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National Doctor’s Day 2020: गरीबों के लिए भगवान से कम नहीं हैं ये डॉक्टर्स, जानें क्या है कहानी | health – News in Hindi

हमारे समाज में डॉक्टर्स को भगवान का दर्जा दिया गया है. गंभीर परिस्थियों में डॉक्टर्स लोगों की जान बचाकर उनके भगवान बन जाते हैं.

गंभीर परिस्थियों में डॉक्टर्स (Doctors) लोगों की जान बचाकर उनके भगवान (God) बन जाते हैं. कुछ ऐसे ही डॉक्टर्स हमारे आसपास मौजूद हैं जो न सिर्फ लोगों का मुफ्त (Free) में इलाज करते हैं बल्कि उनकी जान बचाने के लिए सेवा करने पर उतर जाते हैं.

हर साल 1 जुलाई को भारत में डॉक्टर्स डे (Doctor’s Day) मनाया जाता .भारत के मशहूर चिकित्सक डॉ. बिधान चन्द्र रॉय (Dr. Bidhan Chandra Roy) को श्रद्धांजलि देने के लिए डॉक्टर्स डे मनाया जाता है. हमारे समाज में डॉक्टर्स को भगवान (God) का दर्जा दिया गया है. गंभीर परिस्थियों में डॉक्टर्स लोगों की जान बचाकर उनके भगवान बन जाते हैं. कुछ ऐसे ही डॉक्टर्स हमारे आसपास मौजूद हैं जो न सिर्फ लोगों का मुफ्त (Free) में इलाज करते हैं बल्कि उनकी जान बचाने के लिए सेवा करने पर उतर जाते हैं. ऐसे डॉक्टर्स समाज में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने के साथ साथ लगातार परिवर्तन लाने की कोशिश भी कर रहे हैं. डॉक्टर्स डे के मौके पर आइए आपको बताते हैं भारत के कुछ ऐसे डॉक्टर्स के बारे में जो धरती पर गरीबों के लिए हैं भगवान हैं.

डॉ. योगी ऐरन
डॉ. योगी ऐरन उत्तराखंड के देहरादून में रहते हैं. उनकी उम्र करीब 80 वर्ष है. उन्होंने अपना पूरा जीवन ऐसे लोगों को समर्पित कर दिया, जो जंगली जानवर के शिकार बनें या फिर किसी कारणवश आग से झुलस गए. इन परिस्थितियों से जूझ रहे लोगों को डॉ. योगी बचाने की कोशिश करते हैं. हर साल करीब 500 से अधिक लोगों की यह मुफ्त में सर्जरी करते हैं. इस अभियान में उनके साथ एक असिस्टेंट भी है, जो करीब 25 सालों से उनका साथ निभा रहा है. इतना ही नहीं डॉ. ऐरन का बेटा भी उनकी मदद करता है.
डॉ. योगी क्लीनिक चलाने के साथ-साथ गांव-गांव जाकर 15-15 दिनों का कैंप भी लगाते हैं. इस कैंप में वह करीब 15 डॉक्टर्स की टीम को शामिल करते हैं. इस टीम में विदेशों के डॉक्टर्स को भी शामिल किया जाता है, जो फ्री में मरीजों का इलाज करते हैं. इस कैंप के लिए ऐसे गांवों का चुनाव किया जाता है जहां पर किसी तरह की कोई सुविधा नहीं है. उनके सेवाभाव को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2020 में उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा है.इसे भी पढ़ेंः National Doctor’s Day 2020: 1 जुलाई को क्यों मनाया जाता है नेशनल डॉक्टर्स डे, जानें इसके पीछे की कहानी

डॉ. मनोज कुमार
डॉ. मनोज कुमार ने करीब 15 सालों तक ब्रिटेन में मनोचिकित्सक के रूप में काम किया है. इसके बाद वह केरल लौटे और ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे मानसिक रोगियों का मुफ्त में इलाज करना शुरू किया. केरल के रहने वाले डॉ. मनोज कुमार का कहना है कि सरकार मानसिक रोगियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पाती है. इसलिए वह खुद अपने राज्य के लोगों की मदद कर रहे हैं. उन्होंने 2008 में केरल के कोझिकोड में मेंटल हेल्थ एक्शन ट्रस्ट की स्थापना की थी. इस पहल में उनके साथ कई लोगों ने अपना हाथ आगे बढ़ाया था. वर्तमान में इस ट्रस्ट के साथ करीब 1 हजार लोग जुड़े हुए हैं. इनमे रिटायर्ड प्रोफेशनल, होममेकर और ऐसे कई लोग शामिल हैं जो दूसरों की मदद करना चाहते हैं. केरल के मलप्पुरम, कोझिकोड, वायनाड, अलेप्पी, त्रिशूर समेत केरल में इस ट्रस्ट के 25 सेंटर्स हैं. इसके हर केंद्र की स्थापना गांव में ही की गई है.

डॉ. मनोज दुरईराज
कार्डियक सर्जन डॉ. मनोज दुरईराज पुणे में एक क्लीनिक चलाते हैं. क्लीनिक के साथ-साथ डॉ. मनोज दुरईराज मेरियन कार्डियक सेंटर और रिसर्च फाउंडेशन भी चला रहे हैं. इस फाउंडेशन की शुरुआत उनके पिता डॉ. मैनुअल दुरईराज ने की थी. डॉ. मनोज के पिता भी कार्डियोलॉजिस्ट थे. उनके पिता ने 2 दशक तक भारतीय आर्मी और तीन पूर्व राष्ट्रपतियों की देखभाल की थी. इसके बाद डॉ. मनोज दुरईराज भी 1991 में इस फाउंडेशन से जुड़े और 2005 में उन्होंने दिल्ली के एम्स से अपनी पढ़ाई पूरी की और पिता के इस विरासत को आगे बढ़ाया. इस फाउंडेशन के तहत डॉ. मनोज अब तक 350 से ज्यादा लोगों की फ्री में हार्ट सर्जरी कर चुके हैं. इसमें अधिकतर छोटे बच्चे शामिल हैं, जिन्हें जन्मजात दिल की बीमारी थी. मनोज ऐसे लोगों की मदद करते हैं, जिनके पास इलाज के लिए पैसा नहीं होता है. ये लोग काफी दूरदराज से आते हैं. यह फाउंडेशन सिर्फ फ्री में सर्जरी ही नहीं, बल्कि ऑपरेशन के बाद फ्री में दवाइयां और देखरेख भी उपलब्ध कराता है.



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