Health news 3 mudras to manage symptoms of menopause women yoga yoni hakini prana mudra anjsh
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Health news 3 mudras to manage symptoms of menopause women yoga yoni hakini prana mudra anjsh

Mudras to manage symptoms of menopause: मीनोपॉज (Menopause) मासिक धर्म यानी मेंस्ट्रुअल साइकिल के खत्म होने और महिलाओं के रिप्रोडक्टिव हार्मोन (Reproductive hormone) में कमी आने का संकेत है. ज्यादातर महिलाओं को 40 से 50 की उम्र में मेनोपॉज होता है. इसके कारण कई महिलाएं बहुत सारी समस्याओं का सामना करती हैं.

आपको बता दें कि इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक मीनोपॉज के कारण महिलाएं हॉट फ्लैश, वजाइनल ड्राइनेस जैसे कुछ लक्षणों का अनुभव करती हैं. कुछ मामलों में नींद में गड़बड़ी भी हो सकती है. कुछ महिलाओं को चिंता या अवसाद भी अपना शिकार बना लेते हैं लेकिन इसके लक्षणों को कम करने के लिए योग का सहारा लिया जा सकता है. आध्यात्मिक गुरु, योग-उद्यमी और लेखक, ग्रैंड मास्टर अक्षर (Grand Master Akshar) के अनुसार, योग एक ‘होलिस्टिक सॉल्यूशन’ देता है. उनके मुताबिक योग न केवल लक्षणों को आसानी से कम करने में कारगार है, बल्कि इस बदलाव के दौरान योग सपोर्ट सिस्टम भी प्रदान करता है. उन्होंने बताया कि आसन, प्राणायाम और ध्यान के साथ, कुछ मुद्राओं का अभ्यास मीनोपॉज के दौरान मददगार साबित हो सकता है. आइए, जानते हैं कि कौनसी 3 मुद्राएं महिलाओं को करनी चाहिए

महिलाएं जरूर करें इन 3 मुद्राओं का अभ्यास

योनि मुद्रा (Womb gesture)

  • इसका अभ्यास सुखासन या पद्मासन में बैठ कर किया जा सकता है. इसमें रीढ़ सीधी रहती है.
  • इसके लिए हाथों को गोद में लेकर आएं. मिडिल, रिंग और छोटी उंगलियों को आपस में इंटरलॉक कर लें.
  • अंगूठे और तर्जनी उंगली को एक साथ दबाएं.
  • अब हीरे की आकृति बनाते हुए अंगूठे और तर्जनी को एक दूसरे से दूर ले जाएं.

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हकीनी मुद्रा (Hakini Mudra)

  • हकीनी मुद्रा को मन की मुद्रा भी कहा जाता है.
  • इसे सूर्योदय के दौरान करने की सलाह दी जाती है.
  • इसका अभ्यास सुखासन या पद्मासन में किया जा सकता है.
  • इस मुद्रा का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले हथेलियों को कुछ इंच की दूरी पर एक दूसरे के सामने लाएं.
  • दोनों हाथों की उंगलियों और अंगूठों को मिलाएं.
  • अब हाथों को माथे के पास तीसरे नेत्र चक्र के स्तर तक उठाएं.

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प्राण मुद्रा (Prana Mudra)

  • इस मुद्रा को दोनों हाथों की मदद से बनाया जाता है.
  • इसमें रिंग फिंगर के सिरे और छोटी उंगली को अंगूठे के सिरे से जोड़ना होता है.
  • बाकी सभी अंगुलियों को सीधा फैलाएं.
  • इस दौरान श्वास लें और श्वास छोड़ें.
  • क्रोनिक कंडिशन में इसका एक बार सुबह और एक बार शाम को 15 मिनट तक अभ्यास करें.

जानकारी के मुताबिक हर मुद्रा को कम से कम 5 मिनट के लिए करना चाहिए.

Tags: Health News, Lifestyle, Women

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