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[Best 4] 15 August Essay in Hindi- Independence Day 2020 [All Class]


आजादी का दिन 15 अगस्त हर भारतीय के लिए एक सबसे बड़े पर्व में से एक है। इसलिए इस दिन स्कूलों में कुछ ज्यादा ही चहल-पहल और सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने को मिलता है। पर इससे पहले आपको मिलता है 15 August Essay Task, इसलिए हम पेश कर रहे है ये पोस्ट-

15 August Essay in Hindi

15 अगस्त पर निबंध (100 शब्द)

दिनांक 15 अगस्त 1947 भारत वर्ष के लिए बहुत ही खुशी का दिन है। इस दिन ही भारत को 200 वर्षो के बाद अंग्रेज़ो की गुलामी से आजादी मिली थी। इस दिन आजादी के लिए शहीद हुये देश भक्तो को श्रद्धांजली दी जाती है।

इस दिन सबसे पहले लाल किले पर कार्यरत प्रधान मंत्री द्वारा कर कमलों से ध्वजरोहरण होता है। उसके सभी सरकारी कार्यलयों और स्कूलों में भी झण्डा रोहण होता है और साथ ही राष्ट्र गान गाया जाता है। फिर विभिन्न प्रकार के रंगारंग कार्यक्रम होते है।

15 अगस्त पर निबंध (200 शब्द)

15 अगस्त भारत के हर नागरिक के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है, क्योकि इस ही दिन सन 1947 को भारत को अंग्रेजो से आजादी मिली थी। भारत की आजादी के लिए भारत के वीर सपूतो ने हँसते-हँसते  अपनी जान कुर्बान कर दी।

तब जा कर आज हम आजाद भारत में सांस ले  पा रहे है। इस ही दिन भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में पंडित जवाहर लाल नहरु ने शपथ ली थी। इस दिन सभी सरकारी दफ्तरों और सभी विधालय में रंगा-रंग कार्यक्रम होते है और सभी को देश की आजादी के नायकों की वीर गाथाओं के बारे में बताया जाता है।

स्वतंत्रता दिवस की तैयारी स्कूल और कॉलेजों में कई दिनों पहले से ही शुरू हो जाती है।  इस दिन लाल-किले पर कार्यरत प्रधानमंत्री  द्वारा झण्डा रोहण किया जाता है और आजादी के लिए शहीद हुये क्रांतिकारियों को याद करने के लिए राष्ट्र गान गाया जाता है।

फिर मुख्य अथिति द्वारा भाषण दिया जाता है। फिर तीनों भारतीय सेना अपनी शक्ति  का प्रदर्शन करती है। उसके बाद देश भक्ति से ओत-प्रोत नाट्य कार्यकर्म और विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम  प्रस्तुत किए जाते  है और अंत में मिठाई वितरण का कार्यक्रम होता है।

15 अगस्त पर निबंध (300 शब्द)

200 वर्षो की लगातार प्रताड़णा के बाद 15 अगस्त 1947 को भारत को आजादी मिली। इस कारण 15 अगस्त को स्वतन्त्रता दिवस के रूप में घोषित किया गया। ये आजादी भारत को बहुत ही संघर्ष के बाद मिली।

आजादी के इस हवन कुंड में  ना जाने कितने ही माताओं ने अपनी कोख और कितने ही स्त्रियो की मांग उजाड़ दी। फिर जा कर हम लोग आज स्वतंत्र भारत में आजादी की सांस ले पा रहे है। इसलिए 15 अगस्त को हर भारतीय स्वतन्त्रता दिवस के रूप में नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय त्यौहार के रूप में मनाता है।

पंडित जवाहर लाल नेहरू को स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में चुना गया। 15 अगस्त को भारत की राजधानी दिल्ली के लाल किले पर पहली बार गर्व से तिरंगे को फहराया गया।

15 अगस्त 1947 की मध्य रात्री को नेहरू जी ने अपने भाषण “The Tryst with Destiny ” में पूरे भारतीय जनता को संभोधित करते हुये कहा कि वर्षों की गुलामी के बाद आज वो समय आ गया है, जहां जा कर हम संकल्प निभाएंगे और अपने दुर्भाग्य का अंत करेंगे।

भारत में अलग-अलग जाति, धर्म और सम्प्रदाय के लोग जिनकी बोली, वेशभूषा और रहन-सहन अलग-अलग होने के बावजूद भी सभी भारतीय 15 अगस्त को एक त्यौहार की तरह मानते है। पूरे विश्व में कही भी रहें पर अपने भारतीय होने पर गर्व होता है।

ये हमारे शहीदों का बलिदान ही है जो हमें हमेंशा से एकता के सूत्र में बंधे हुये है। वरना इतनी सारी विभिन्नताओ के बाद भी एक ही तिरंगे के नीचे गर्व से रहते है। भारत विश्व के सबसे विशाल लोकतन्त्र है।

