International Day of Older Persons 2020: बुजुर्गों को जरूर कराने चाहिए ये टेस्ट, रहेंगे हेल्दी
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International Day of Older Persons 2020: बुजुर्गों को जरूर कराने चाहिए ये टेस्ट, रहेंगे हेल्दी | health – News in Hindi

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की मानें तो साल 2050 तक यानी अगले 30 सालों में दुनियाभर में 60 साल या इससे अधिक उम्र वाले लोगों की आबादी बढ़कर 2 बिलियन (200 करोड़) हो जाएगी और इनमें 80 प्रतिशत आबादी मध्यम और कम आय वाले देशों में होगी. यूनाइटेड नेशन्स के आंकड़ों की मानें तो 2050 तक भारत में भी बुजुर्गों की आबादी में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिलेगी.

कोविड-19 महामारी ने दुनियाभर में 60 साल और इससे अधिक उम्र के बुजुर्गों के जीवन और सेहत को खतरे में डाल दिया है. कोविड-19 संक्रमण के कारण होने वाली मृत्यु दर में भी बुजुर्गों की ही संख्या सबसे ज्यादा है, इसलिए बुजुर्गों को हाई रिस्क ग्रुप में रखा गया है और जब तक बहुत जरूरी न हो उन्हें घर से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है. ऐसे समय में बुजुर्गों की सेहत का ध्यान रखना और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है. 1 अक्टूबर को दुनियाभर में अन्तरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस मनाया जाता है. इस मौके पर हम आपको बता रहे हैं कि 60 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए कौन से मेडिकल टेस्ट नियमित रूप से करवाना जरूरी है, यहां जानें :

1. ब्लड प्रेशर चेक : हर 3 में से 1 बुजुर्ग में हाइपरटेंशन की समस्या होती है. अमेरिका के सीडीसी के मुताबिक, 65 से 74 साल के बीच के 64 प्रतिशत पुरुषों और 69 प्रतिशत महिलाओं में हाई ब्लड प्रेशर की दिक्कत होती है. उच्च रक्तचाप को अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है क्योंकि यह कोई लक्षण दिखाए बिना ही स्ट्रोक या दिल के दौरे के जोखिम को बढ़ा देता है. लिहाजा नियमित रूप से अपने ब्लड प्रेशर की जांच करवाना आवश्यक है.2. लिपिड (वसा) की जांच के लिए ब्लड टेस्ट : शरीर में हेल्दी या गुड कोलेस्ट्रॉल और ट्राईग्लिसराइड्स का स्तर दिल के दौरे या स्ट्रोक के जोखिम को कम करता है. लिहाजा साल में एक बार ब्लड टेस्ट भी जरूर करवाना चाहिए ताकि खून में कोलेस्ट्रॉल के लेवल का पता लगाया जा सके.

3. कोलोरेक्टल कैंसर टेस्ट : 50 वर्ष की आयु के बाद, आपको हर 10 वर्षों में एक बार कोलोनोस्कोपी जरूर करवानी चाहिए. लेकिन अगर आपके परिवार में कोलोरेक्टल कैंसर का इतिहास रहा हो तब तो आपको और अधिक बार कोलोनोस्कोपी टेस्ट करवाना चाहिए. गुदा मार्ग में कैंसर पॉलिप्स की मौजूदगी की जांच के लिए डिजिटल रेक्टल टेस्ट भी किया जाता है. अगर यह कैंसर जल्द डायग्नोज हो जाए तो इसका इलाज आसानी से हो सकता है. हालांकि, कोलोरेक्टल कैंसर के कई मामले तब तक पकड़ में नहीं आते जब तक वे एडवांस स्टेज में नहीं पहुंच जाते.

4. आंखों की जांच (आई टेस्ट): अमेरिकन एकैडमी ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी का सुझाव है कि सभी लोगों को 40 साल की उम्र में आंखों की आधारभूत स्क्रीनिंग जरूर करवानी चाहिए. इसके अलावा अगर आप नजर का चश्मा पहनते हैं या कॉन्टैक्ट लेंस लगाते हैं तो आपको हर साल अपना विजन टेस्ट करवाना चाहिए और अगर आप चश्मा नहीं पहनते हैं तो हर 2 साल में एक बार टेस्ट करवाना जरूरी है. बढ़ती उम्र के कारण आंखों में ग्लूकोमा या मोतियाबिंद जैसी बीमारियां होने का खतरा भी बढ़ जाता है.

