हाइपोथायरॉएडिज्म में क्यों बढ़ने लगता है वजन? इस बीमारी में कैसे करें वजन कंट्रोल, जानें यहां
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हाइपोथायरॉएडिज्म में क्यों बढ़ने लगता है वजन? इस बीमारी में कैसे करें वजन कंट्रोल, जानें यहां

Hypothyroidism and Weight Gain: थायरॉएड (Thyroid) दो प्रकार का होता है, हाइपरथायरॉयडिज्म (Hyperthyroidism) और हाइपोथायरॉएडिज्म (Hypothyroidism). हाइपरथायरॉयडिज्म होने पर गर्दन (थायरॉयड) में स्थित तितली के आकार की ग्रंथि या ग्लैंड द्वारा थायरॉएड हार्मोन का अत्यधिक उत्पादन होने लगता है. हाइपोथायरॉएडिज्म को अंडरएक्टिव थायरॉएड भी कहा जाता है. यह एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें थायरॉएड ग्लैंड पर्याप्त मात्रा में थायरॉएड हार्मोन का निर्माण करना बंद कर देता है. वैसे तो हाइपोथायरॉएडिज्म ज्यादातर बुजुर्ग महिलाओं में देखा जाता है, लेकिन अब यह कम उम्र के लोगों में भी अधिक हो रहा है. इस स्थिति में शरीर के कई अन्य अंगों के कार्य भी प्रभावित होते हैं, जिससे थकान, रूखी त्वचा, वजन बढ़ना, कब्ज, ठंड महसूस होना जैसी समस्याएं नजर आती हैं. कुछ लोगों में हार्ट रेट, शरीर का तापमान, मेटाबॉलिज्म भी बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है.

हाइपोथायरॉएडिज्म में क्यों बढ़ता है वजन?

टीओआई में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, हमारे गर्दन में तितली के आकार का एक ग्लैंड मौजूद होता है, जो मुख्य तीन तरह के हार्मोंस का निर्माण करता है. ये हार्मोंस हैं टी3, टी4 और कैल्सिटोनिन. जब गर्दन में मौजूद ये थायरॉएड ग्लैंड पर्याप्त मात्रा में हार्मोंस का निर्माण नहीं कर पाता है, तो शरीर का मेटाबॉलिज्म कम हो जाता है. इसी वजह से वजन बढ़ने लगता है. हाइपरथायरॉयडिज्म में जहां वजन कम होता है, तो वहीं हाइपोथायरॉयडिज्म में व्यक्ति का वजन बढ़ने लगता है. थायरॉएड की दवाएं थायरॉएड के स्तर को संतुलित करने में मदद कर सकती हैं. लेकिन, वजन को कंट्रोल करने के लिए आपको एक्सरसाइज के साथ हेल्दी डाइट का सेवन करना जरूरी है. हाइपोथायरॉयडिज्म होने पर वजन को कंट्रोल रखने के लिए कई बार कुछ वेट लॉस टिप्स कारगर साबित नहीं होते हैं, ऐसे में एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें.

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हाइपोथायरॉएडिज्म में काम नहीं आती ये वेट लॉस टिप्स

कुछ लोग हाइपोथायरॉएडिज्म की समस्या होने पर अपने बढ़ते वजन को कंट्रोल करने के लिए डाइट से कैलोरी इनटेक कम कर देते हैं. लेकिन हाइपोथायरॉएडिज्म या थायरॉएड से संबंधित समस्या में डाइट कंट्रोल करने के साथ एक्सरसाइज करना भी बहुत जरूरी है. मेटाबॉलिज्म बूस्ट करने वाले एक्सरसाइज करें, ताकि कैलोरी अधिक बर्न हो. रक्त शर्करा के स्तर को कम करें.

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वजन घटाने वाले हार्मोन जैसे लेप्टिन को बैलेंस करें. धीमी चयापचय (Metabolism) होने के कारण, हाइपोथायरॉएडिज्म के रोगियों को कैलोरी की आवश्यकता थोड़ी बुहत होती है, इसलिए इसे डाइट से कम कर देना कहीं से भी उचित नहीं है. बेहतर है कि आप वजन को कम करने के लिए नियमित रूप से वर्कआउट और एक्सरसाइज करें. हाइपोथायरॉएडिज्म में वेट लॉस सप्लीमेंट्स खुद से लेने से बचें. किसी भी डाइट को फॉलो करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें.

Tags: Health, Health tips, Lifestyle

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