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Artificial Cells Mimic Living Cells – Success in making artificial cells capable of doing all the necessary work of living Cells Research – आर्टिफिशियल सेल्स बनाने में मिली कामयाबी, लिविंग सेल्स के सभी जरूरी काम में सक्षम

Artificial Cells Mimic Living Cells : दुनियाभर के वैज्ञानिक लंबे समय से कृत्रिम कोशिकाओं यानी आर्टिफिशियल सेल्स (Artificial cells) पर काम कर रहे है. अब इस दिशा में अमेरिका के रिसर्चर्स के हाथ एक बड़ी सफलता लगी है. दैनिक जागरण में छपी रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल सेल्स वाला एक ऐसा खास स्ट्रक्चर विकसित कर लिया, जो जीवित कोशिकाओं (living cells) के सभी जरूरी काम करने में सक्षम है. आसान शब्दों में कहें तो रिसर्च करने वालों ने अकार्बनिक पदार्थ (inorganic matter) का यूज कर ऐसे आर्टिफिशियल सेल्स डेवलप किए हैं, जो जीवित कोशिका की तरह बाहरी चीजों को अवशोषित (absorbed) करने, उन्हें प्रोसेस करने और वेस्ट मैटेरियल को बाहर निकालने में सक्षम है. इस संदर्भ में नेचर (Nature) नामक पत्रिका में एक लेख प्रकाशित किया गया है.

रिपोर्ट में आगे लिखा है, जीवित कोशिकाओं का एक मौलिक कार्य पर्यावरण ऊर्जा (environmental energy) को प्राप्त कर उनके सिस्टम में और बाहर अणुओं (molecules) को पंप करना है. जब इन अणुओं को कम सांद्रता (concentration) वाले क्षेत्रों से उच्च सांद्रता वाले क्षेत्रों में ले जाने के लिए ऊर्जा का उपयोग किया जाता है, तो इस प्रोसेस को सक्रिय परिवहन यानी एक्टिव ट्रांसपोर्ट कहा जाता है. एक्टिव ट्रांसपोर्ट कोशिकाओं को ग्लूकोज या अमीनो एसिड जैसे आवश्यक अणुओं को लेने, ऊर्जा स्टोर करने और अपशिष्ट यानी वेस्ट निकालने की अनुमति देता है.

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दशकों से शोधकर्ता कृत्रिम कोशिकाओं को बनाने का काम कर रहे हैं. अब तक इस दिशा में जो कार्य किए गए उनमें सक्रिय परिवहन जैसे जटिल सेलुलर प्रोसेस को करने की क्षमता का आभाव रहा. पहली बार रिसर्चर्स ऐसे आर्टिफिशियल सेल तैयार करने में सफल हुए हैं. जो इन कार्यों में भी सक्षम है.

ऐसे मिलती है एनर्जी
रिपोर्ट के मुताबिक, सक्रिय परिवहन में मैटेरियल को खींचने और निकालने के लिए कोशिकाओं जैसी संरचना को ऊर्जा देने के लिए एक तंत्र की आवश्यकता होती है. जीवित कोशिकाओं में माइटोकांड्रिया और एटीपी सक्रिय परिवहन के लिए आवश्यक ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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वहीं इन आर्टिफिशियल सेल्स के तंत्र में शोधकर्ताओं ने नैनो-चैनल के अंदर एक रासायनिक रूप से प्रतिक्रियाशील घटक जोड़ा, जो प्रकाश द्वारा सक्रिय होने पर एक पंप के रूप में कार्य करता है. जब प्रकाश पंप से टकराता है तो यह एक रासायनिक प्रतिक्रिया को ट्रिगर करता है. पंप को एक छोटे से वैक्यूम में बदल देता है और कार्गो को झिल्ली (Membrane) में खींच लेता है. जब पंप बंद जाता है तो कार्गो फंस जाता है और कृत्रिम कोशिकाओं के अंदर प्रोसेसड (संसाधित) होता है. वहीं जब सासायनिक प्रतिक्रिया उलट जाती है, तो उसे बाहर धकेल दिया जाता है.

न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में कैमिस्ट्री के असिस्टेंट प्रोफेसर और इस स्टडी के मुख्य लेखक स्टेफानो सैकना के मुताबिक,’हमारा डिजाइन कॉन्सेप्ट इन आर्टिफिशियल सेल्स को एक्टिव ट्रांसपोर्ट कार्यों को करने में सक्षम बनाती है, जो अब तक जीवित कोशिकाओं के दायरे तक सीमित है.’

न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी और शिकागो यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने एक नए व पूरी तरह से सिंथेटिकल सेल मिमिक (कृत्रिम कोशिका) का वर्णन किया है, जो जीवित कोशिकाओं के कार्यों को दोहराने के बेहद करीब है. शोधकर्ताओं के मुताबिक, स्टडी के दौरान जब विभिन्न कणों के मिश्रण को इन कोशिकाओं में डाला गया, तो सामने आया कि ये स्वयं उन कणों को अवशोषित (absorbed) करने, भंडारण करने और उनका वितरण करने में सक्षम है. इन कृत्रिम कोशिकाओं में न्यूनतम अवयवों का प्रयोग किया गया है और इसे तैयार करने में जीवन विज्ञान की किसी भी सामग्री का इस्तेमाल नहीं हुआ है.

इस तरह किया विकसित
आर्टिफिशियल सेल को डिजाइन करने के लिए रिसर्च करने वालों ने एक बहुलक (पालीमर) का उपयोग करके एक लाल रक्त कोशिका (RBC) के आकार की एक गोलाकार झिल्ली बनाई. जो सेलुलर झिल्ली के लिए एक एक स्टैंड-इन है और एक सेल के अंदर और बाहर जाने को कंट्रोल करती है. उन्होंने एक नैनो-चैनल बनाने वाली गोलाकार झिल्ली में एक सूक्ष्म छेद दिया, जिसके माध्यम से एक कोशिका के प्रोटीन चैनल की नकल करते हुए पदार्थ का आदान प्रदान किया जा सकता है.

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