How to cook rice : इस तरीके से बनाना शुरू करें चावल, वरना बढ़ता है कैंसर व हार्ट डिजीज का खतरा
स्वास्थ्य

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Right way to make rice : अगर लोकप्रिय और सबसे ज्यादा खाए जाने वाला अनाज की बात की जाए, तो भारत में चावल का नाम जरूर लिया जाएगा. भारत के हर हिस्से में चावल और उससे बने अन्य फूड्स को काफी पसंद किया जाता है. हर घर में हफ्ते में कम से कम एक बार चावल जरूर बनते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि चावल को गलत तरीके से बनाने पर कैंसर (risk of cancer) और हार्ट डिजीज का खतरा हो सकता है.

चावल को बनाने के सही तरीके (how to make rice) का खुलासा करीब 4 साल पहले आई एक रिसर्च ने किया था. रिसर्च ने बताया था कि कैसे चावल को सही तरीके से बनाने (right way to make rice) पर कैंसर व दिल के रोगों का खतरा कम हो जाता है.

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How to cook rice : क्या है चावल बनाने का सही तरीका
चार साल पहले यानी 2017 में इंग्लैंड की Queens University Belfast के शोधकर्ताओं ने चावल को बनाने के सही तरीके के बारे में अपनी बात रखी थी. उनके मुताबिक, चावल बनाने से पहले चावल को रातभर या कम से कम 3-4 घंटे पानी में भिगोकर रखना चाहिए. उसके बाद चावल को पकाना चाहिए. इससे कैंसर और दिल के रोगों का खतरा बनने वाले विषाक्त पदार्थ 80 प्रतिशत तक कम हो जाते हैं.

rice cooking tips : चावल में कैसे आते हैं कैंसर व हार्ट डिजीज का खतरा बनने वाले तत्व
शोधकर्ताओं के मुताबिक, मिट्टी में इंडस्ट्रियल टॉक्सिन्स और कीटनाशक की मौजूदगी चावल को दूषित कर देती है. जिसके कारण लाखों लोगों की सेहत को नुकसान पहुंच सकता है. इन कारकों से चावल में आर्सेनिक नामक टॉक्सिन की अधिकता हो जाती है, जो कि कैंसर व हार्ट डिजीज का खतरा (risk of heart disease) बन सकता है.

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चावल बनाने के इन 3 तरीकों पर किया गया था एक्सपेरिमेंट
एएनआई की 2017 में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने चावल बनाने के तीन तरीकों का अध्ययन किया, जिसमें से रातभर या 3-4 घंटे पानी में भिगोकर चावल बनाने के तरीके को सबसे फायदेमंद पाया गया. शोधकर्ताओं ने पहले तरीके में दो तिहाई पानी में एक हिस्सा चावल डालकर पकाया. दूसरे तरीके में पांच हिस्सा पानी और एक हिस्सा चावल डालकर पकाया गया और चावल पकने के बाद बचे पानी को निकाल दिया गया. इस दूसरे हिस्से में हानिकारक आर्सेनिक की मात्रा लगभग आधी हो गई थी. वहीं, तीसरे हिस्से में चावल को रातभर भिगोया गया. जिसमें हानिकारक तत्व 80 प्रतिशत तक कम हो गया था.

यहां दी गई जानकारी किसी भी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है. यह सिर्फ शिक्षित करने के उद्देश्य से दी जा रही है.



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