Lack of trust in others can lead to loneliness research nav
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Reasons Of Loneliness : इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हम कहने को काफी बिजी रहते हैं, लेकिन कहीं ना कहीं हमारे अंदर के अकेलापन होता है. जिसे हम शायद देख नहीं पाते हैं. हां लेकिन उसका अहसास हमें काफी देर में होता है. दैनिक जागरण में छपी रिपोर्ट के मुताबिक अकेलापन (Loneliness) ऐसी मानसिक अवस्था है, जिसमें व्यक्ति को अनुभव होता है कि कोई उसके साथ नहीं है. उसे रिश्तों से जितने अपनत्व (Affinity)की उम्मीद होती है, वह पूरी नहीं होती है. जैसे भूख लगने पर व्यक्ति खाना चाहता है, उसी तरह अकेलेपन का शिकार व्यक्ति ज्यादा से ज्यादा लोगों के जुड़ाव चाहता है. इसके बावजूद कुछ लोगों को हर समय अकेलापन लगता है. ज्यादा समय तक यह स्थिति बनी रहने से व्यक्ति अवसाद (Depression) और तनाव (Stress) जैसी कई तरह की मानसिक बीमारियों का शिकार हो सकता है.

जर्मनी और इजरायल के रिसर्चर्स ने अकेलेपन के कारण को जानने की दिशा में अहम निष्कर्ष दिया है. उनका कहना है कि दूसरों पर भरोसा नहीं कर पाने वाले अकेलेपन का ज्यादा शिकार होते हैं. आपको बताते हैं कि कैसे हुई ये रिसर्च और किन किन लोगों को इसमें शामिल किया गया.

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दो ग्रुप्स के लोगों पर हुई स्टडी
इस स्टडी के लिए लोगों को दो ग्रुप्स में बांटा गया. एक ग्रुप में 42 ऐसे लोगों को शामिल किया गया, जो गंभीर अकेलेपन का शिकार थे, लेकिन उन्हें कोई मानसिक बीमारी नहीं थी. वहीं दूसरे ग्रुप में 40 सामान्य लोगों को रखा गया. अलग-अलग सवालों और सिचुएशन के जरिए से टेस्ट के दौरान पाया गया कि अकेलेपन के शिकार लोग अपनी चीजों को किसी से साझा करने में डरते हैं. उन्हें ये भरोसा नहीं हो पाता है कि सामने वाला उनकी उम्मीदों पर खरा उतरेगा.

कम एक्टिव रहता है ब्रेन का एक हिस्सा
रिसर्च करने वालों के अनुसार, हमारे दिमाग का इंसुलर कोर्टेक्स (Insular Cortex) हिस्सा किसी पर भरोसा करने में अहम भूमिका निभाता है. यही हिस्सा सामने वाले के चेहरे के भाव पढ़ने और उसके मूड को भांपने में भी मदद करता है. इन्हीं के आधार कोई व्यक्ति दूसरे पर भरोसा करता है. अकेलेपन के शिकार लोगों में दिमाग का यह हिस्सा कम एक्टिव पाया गया. इस कारण से उन्हें लोगों पर भरोसा करने में मुश्किल आती है.

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ऑक्सीटोसिन का लेवल भी कम
इस स्टडी के दौरान प्रतिभागियों में आक्सीटोसिन हार्मोन (oxytocin hormone) का लेवल भी मापा गया. आपको बता दें कि ये हार्मोन दो लोगों के बीच के संबंधों को भावनात्मक मजबूती देता है. लेकिन अकेलेपन के शिकार लोगों में इस हार्मोन का लेवल भी कम पाया गया. अक्सर देखा गया है कि ऐसे लोग किसी से मिलते समय अन्य लोगों की तुलना में ज्यादा दूरी बनाकर रखने की कोशिश करते हैं.

मानसिक बीमारियों से बचाने में भी कारगर
रिसर्च करने वालों का कहना है कि ये स्टडी अकेलेपन की समस्या को नई दृष्टि से देखने का अवसर देती है. इससे मिले नतीजे अकेलेपन के इलाज का नया रास्ता खोजने में मददगार होंगे. यह आगे चलकर कई तरह की मानसिक बीमारियों से बचाने में भी कारगर होगा.

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