Health news chin plaster has been developed for snoring patient to detect sleep apnoea lak
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Health news chin plaster has been developed for snoring patient to detect sleep apnoea lak

नई दिल्ली. भारतीय संगीत में रैप को सबसे पहले मशहूर करने वाले म्यूजिक डाइरेक्टर बप्पी लहरी (Bappi Lahiri) का बुधवार को निधन हो गया. उन्हें ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया (obstructive sleep apnoea ) की बीमारी थी. स्लीप एपनिया घातक बीमारी है जिसमें मरीज को ज्यादा समय नहीं मिल पाता है और मरीज की सांसें तक रूक सकती है. आमतौर पर मोटापे से पीड़ित लोगों में स्लीप एपनिया का अटैक ज्यादा होता है लेकिन नींद के पैटर्न में गड़बड़ी इस बीमारी के जोखिम को और बढ़ा देता है. सर गंगाराम अस्पताल, नई दिल्ली में इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसीन के सीनियर कंसल्टेंट डॉ प्रकाश शास्त्री ने बताया कि यह बीमारी किसी को भी हो सकती है, इसलिए इसके प्रति सतर्कता ज्यादा जरूरी है. अगर किसी को ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के लक्षण हैं तो उसे तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टरों से संपर्क करना चाहिए. आइए जानते हैं इस अनावश्यक बीमारी से खुद को किस तरह बचाएं.

ऐसे सांस को प्रभावित करता है स्लीप एपनिया
डॉ प्रकाश शास्त्री बताते हैं कि स्लीप एपनिया में सोते समय कार्बन डायऑक्साइड की मात्रा खून में बढ़ जाती है. यह आमतौर पर नींद के दौरान खर्राटा लेते समय होता है. इस स्थिति में ड्रायफ्राम और छाती की मांसपेशियों को लंग्स से ऑक्सीजन खींचने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है और छाती से उपर वायुमार्ग अवरूद्ध होने लगता है. फिर कार्बन डायऑक्साइड की मात्रा बढ़ने लगती है. लेकिन जैसे ही नींद खुलती है कार्बन डायऑक्साइड बाहर निकलने लगती है और सांस फिर से नॉर्मल हो जाता है.

किन लोगों को है ज्यादा खतरा

डॉ प्रकाश शास्त्री ने बताया कि जिन लोगों में नींद का पैटर्न खराब रहता है उन्हें रात के वक्त पूरी नींद नहीं मिलती है. ऐसे लोगों को इस बीमारी का जोखिम ज्यादा रहता है. ऐसे लोग दिन के वक्त ज्यादा सोने की कोशिश में लगे रहते हैं. साथ ही इनके दिन में काम करने की क्षमता भी प्रभावित होती है. आमतौर पर ऐसे लोग मोटे होते हैं लेकिन मोटापा ही इसकी प्रमुख वजह नहीं है. खर्राटा इस बीमारी का सबसे प्रमुख लक्षण है. डॉ शास्त्री बताते हैं कि जिन लोगों के परिवार में स्लीप एपनिया का हिस्ट्री है, उन्हें भी इसका ज्यादा जोखिम रहता है.

क्या इसे रोका जा सकता है

जब बॉडी में कार्बन डायऑक्साइड बढ़ता है तब हार्ट के दाहिने तरफ प्रेशर पड़ता है. इस प्रेशर के कारण पल्मोनरी आर्टरी हाइपरटेंशन (Pulmonary artery hypertension) हो जाता है. पल्मोनरी आर्टरी हाइपरटेंशन हार्ट में दाहिने तरफ बहुत ज्यादा प्रेशर पड़ने लगता है. इसी आर्टरी से लंग्स में ऑक्सीजन पहुंचती है. इसके कारण इस आर्टरी में दबाव बढ़ जाता है. दबाव बढ़ने के कारण लंग्स में असमान्य परिवर्तन आ जाते हैं. यह जटिलताएं बॉडी में परेशानी को बढ़ा देती है. डॉ प्रकाश शास्त्री बताते हैं कि स्लीप एपनिया से बचाव का कोई तरीका फिलहाल नहीं है लेकिन इससे होने वाली जटिलताओं का बचाव किया जा सकता है.

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स्लीप एपनिया का टेस्ट कैसे होता है
अगर आपको नींद के पैटर्न में गड़बड़ी है और खर्राटा लेते हैं तो आपको बिना देरी विशेषज्ञ डॉक्टर के पास जाना चाहिए. क्योंकि इससे बचने का कोई घरेलू तरीका नहीं है. डॉक्टर मरीज के नींद के पैटर्न को मॉनिटर करते हैं. इसके लिए डेनाइट टेस्ट होता है. जिसमें मरीज के स्लीप पैटर्न को परखा जाता है और उसी हिसाब से मशीन लगाने की सलाह दी जाती है.

मशीन कर सकती है मदद
डॉ प्रकाश शास्त्री ने बताया कि स्लीप एपनिया की जटिलताओं से बचने के लिए सी पैप मशीन (PAP Machine) का सहारा लिया जाता है. यह बाजार में आसानी से मिल जाती है. इसे अगर रात को सोते समय लगा लिया जाए तो स्लीप एपनिया के समय लंग्स पर जो अचानक प्रेशर पड़ता है वह नहीं पड़ेगा. इससे नींद में खलल नहीं आएगी और पल्मोनरी आर्टरी हाइपरटेंशन भी नहीं होगा.


करवट लेकर सोना आसान उपाय

डॉ प्रकाश शास्त्री ने बताया कि स्लीप एपनिया से बचने का सिंपल तरीका यह है कि सोते समय मरीज करवट लेकर सोएं. अगर सीधे न सोया जाए तो खर्राटा कम हो जाता है.

Tags: Health

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