International Women's Day 2022: क्या सिंगल वूमेन आईवीएफ ट्रीटमेंट की मदद ले सकती हैं? क्या है प्रॉसेस, सफल होने की संभावनाएं
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International Women’s Day 2022: क्या सिंगल वूमेन आईवीएफ ट्रीटमेंट की मदद ले सकती हैं? क्या है प्रॉसेस, सफल होने की संभावनाएं

Single Women and IVF Treatment: आज की महिलाएं तेजी से अपनी प्रजनन प्रणाली (Reproductive system) पर नियंत्रण कर रही हैं और बिना साथी के एकल मां (Single parent) बनने का फैसला भी ले रही हैं. आज तलाकशुदा महिलाएं हों या किसी शारीरिक समस्या के कारण मां नहीं बन पाने वाली महिला हो, सभी अपने मां बनने की ख्वाहिश को अकेले ही पूरा कर रही हैं. अपने दम पर बच्चे को पालने का विकल्प चुनती हैं. इसके लिए वे सोशल एग फ्रीजिंग या इन विट्रो फर्टिलिटी (IVF) उपचार का विकल्प चुन रही हैं। ‘अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2022’ (International Women’s Day 2022) पर जानते हैं, एक सिंगल वूमेन किन-किन मेडिकल तकनीक के जरिए मां बन सकती हैं. क्या सिंगल मांएं आईवीएफ ट्रीटमेंट के विकल्प को अपना सकती हैं.

मां बनने के लिए आईवीएफ ट्रीटमेंट की प्रक्रिया

शारदा हॉस्पिटल की गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. स्वाति राय कहती हैं कि आईवीएफ ट्रीटमेंट (In vitro fertilisation) एक प्रकार का असिस्टिव रिप्रोडक्विव टेक्‍नोलॉजी है. इसमें महिला की ओवरी से एग निकाल कर उसे लैब में स्‍पर्म के साथ फर्टिलाइज किया जाता है. इस फर्टिलाइज एग को एम्ब्रियो (Embryo) कहा जाता है. इस एग के मैच्‍योर होने के बाद, इसे महिला के गर्भाशय (Uterus) में डाल दिया जाता है. प्रेग्नेंसी के लिए गर्मी का मौसम बहुत फायदेमंद होता है. प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए विटामिन डी दवा की तरह काम करता है, इसलिए गर्मी में आईवीएफ के सफल होने की संभावना दोगुनी हो जाती है. मेलाटोनिन हार्मोन महिलाओं की फर्टिलिटी को बढ़ाता है. ये हार्मोन गर्मी के मौसम में महिलाओं की फर्टिलिटी को बढ़ाता है. एआरटी रेगुलेशन और सेरोगेसी बिल 2022 के पास होने से पहले सिंगल पिता एडॉप्शन और एगडोनेट कर सकते थे. सेरोगेसी के साथ यह प्रॉसेस आईवीएफ की मदद से किया जाता था, जिसमें स्पर्म को अंडों के साथ फर्टीलाइज करके बच्चा किया जाता था.

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कई इंडियन सेलिब्रिटीज भी बन चुके हैं सिंगल पेरेंट

आज जरूरी नहीं की शादीशुदा होकर ही मां-बाप बनने का सपना साकार किया जाए. पेरेंट बनने के लिए कई सेलिब्रिटीज जैसे एकता कपूर, प्रियंका चोपड़ा, शिल्पा शेट्टी ने जहां सेरोगेसी को चुना, तो वहीं सुष्मिता सेन, साक्षी तंवर ने बच्चे को गोद लिया. मेडिकल जगत इतना विकसित हो चुका है कि इसके जरिए अब आप आसानी से पेरेंट भी बन सकते हैं. आप पार्टनर से अलग हो चुके हैं, आपका तलाक हो गया है, दोबारा शादी नहीं करना चाहते, किसी शारीरिक समस्या, इंफर्टिलिटी के कारण माता-पिता नहीं बन पा रहे हैं, तो आपके सामने आईवीएफ, सेरोगेसी, आईयूआई आदि के जरिए पेरेंट्स बनने के विकल्प मौजूद हैं. आईवीएफ ट्रीटमेंट के जरिए कई लोग माता-पिता बनने का सुख प्राप्त कर रहे हैं.

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सिंगल मदर के लिए मां बनने के विकल्प

मदर्स लैप आईवीएफ सेंटर (पीतमपुरा, नई दिल्ली) की मेडिकल डायरेक्टर एंड आईवीएफ एक्सपर्ट डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं कि आईवीएफ के जरिए आजकल अधिकतर महिलाएं बच्चे को जन्म देने का विकल्प चुन रही हैं. आईवीएफ सफल होने की संभावना महिला की उम्र और कई अन्य फैक्टर्स पर निर्भर करता है. आजकल कई सिंगल मदर्स हमारे पास आती हैं, जो आईवीएफ, आईयूआई (Intrauterine insemination) ऑप्ट करना चाहती हैं. ये दोनों ही कंसीव करने के प्रोसीजर हैं. आजकल कानून आने के कारण सिंगल मदर्स का आईवीएफ की तरफ झुकाव बहुत अधिक बढ़ गया है. इसके सफल होने की संभावना काफी अधिक है. कानून के अनुसार, सेरोगेसी का विकल्प भी एक सिंगल मदर्स चुन सकती है. इसके लिए महिला की उम्र 35 से 50 वर्ष हो, वे तलाकशुदा हो या विधवा हो. आईवीएफ और आईयूआई के साथ ऐसा नहीं है, इसे अविवाहित महिलाएं भी ऑप्ट कर सकती हैं. साथ ही बच्चा गोद लेकर भी आप मां बनने का सुख प्राप्त कर सकती हैं.

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