15 अगस्त पर निबंध (600 शब्द)

प्रस्तावना :- भारत के महान कवि तुलसी दास का कहना है कि “पराधीन सपनेहु सुख नाही ” अर्थात इस पंक्ति से दासजी ये कहना चाह रहे है कि जो व्यक्ति पराधीन या किसी का गुलाम होता है उस को स्वप्न या नींद में भी सुख नही मिलता है अर्थात पराधीन मनुष्य को किसी भी समय सुख मिलता है चाहे वह नींद की अवस्था में ही क्यो ना हो।

फिर भारत तो 200 वर्षो से अंग्रेज़ो का गुलाम था। ऐसे में भारत की जनता को कैसे चैन मिलता, इस कारण भारत की जनता ने 1857 में एक साथ मिलकर अंग्रेज़ो का विरोध कर दिया। परंतु सफलता मिलते-मिलते 90 दशक लग गए। अंत में 15 अगस्त 1947 को जा कर भारत स्वाधीन हो पाया।

ध्वजा रोहण :-  पंडित जवाहर लाल नेहरू को आजाद भारत का पहले प्रधानमंत्री चुना गया था। पहली बार 15 अगस्त 1947 को सम्पूर्ण भारत वर्ष ने लाल किले के केलहरी गेट पर आजादी का तिरंगा लहराया।

भारत के वीर सपूतों को उनके अखंड योगदान के लिए  श्रद्धांजलि दी गई। फिर स्वतंत्र भारत ने मिलकर राष्ट्र गान गाया। तब से प्रत्येक वर्ष 15 अगस्त को पूरे भारतवासी स्वधिनता  दिवस के रूप में मानते है।

स्वधीनता दिवस  का कार्यक्रम :-  स्वतन्त्रता दिवस के कार्यक्रम की तैयारी अगस्त महीने के 1 तारीख से ही शुरू हो जाती है। इस दिन के लिए स्कूल के छात्र और छात्राओ में अत्यधिक उत्साह रहता है।

जिसके लिए बालक – बालिकाएं तरह-तरह के नाटक और नृत्य प्रस्तुत करते है, जो  देश भक्ति से औत-प्रौत होते है। आजादी के लिए शहीद हुये वीर सपूतो के लिए परेड और तोपों की सलामी दी जाती है। साथ ही देश के लिए कुछ कर गूजरने वाले देशवासियो को राष्ट्र पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है।

आजादी का इतिहास :-  आज भी अगर भारत के उन वीर सपूतों को याद करते है तो आँखों में आँसू आ जाते है। 200 वर्षो से गुलाम रहे भारतीयो ने आखिरकार त्रस्त हो कर आजादी का बीड़ा उठा लिया। परंतु केवल संकल्प मात्र के आजादी नहीं मिलती है।

इसके लिए आजादी रूपी हवन कुंड में आहुती देनी होती है। तो फिर क्या था, ये भारत माता के लाल  पीछे हटने वालों में से नही थे।  भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस और  अनगिनत वीरों ने अपनी जान की आहुती दे कर आजादी के हवन कुंड की प्रजावलित किया। महात्मा गांधी, सरदार बलभ भाई पटेल जैसे कई अहिंसा के पुजारियों ने आंदोलन और सत्याग्रह से ब्रिटिश सरकार की जड़े हक हिला दी।

इतनी से सफलता के लिए न जाने कितनी  बार जेल  जाना पड़ा और अनगिनत लठिया खानी पड़ी। परंतु ये भारत के मिट्टी के वो लाल थे, जो मरते दम  तक हार नही माने। आखिरकार 15 अगस्त 1947 को स्वर्णिम दिन आ ही गया, जिस दिन आजादी मिली। आजादी के हवन कुंड में शहीदो की आहुतियों का सफर थम गया।

उपसंहार :- 15 अगस्त भारतियों के लिए बहुत ही खुशी का दिन है। इस दिन ही भारत के पूतों के बलिदान रंग लाई  और इसी कारण आज हम भारत में आजादी की सांस ले पा रहे है। परंतु जब भी हम आजादी और शहीदों को याद करते है तो अनायास ही हमारे आँखों में आँसू आ जाते है।

इस लिए हर भारतीय का यह फर्ज बनता है कि वह देश के लिए कुछ ऐसा करे कि उसे भारतीय होने पर गर्व हो। परंतु आज भी बहुत से लोग है, जो अपने भारत देश के गर्व को गिराना चाहते है।

हमें देश के एकता और अखंडता बनाए रखना होगा।  घुस, जमाखोरी, तस्करी और भ्रष्टाचार से देश की रक्षा करना होगा। देश के  गौरव और सम्मान को बनाए रखना हमारा परम कर्तव्य होना चाहिये।

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