Aortic stenosis is becoming a major cause of heart failure what are its symptoms and treatment nav
स्वास्थ्य

Aortic stenosis is becoming a major cause of heart failure what are its symptoms and treatment nav

Aortic Stenosis, Know Symptoms and Treatment : आज के बदलते लाइफस्टाइल में हार्ट फेलियर (Heart Failure) के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं.ये देखने में आया है कि बहुत कम उम्र के लोग आजकल इसकी चपेट में आ रहे हैं. जानकार इसके पीछे एओर्टिक स्टेनोसिस (Aortic Stenosis) को एक अहम कारण मानते हैं. आपको बता दें कि एओर्टिक स्टेनोसिस (Aortic Stenosis) हार्ट की एक गंभीर बीमारी है, जो धीरे-धीरे बढ़ती है. अगर इसके लक्षण पहचानने के बाद इलाज में देरी की गई, तो ये खतरनाक हो सकती है. दैनिक जागरण अखबार में छपे आलेख में एस्कॉर्ट्स हार्ट अस्पताल (Escorts Heart Hospital) में एडिशनल डायरेक्टर कार्डियोलॉजी (Additional Director Cardiology) डॉ. विजय कुमार (Dr Vijay Kumar) ने बताया है कि महाधमनी का संकुचन यानी एओर्टिक स्टेनोसिस (Aortic Stenosis) तब होता है, जब हार्ट का एओर्टिक वाल्व संकरा (Narrow) हो जाता है और पूरी तरह से नहीं खुलता है. जिससे हार्ट से शरीर की मुख्य धमनी (Main Artery) की ओर ब्लड फ्लो अवरुद्ध या कम हो जाता है.

उन्होंने आगे बताया है कि एओर्टिक स्टेनोसिस की समस्या उम्र के साथ बढ़ती है, इसका प्रमुख लक्षण  एओर्टिक वाल्व (aortic valve) की ओपनिंग (मुंह) का संकरा हो जाना है. जिससे बाएं निलय (left ventricle) से मुख्य धमनी (Main Artery) की तरफ ब्लड फ्लो (Blood Flow) बाधित होता है और बाएं आलिंद (Left Atrium) में दबाव को भी प्रभावित कर सकता है. .

कुछ ध्यान देने योग्य लक्षण
डॉ. विजय कुमार (Dr Vijay Kumar) ने एओर्टिक स्टेनोसिस (Aortic Stenosis) के कुछ लक्षण भी बताएं हैं, जिन पर ध्यान देना जरूरी है. उनका कहना है कि एओर्टिक स्टेनोसिस (Aortic Stenosis) के लक्षण हल्के या गंभीर हो सकते हैं. इसके लक्षण तब दिखाई देते हैं, जब वाल्व का संकुचन गंभीर हो जाता है. एओर्टिक वाल्व स्टेनोसिस की समस्या मामूली होने पर लगभग सभी में कभी भी कोई लक्षण दिखाई नहीं देता है. जब लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई दें, अक्सर उस स्थिति तक पहुंचने में काफी समय लगता है. इससे कमजोर होते हार्ट के क्रमिक लक्षणों (gradual symptoms) की कभी-कभी अनदेखी हो सकती है. इसलिए इन लक्षणों पर समय रहते ध्यान देने की जरूरत है.

यह भी पढ़ें- बच्चों की मानसिक सेहत के लिए जरूरी हैं फल और सब्जियां-स्टडी

– वर्कआउट/एक्सरसाइज करते समय सांस लेने में तकलीफ होना
-छाती में दर्द या जकड़न होना.
-सिर हल्का महसूस होना या कभी-कभी बेहोश हो जाना.
-थकान लगना.
-हार्ट की धड़कनें तेज हो जाना या हृदय के धड़कते समय तेज आवाज आना.
-हार्ट में सरसराहट (हार्ट की सामान्य धड़कनों के बीच एक अतिरिक्त धड़कन महसूस करना) महसूस होना.

इलाज के ऑप्शंस
एओर्टिक स्टेनोसिस धीरे-धीरे बढ़ने वाली बीमारी है, इसके लक्षण पहचानने के बाद यदि इलाज में देरी की गई तो यह खतरनाक हो सकती है. गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस के मामलों में टीएवीआई यानी ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व इंप्लांटेशन (Transcatheter Aortic Valve Implantation) सबसे बेहतर विकल्प है.

यह भी पढ़ें- महिलाओं के लिए 30 की उम्र के बाद इन सप्लीमेंट्स को लेना होगा बेहतर

क्या है ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व इंप्लांटेशन
ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व इंप्लांटेशन (टीएवीआई) एक मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया (Minimally Invasive Procedure) है. इसमें पुराने डैमेज वाल्व को हटाए बिना नया वाल्व डाला जाता है. नया वाल्व अस्वस्थ वाल्व के अंदर रखा जाता है. ये प्रोसेस कुछ वैसा ही जैसे धमनी (Artery) में स्टेंट (Stent) लगाने के समान है. एक बार जब नए वाल्व का विस्तार हो जाता है या वह फैल जाता है, तब वह पुराने वाल्व को रास्ते से हटा देता है. इसके बाद प्रतिस्थापित वाल्व (Replace valve) के टिशू ब्लड फ्लो को कंट्रोल करने का काम संभाल लेते हैं.

टीएवीआई के फायदे
ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व इंप्लांटेशन (टीएवीआई) ने गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस के मरीजों के इलाज में एक बड़े बदलाव का संकेत दिया है. टीईवीआई ने न केवल विभिन्न ट्रांसकैथेटर हार्ट वाल्व (टीएचवी) टेक्नोलॉजी (Transcatheter Heart ValveTechnologies) के लिए बड़ा विकास किया है.

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published.