Hitting Mung Culture now popular in South Korea neer
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Hitting Mung Culture now popular in South Korea neer

Hitting Mung Culture: हमारी जिंदगी में पैसा कितना अहम है ये सभी जानते हैं. पैसे के बिना जीवन गुजारने की कल्पना ही लोगों को डराने के लिए काफी है. जीवन में पैसा इतना अहम होने के बावजूद भी एक वक्त ऐसा आता है जब व्यक्ति अपनी जिंदगी में सिर्फ सुकून तलाशता नजर आता है. इस सूकून को पाने के लिए दिन-रात एक कर कमाई दौलत भई वह खुले हाथों से लुटाने को तैयार हो जाता है. दक्षिण कोरिया में भी लोग सुकून की तलाश में कुछ भी करने को तैयार नजर आ रहे हैं. यहां के लोगों में पैसा खर्च कर शांति खोजने की प्रवृत्ति काफी बढ़ने लगी है. एक सर्वे के मुताबिक दक्षिण कोरिया की 73 प्रतिशत आबादी खुद को तनावग्रस्त मान रही है.

ये है ‘हिटिंग मंग’
बता दें कि दक्षिण कोरिआई समाज को काफी प्रतिस्पर्धी माना जाता है. दैनिक भास्कर में जूलियन रयाल की छपी रिपोर्ट के मुताबिक लोग कोरोना के लंबे दौर और काम के दबाव की वजह से काफी तंग आ चुके हैं. इसी वजह से उनमें पैसा खर्च कर शांति की तलाश करने की प्रवृत्ति काफी बढ़ गई है. इस प्रवृत्ति को ही ‘हिटिंग मंग’ नाम दिया गया है. एक लॉ फर्म में काम करने वाली हान ये-जंग भी सुकून की तलाश में हैं. वे कहती हैं कि उनकी लाइफ में स्ट्रेस बढ़ता जा रहा है. उनके साथियों में भी ये ही भावना है.
अपने साथ हुए एक वाकये को साझा करते हुए हान कहती हैं कि मैं कुछ दिन पहले पैदल जा रही थी इस दौरान एक व्यक्ति से टकरा गई. पहले ऐसा होता तो दोनों एक दूसरे से माफी मांगकर आगे बढ़ जाते, लेकिन अब हर कोई गुस्से में रहता है. यह नजारा अब आम हो चुका है. लोग कैसे भी निराशा से बाहर निकलना चाहते हैं यही वजह है कि ‘हिटिंग मंग’ कल्चर काफी लोकप्रिय हो रहा है.

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‘जेल’ में भी है शांति की तलाश
तनाव, चिंता और बैचेनी से बाहर निकलने के लिए लोग परिवार के बिना सुकून वाली जगह की भी तलाश कर रहे हैं. इस दौरान वे नोटपैड और पेन के अलावा अपने पास कुछ भी नहीं रखते हैं. वे वादियों को या फिर समुद्र, नदी के किनारों पर बैठकर उन्हें घंटों निहार रहे हैं. इन सभी जगहों पर सख्त चुप्पी का नियम लागू है. गंगवोन प्रांत में हैप्पीटरी फाउंडेशन ने एक ‘जेल’ तैयार की है, इसमें नोटपैड और पैन के साथ लोग 48 घंटे तक रह सकते हैं.

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इस संस्था की प्रवक्ता वू सुंग-हुन बताती हैं कि यहां तनाव से घिरे लोग खुद का सामना करने के लिए आते हैं. वे खुद से जरूरी सवाल करते हैं और सच्ची खुशी पाते हैं. गौरतलब है कि औद्योगिक दुनिया में सुसाइड रेट के मामले में दक्षिण कोरिया शीर्ष पर है.

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