5. कान की जांच (श्रवण टेस्ट): बढ़ती उम्र की एक और कॉमन समस्या है सुनने से जुड़ी तकलीफ या सुनाई कम देना. कभी-कभी यह समस्या किसी संक्रमण या अन्य चिकित्सीय स्थिति के कारण हो सकती है. लिहाजा 2 से 3 साल में एक बार बुजुर्गों को अपना ऑडियोग्राम टेस्ट जरूर करवाना चाहिए. ऑडियोग्राम विभिन्न प्रकार की पिच और आवाज की तीव्रता के स्तर पर व्यक्ति के सुनने की क्षमता की जांच करता है.

6. डायबिटीज टेस्ट : स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी 2019 के नेशनल डायबिटीज एंड डायबिटीक रेटिनोपैथी सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, 50 वर्ष से अधिक आयु के 11.8% लोगों में डायबिटीज की मौजूदगी पायी गई. डायबिटीज बीमारी की व्यापकता पुरुषों में 12% और महिलाओं में 11.7% थी यानी दोनों आबादी में एक समान. लिहाजा 45 साल से अधिक उम्र के लोगों को हर साल डायबिटीज की स्क्रीनिंग करवानी चाहिए. डायबिटीज के लिए फास्टिंग ब्लड शुगर टेस्ट या ए1सी ब्लड टेस्ट किया जाता है. अगर परिवार में डायबिटीज का इतिहास रहा हो तब तो हर 3-4 महीने में एक बार ब्लड टेस्ट जरूर करवाना चाहिए.

7. मैमोग्राम टेस्ट : अमेरिकन कैंसर सोसायटी का कहना है कि 45 से 54 वर्ष की आयु के बीच की महिलाओं को नियमित रूप से क्लिनिकल ब्रेस्ट एग्जैमिनेशन और साल में एक बार मैमोग्राम टेस्ट भी जरूर करवाना चाहिए. 55 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को हर 2 साल में एक बार या हर साल मैमोग्राम टेस्ट करवाना चाहिए. परिवार में किसी सदस्य को ब्रेस्ट कैंसर होने के कारण आपको इसका खतरा अधिक है डॉक्टर आपको सालाना ब्रेस्ट जांच का सुझाव दे सकते हैं.

8. प्रॉस्टेट कैंसर टेस्ट : प्रॉस्टेट कैंसर की स्क्रीनिंग किस उम्र में और कितनी बार करवानी चाहिए इस बारे में कोई निश्चित तथ्य मौजूद नहीं है. अमेरिकन कैंसर सोसायटी का सुझाव है कि डॉक्टर 50 साल की उम्र के लोगों के साथ स्क्रीनिंग पर चर्चा कर सकते हैं, जिन्हें प्रॉस्टेट कैंसर का औसत जोखिम हो. प्रोस्टेट कैंसर का पता लगाने के लिए या तो डिजिटल रेक्टल परीक्षण किया जाता है या व्यक्ति के खून में प्रॉस्टेट-विशिष्ट एंटीजन (पीएसए) के स्तर को मापा जाता है.

9. बोन डेंसिटी टेस्ट : बुजुर्गों में ऑस्टियोपोरोसिस बेहद कॉमन बीमारी है और अगर किसी बुजुर्ग को यह समस्या है और उनकी हड्डी फ्रैक्चर हो जाए खासकर कुल्हे या हिप की तो उस व्यक्ति के स्थायी रूप से विकलांग होने या मौत का भी खतरा काफी बढ़ जाता है. लिहाजा उम्र बढ़ने के साथ अपनी स्थिति को लेकर गंभीर हो जाएं और अपने डॉक्टर से पूछें कि आपको कब बोन डेंसिटी टेस्ट करवाने की जरूरत है. महिलाओं को 65 साल की उम्र में बोन डेंसिटी टेस्ट करवाना चाहिए. (अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, बढ़ती उम्र के साथ ये समस्याएं कर सकती हैं परेशान पढ़ें।) (न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं। सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है। myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं।)



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