हफ्ते में सिर्फ 75 मिनट तेज चलने से कम हो सकता है डिप्रेशन का खतरा - स्टडी
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हफ्ते में सिर्फ 75 मिनट तेज चलने से कम हो सकता है डिप्रेशन का खतरा – स्टडी

टहलना और व्यायाम करना सेहत के लिए हमेशा से ही फायदेमंद रहा है. लेकिन आजकल की लाइफस्टाइल में इन दोनों कामों के लिए समय निकालना काफी मुश्किल होता है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) की एडवाइज है कि सभी हफ्ते में कम से कम ढाई घंटे एक्सरसाइज करनी चाहिए. लेकिन अब एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि अगर आप एक हफ्ते में सिर्फ 75 मिनट तेज गति से चलने (Brisk walk) से आप डिप्रेशन (Depression) का शिकार होने से बच सकते हैं. डेली मेल में छपी न्यूज रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी (Cambridge University) में हुई एक रिसर्च के नतीजो में ये बात सामने आई है. रिसर्च से जुड़े साइंटिस्टों के अनुसार डब्ल्यूएचओ द्वारा बताए गए टाइम से आधे समय भी एक्सरसाइज करने पर डिप्रेशन का आसार 20% रह जाता हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हफ्ते में 150 मिनट एक्सरसाइज जरूरी है. वहीं, कैंब्रिज के साइंटिस्टों का कहना है कि अगर आप एक्सरसाइज के लिए इससे आधा टाइम भी दें तो ये आपकी फिजिकल और मेंटल हेल्थ के लिए अच्छा रहेगा.

व्यायाम से  खुशी का अहसास
एक्सरसाइज से शरीर में एंडोर्फिन हार्मोन बनता है, जो कि फील गुड हार्मोन है. ये हमें खुशी का एहसास दिलाता है. इससे डिप्रेशन से जूझ रहे लोगों को मदद मिल सकती है. साइंटिस्टों की मानें तो एक्सरसाइज से डिप्रेशन का सामना करने वाले लोगों की सोच में भी बदलाव आता है. इससे वह सोशल एक्टिविटीज में दोबारा एक्टिव होना भी शुरू कर देते हैं.

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कैसे हुई स्टडी
ये स्टडी 1 लाख 90 हजार लोगों पर की गई. इसमें इंडिया, यूएस, रशिय, मैक्सिको, ऑस्ट्रेलिया, जापान समेत यूरोपीयन देशों के लोग शामिल थे. स्टडी में शामिल लोगों में 28 हजार डिप्रेशन से जूझ रहे थे. रिसर्च टीम के चीफ डॉ. मैथ्यू पिअर्स के अनुसार, फिजिकल एक्टिविटीज से मेंटल हेल्थ पर पॉजीटिव असर होता है. डिप्रेशन की वजह नींद न आना, वजन बढ़ना, आंखें कमजोर होना, थकान, काम में मन नहीं लगने जैसी प्रोब्लम्स हो सकती हैं.

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दवा से भी ज्यादा असरदार
आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया में लगभग 28 करोड़ लोग डिप्रेशन (अवसाद) की चपेट में हैं. इसके कारण वे लोग लंबे अरसे तक निराशाजनक महसूस करते हैं. कुछ स्टडीज के अनुसार फिजिकल एक्टिविटी डिप्रेशन का सामना करने में एंटी-डिप्रेसेंट्स (anti-depressants) दवाओं से ज्यादा असरदार होती हैं.

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