हार्ट की बीमारी और हाई बीपी वालों को दूसरी बार कोरोना वायरस होने का खतरा ज्यादा, इन सावधानियों में छिपा है इलाज
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हार्ट की बीमारी और हाई बीपी वालों को दूसरी बार कोरोना वायरस होने का खतरा ज्यादा, इन सावधानियों में छिपा है इलाज | health – News in Hindi

दिल और ब्‍लड प्रेशन की समस्‍या से जूझ रहे लोगों को खतरा ज्‍यादा है.

शोध (Research) में नया खुलासा हुआ है क‍ि जो लोग हार्ट संबंधी किसी बीमारी और हाई बीपी (Blood Pressure) से पीड़ित हैं, उन्हें अत्यधिक सावधान रहने की जरूरत है. रिपोर्ट के अनुसार ऐसे लोगों में कोरोना वायरस (Coronavirus) के पलटवार की आशंका सबसे ज्यादा होती है.



  • Last Updated:
    July 3, 2020, 6:33 AM IST

कोरोना वायरस (Coronavirus) तेजी से फैल रहा है और अब तक इसका कोई प्रमाणिक इलाज भी नहीं मिला है. इस बीच, मानव जाति की सबसे बड़ी दुश्मन बन चुकी इस बीमारी से जुड़े शोध (Research) में नया खुलासा हुआ है. इसके मुताबिक जो लोग हार्ट संबंधी किसी बीमारी और हाई बीपी (Blood Pressure) से पीड़ित हैं, उन्हें अत्यधिक सावधान रहने की जरूरत है. रिपोर्ट के अनुसार ऐसे लोगों में कोरोना वायरस के पलटवार की आशंका सबसे ज्यादा होती है. चीन (China) में होजहोंग विश्वविद्यालय के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने यह अध्ययन किया है. अध्ययन में वुहान हॉस्पिटल में भर्ती 938 मरीजों के डाटा को शामिल किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार ऐसे मरीजों के फेफड़ों से कोरोना संक्रमण पूरी तरह ठीक नहीं होता है. टेस्ट में रिपोर्ट निगेटिव आने पर इन्हें स्वस्थ्य मान लिया जाता है. कुछ दिन बाद कोरोना वायरस फिर से हमला करता है. आम मरीजों की तुलना में हार्ट और हाई बीपी के मरीजों के लिए यह स्थिति अधिक घातक हो सकती है.

myUpchar से जुड़े एम्स के डॉ. अजय मोहन के अनुसार कोरोना वायरस से होने वाला संक्रमण एक तरह का वायरल इन्फेक्शन है. यह मुख्य रूप से श्वसन तंत्र, नाक और गले को प्रभावित करता है. जो लोग पहले से डायबिटीज, हार्ट संबंधी किसी की बीमारी या ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं, उन पर यह वायरस आसानी से हमला कर देता है. शरीर में पहले से मौजूद इन बीमारियों के कारण इन लोगों के लिए इस स्थिति से उबरना मुश्किल होता है. वहीं दूसरी बार हमला हो जाए तो शरीर हिम्मत हार जाता है.

हार्ट के मरीज और हाई बीपी वाले ऐसे रखें अपना ध्यानआईसीएमआर (इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च) ने अपनी गाइडलाइन में स्पष्ट उल्लेख किया है कि ऐसे मरीजों को अपना ध्यान किस तरह रखना चाहिए. सबसे पहले तो आईसीएमआर ने साफ कहा है कि उक्त बीमारियां होने का मतलब यह नहीं है कि कोरोना संक्रमण होगा ही. इसके बाद बताया है कि ऐसे मरीजों को डॉक्टरों द्वारा बताई गई दवाओं का नियमित रूप से सेवन करते रहना चाहिए. हो सकता है कि समय-समय पर डॉक्टर दवा में बदलाव करें, तो भी दवाओं को नियमित सेवन सुनिश्चित करना चाहिए. साथ ही कोरोना वायरस और लॉकडाउन संबंधी स्वस्थ्य मंत्रालय और केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन जरूर करना चाहिए.

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अपने मन से न लें कोई दवा
यूं तो अपने से कोई भी दवा लेना खतरे से खाली नहीं है. वहीं मरीज हार्ट और बीपी से जुड़ी बीमारियों को शिकार हो तो थोड़ी सी लापरवाही भारी पड़ सकती है. दरअसल, कोरोना काल में कई दवाएं प्रचलित हुई हैं, लेकिन कोई भी कोरोना संक्रमण का पुख्ता इलाज साबित नहीं हुई है. अगर हाई बीपी और हार्ट संबंधी बीमारियों से जूझ रहा मरीज एजिथ्रोमाइसीन, हाइड्राक्सी जैसी दवाएं बिना डॉक्टर की सलाह के लेता है तो बहुत भारी पड़ सकता है. कोई भी दवा लेने या यहां तक कि घरेलू उपचार के प्रयोग करने से पहले भी डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए. myUpchar से जुड़े एम्स के डॉ. अजय मोहन के अनुसार जब तक कोरोना वायरस का इलाज नहीं मिल जाता, तब तक सावधानी ही इलाज है.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, कोविड-19 के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ें।

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