकर तो आ रहे हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं है कि ऑनलाइन क्लासेज की वजह से ही यह समस्या आई हो. देखिए, बहुत सारे पैरेंट्स को लगता है कि पहले मेरा बच्चा ठीक था और अब मोबाइल या टीवी देखने से कुछ गड़बड़ हो गई है. मैं ऐसे पैरेंट्स को कहना चाहता हूं कि मयोपिया यानी माइनस नंबर वाले जो बच्चे होते हैं, उनको उम्र के साथ ही नंबर भी बढ़ते जाते हैं. खासकर ट्रांजेशन एज में जैसे 9वीं, 10वीं या 11वीं में जब बच्चे की हाइट बढ़ती है तो नंबर भी एकाएक बढ़ जाते हैं. यह मोबाइल या कंप्यूटर के इस्तेमाल करने से नहीं होता है.’

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बच्चों के द्वारा अत्यधिक समय घरों के अंदर बिताने से मायोपिया जैसी दृष्टि संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं?

डॉ. झा आगे कहते हैं, ‘बच्चों में यह उम्र ही ऐसी होती है. अगर बच्चा दो साल तक घर में सोया भी रहता और मोबाइल नहीं भी देखता तो भी उसका नंबर बढ़ता ही. हां, मोबाइल या टीवी लगातार देखने से बच्चों की आंखों में ड्राइनेस जरूर आ जाती है. इसलिए, अगर आप मोबाइल या टीवी देखते हैं तो आपको पलक झपकते रहना चाहिए. अगर आप कम पलक झपकते हैं तो उससे ड्राइनेस आएगी ही. मोबाइल के कारण ड्राइनेस की समस्या जरूर आ रही है, लेकिन मोबाइल देखने से किसी बच्चे का नंबर नहीं बढ़ता. लड़कों में 21 साल तक और लड़कियों में 19 साल तक माइनस का नंबर बढ़ता है. इसको कोई रोक नहीं सकता है. हां, 21 साल के बाद नंबर स्थिर हो जाते हैं.’

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हालांकि, दो साल पहले ही डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में चेतावनी जारी की गई थी कि बच्चों के द्वारा अत्यधिक समय घरों के अंदर बिताने से मायोपिया जैसी दृष्टि संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, स्मार्टफोन के कारण आंखों की रोशनी पर ज्यादा प्रभाव पड़ सकता है, जिससे आंखों की रोशनी कम हो सकती है. इसलिए ऑनलाइन क्लास के लिए स्मार्टफोन का इस्तेमाल सही नहीं है.

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