हर्निया के इलाज में कारगर है ये फल, बस ऐसे करना होगा इस्तेमाल, जानें हर्निया का आयुर्वेदिक उपाय
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हर्निया एक शारीरिक समस्या है, जो जानलेवा दिक्कतें पैदा कर सकती है. जब शरीर के अंदर कोई मांसपेशी या ऊतक (मसल्स या टिश्यू) अंगों की कमजोर परत को भेदकर बाहर निकलने लगते हैं, तो उसे हर्निया कहा जाता है. कई बार हर्निया के शुरुआती लक्षण भी नहीं दिखते और कई बार इसके कारण कम या गंभीर दर्द भी हो सकता है. लेकिन आयुर्वेद में हर्निया का कारगर इलाज बताया गया है, जिसकी मदद से शुरुआत में ही आप हर्निया का इलाज (Hernia Ayurvedic Treatment) कर सकते हैं.

पहले हर्निया के प्रकार और बचाव के बारे में थोड़ा जान लेते हैं.

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हर्निया के आम प्रकार – Types of Hernia
हाइटल हर्निया – पेट का हिस्सा डायाफ्राम से होते हुए छाती तक पहुंच जाना
इनगुइनल हर्निया – आंत या ब्लैडर का हिस्सा पेट या जांघ से बाहर आना
इंसिजनल हर्निया – पेट में पिछली सर्जरी की जगह पर आंत का हिस्सा बाहर आना
अम्बिलिकल हर्निया – नाभि के पास छोटी आंत का बाहर आना

हर्निया से बचाव – Precautions of Hernia

  1. हर्निया से बचाव के लिए वजन नियंत्रित रखें
  2. पेट साफ करने या पेशाब करने के दौरान बेवजह जोर ना लगाएं
  3. भारी वजन उठाते हुए पोस्चर का ध्यान रखें
  4. धूम्रपान ना करें
  5. लगातार खांसी होने पर डॉक्टर से परामर्श करें
  6. स्वस्थ आहार लें और कब्ज से बचें

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हर्निया का आयुर्वेदिक इलाज – Ayurvedic Treatment of Hernia
देश के जाने-माने आयुर्वेदिक एक्सपर्ट व ‘‘इंक्रेडिबल आयुर्वेदा’’ के संस्थापक डॉ. अबरार मुल्तानी के अनुसार, हर्निया के लक्षणों को पहचानकर (अगर हैं तो) आपको शुरुआती समय में ही इलाज कर लेना चाहिए. उनके मुताबिक आयुर्वेद में बहेड़ा को हर्निया के इलाज में काफी कारगर पाया गया है. यह छोटे व शुरुआती हर्निया का काफी प्रभावी आयुर्वेदिक इलाज है.

बहेड़ा त्रिफला का एक अंग होता है. आप बहेड़ा का छिलका उतार लीजिए और उसका पाउडर बना लीजिए. अब इस पाउडर को जामुन के सिरके में मिलाकर हर्निया वाली जगह पर 1 से 1.5 घंटे लेप करना है. ध्यान रहे कि हर्निया का यह आयुर्वेदिक उपाय बड़े, गंभीर व अम्बिलिकल हर्निया में इस्तेमाल ना करें.

यहां दी गई जानकारी किसी भी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है. यह सिर्फ शिक्षित करने के उद्देश्य से दी जा रही है.



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