Discrimination increases risk of mental health diseases study nav
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Discrimination Effects On Mental Health : जिन लोगों को भेदभाव (Discrimination) का सामना करना पड़ता है, उन्हें थोड़े समय के लिए या लंबे समय तक मानसिक (Mental) और व्यवहार (बिहेवियर) जनित समस्याओं का ज्यादा खतरा होता है. यह निष्कर्ष यूसीएलए (UCLA) मतलब यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया लॉस एंजिलिस (University of California Los Angeles) ) के रिसर्चर्स की एक ताजा स्टडी में सामने आया है. ये स्टडी पीडियाट्रिक्स (Pediatrics) नामक जर्नल में प्रकाशित हुई है. रिसर्चर्स ने अपनी स्टडी के लिए 1,834 लोगों के एक दशक के डाटा का विश्लेषण किया. स्टडी की शुरुआत के समय इनकी उम्र 18 से 38 साल के बीच थी. उन्होंने पाया कि भेदभाव का प्रभाव संचयी (cumulative) होता है. मतलब जिनके साथ भेदभाव की ज्यादा घटनाएं होती हैं, उनमें मानसिक और व्यवहार जनित समस्याओं (Mental and Behavioral Problems) का ज्यादा रिस्क होता है.

स्टडी में इस बात का भी संकेत मिला कि युवा वयस्कों (Yong Adults) में भेदभाव का प्रभाव मेंटल (मानसिक) हेल्थ संबंधी समस्याओं की देखभाल में असमानताओं और हेल्थ देखभाल में संस्थागत भेदभाव (institutional discrimination) से भी जुड़ा हुआ है, जिसमें डाइग्नोसिस, ट्रीटमेंट और हेल्थ पर होने वाले इफैक्ट में अंतर शामिल हैं.

नई स्टडी कैसे अलग है?
वैसे पहले हुई स्टडी नस्ली (Race), लैंगिक (Gender), उम्र (Age) और रंग-रूप (appearance) जैसे आधार पर होने वाले भेदभाव को बचपन में मनोरोग, मानसिक तनाव और ड्रग्स के इस्तेमाल पर फोकस करते हुए किए गए हैं. जबकि इस नई स्टडी में पहली बार बचपन से वयस्क होने के दौरान और उसके बाद समय के साथ उसी ग्रुप पर पड़ने वाले असर की खासतौर पर पड़ताल की गई है.

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क्या कहते हैं जानकार
यूसीएलए (UCLA) के डेविड गेफेन स्कूल आफ मेडिसिन (David Geffen School of Medicine) की रिसर्च स्टूडेंट येवोन लेई (Yvonne Lei) ने बताया कि ताउम्र रहने वाले मानसिक रोगों के मामलों में 75 प्रतिशत औसत 24 वर्ष की उम्र में होते हैं. इसलिए वयस्कता का ट्रांजिशन फेज इस तरह के मानसिक और व्यवहार जन्य स्वास्थ्य समस्याओं (behavioral health problems) की रोकथाम के लिए बड़ा ही अहम है. उनके मुताबिक, इसके आधार पर हमें मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार पर पुनर्विचार करना चाहिए, ताकि देखभाल समान और तार्किक आधार पर सुनिश्चित हो सके.

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कैसे की गई स्टडी
रिसर्चर्स ने यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन (University of Michigan) के 2007-2017 के बीच वयस्कता ट्रांजिशन के डाटा के विश्लेषण के अनुसार, 93 प्रतिशत लोगों ने माना कि उनके साथ भेदभाव हुआ. इनमें सर्वाधिक 26 प्रतिशत ने उम्र को भेदभाव का कारक बताया. इसके साथ ही 19 प्रतिशत ने रंग-रूप, 14 प्रतिशत ने लैंगिक और 13 प्रतिशत ने जातीय या नस्ल के आधार पर भेदभाव का शिकार होने की बात कही.

क्या रहा स्टडी का निष्कर्ष
डाटा के विश्लेषण में पाया गया कि जिन प्रतिभागियों के साथ बार बार भेदभाव हुआ, मतलब एक से ज्यादा बार भेदभाव हुआ. उनमें तकरीबन 25 प्रतिशत में मनोरोग (psychopathy) के लक्षण पाए गए और उनमें गंभीर मानसिक बीमारी का जोखिम सामान्य (जिन्हें भेदभाव का सामना या तो बिलकुल नहीं करना पड़ा हो या फिर सालभर में बामुश्किल एक बार) लोगों की तुलना में दोगुना अधिक था.

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इस स्टडी के 10 सालों के दौरान ये भी पाया गया कि जिन युवा वयस्कों को लगातार साल-दर-साल भेदभाव का सामना करना पड़ा, उनमें मनोरोग का संचयी (cumulative) असर ज्यादा था और उसका जुड़ाव ड्रग्स के यूज व हेल्त की अन्य समस्याओं से भी था. ये निष्कर्ष बताते हैं कि मानसिक और व्यवहार जनित स्वास्थ्य पर भेदभाव का असर बहुआयामी (multidimensional) होता है.

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