How important is it to spend time alone to be stress free nav
स्वास्थ्य

How important is it to spend time alone to be stress free nav

Spend Time Alone To Be Stress Free : आज के दौर में तनावमुक्त रहने के लिए लोग क्या-क्या नहीं करते, मेडिटेशन, योग, हेल्दी डाइट, आयुर्वेदिक उपचार, संगीत सुनना यहां तक की रिलेक्स होने के लिए एंग्जाइटी की दवा तक खाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं तनावमुक्त रहने के लिए अकेले में समय बिताना भी एक उपचार हो सकता है? दैनिक भास्कर में छपी रिपोर्ट के मुताबिक कुछ किताबों के जरिए आप जान सकते हैं कि आपके खुद के विचार कितने असरदार हैं. इसके अलावा इनमें (किताबों में) दूसरों को सुनने का महत्व भी बताया गया है.

रिपोर्ट में चार किताबों का जिक्र है. जिनमें थिंकिंग फास्ट एंड स्लो, पावर ऑफ सबकॉन्शियस माइंड, द वे यू से इट और जस्ट लिसन शामिल हैं. हम आपको बताते हैं कि किस किताब में कैसे तनावमुक्त रहने के तरीके बताए गए हैं.

अकेले समय बिताना जरूरी
डेनियल कन्नमन (Daniel Kahneman) की किताब ‘थिंकिंग फास्ट एंड स्लो’ (Thinking Fast and Slow) के अनुसार, अकेले में समय बिताने वाले लोग शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक तनाव से काफी हद तक दूर रहते हैं. दरअसल लगातार लोगों से घिरे रहने के कारण एकाग्रता और निर्णय लेने पर उल्टा असर पड़ता है, इसी वजह से कई बार जल्दी गुस्सा भी आ जाता है.

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विचारों का शरीर पर असर
जोसेफ मर्फी (Joseph Murphy ) की किताब पावर ऑफ द सबकॉन्शियस माइंड (Power of Subconscious Mind) के अनुसार, शरीर दिमाग की ही सुनता है, इसलिए उसमें आने वाले विचार और भावनाओं का ही असर शरीर पर पड़ता है. दिमाग से गंदे विचार आते ही शरीर तेजी से बीमारी की तरफ बढ़ने लगता है वहीं खूबसूरत और संतोष देने वाले विचार आने पर शरीर भी खूबसूरत और जवां दिखने लगता है.

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काम बोलता है, जुबान नहीं
कारोल ए फ्लेमिंग (Carol A Fleming ) की किताब ‘इट्स द वे यू से इट’ (The Way You Say It)के मुताबिक, आमतौर पर देखा गया है कि छोटी मोटी बहस में मिलने वाली जीत से हम बहुत खुश हो जाते हैं. लेकिन बहुत क्षणिक जीत खोखली होती है. इससे सामने वाले के विचारों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है. बल्कि उसके मन में आपके प्रति द्वेष और बुरी भावना पैदा होती है. इससे अच्छा है कि कुछ बोले बिना ही अपने कामों से लोगों को प्रभावित करें. बहस करना शोर करने के समान है, जबकि आपका काम ज्यादा प्रभावी और अर्थपूर्ण होता है.

बोलें कम, सुनें ज्यादा
मार्क गॉलस्टन (Mark Goulston) की किताब ‘जस्ट लिसन’ (Just Listen) के अनुसार, समझदार इंसान की पहचान है कि वो बोलता कम है और सुनता ज्यादा है. अगर बोलने की जरूरत पड़े भी तो समझदार व्यक्ति कम शब्दों में ही अपनी बात खत्म कर देता है. रिसर्च बताती है कि आम इंसान केवल 25 प्रतिशत इफ़िशन्सी के साथ सुनता है. यदि हम ध्यान दें तो हमारे दो कान हैं और एक मुंह है, मतलब हम बोलने से ज्यादा सुन भी सकते हैं.

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