नासोफिल्टर, जानिए इसके फायदे और नुकसान
स्वास्थ्य

स्वास्थ्य के लिए कितना सही है नसल फिल्टर या नासोफिल्टर, जानिए इसके फायदे और नुकसान

नासोफिल्टर, जानिए इसके फायदे और नुकसान

नसल फिल्टर (Nasal filter) नैनो-फाइबर तकनीक से लैस होते हैं जो आपके शरीर में प्रवेश करने वाले वायु प्रदूषकों को छानने का काम करते हैं…

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    October 20, 2020, 7:04 PM IST

देश में प्रदूषण (Pollution) का स्तर दिनों-दिन बढ़ता ही जा रहा है. ऐसे में निजी तौर पर इससे निपटने के लिए बाजारों में एयर प्यूरीफायर, मास्क और एंटी-पोल्यूशन फाउंडेशन के साथ नसल फिल्टर (Nasal Filter) की भी मांग बढ़ने लगी है. कोरोवायरस (Coronavirus) के मद्देनजर भी इन प्रोडक्ट्स की ज्यादा जरुरत महसूस की जा रही है. हालांकि, मास्क कोरोना से लड़ने में मददगार साबित हो रहा है लेकिन लोग खुलकर सांस लेने के लिए नसल फिल्टर का भी सहारा ले रहे हैं. आइए जानते हैं नसल फिल्टर स्वास्थ्य के लिहाज से कितना सही और गलत है?

विशेषताएं
नसल फिल्टर नैनो-फाइबर तकनीक से लैस होते हैं जो आपके शरीर में प्रवेश करने वाले वायु प्रदूषकों को छानने का काम करते हैं.
एन-95 मास्क या स्मॉग मास्क के मुकाबले नसल फिल्टर पहनने में आसान और अधिक उपयोगी है.नसल फिल्टर एक बार के लिए उपयोग होते हैं. इन्हें 12 घंटे तक उपयोग में लाया जा सकता है.
नासोफिल्टर नाक के बाहरी क्षेत्र में फिट किए जाते हैं जो 5 फीट की दूरी से नजर नहीं आते हैं.

नासोफिल्टर, फेस मास्क की तुलना में इसलिए बेहतर हैं इन्हें शादी जैसे कई शुभ अवसरों पर पहना जा सकता है.
बता दें कि ये नासोफिल्टर आपको वाहनों से निकलने वाले छोटे-छोटे कणों, कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों, कारखानों और अन्य वायु प्रदूषण स्रोतों से निकलने वाले हानिकारक कणों और धुंओं के प्रभावों से बचाता है.

फायदे
प्रदूषणयुक्त वातावरण में नासो फिल्टर स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद फिट बैठते हैं.
यह शरीर में हानिकारक वायु प्रदूषकों को जाने से रोकते हैं.

धूल, वायु प्रदूषण, धुंआ और बैक्टीरिया को सांस के जरिेए शरीर में जाने से रोकते हैं.
इसमें हवा का रिसाव नहीं होता है. इस लगाने से चश्मे पर भी फॉगिंग नहीं होती है.
फेस्क मास्क लगाने से गाल गर्म होने की शिकायत आती है, लेकिन नासोफिल्टर के मामले में ऐसा नहीं है.
बोलने या खाने जैसी नियमित गतिविधियों में बाधा नहीं बनते हैं.
एलर्जी, अस्थमा और अन्य श्वसन रोगों से पीड़ितों के लिए बेहद उपयोगी.
भीड़-भाड़ वाले इलाकों में रहने वालों लोगों को प्रदूषण से बचाने में कारगार.
सांस की बीमारी, हृदय की समस्याओं और फेफड़ों के कैंसर से बचाने में भी मददगार.

नुकसान
हालांकि नासोफिल्टर कई मायनों में हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक हैं लेकिन इसके कई छोटे-छोटे नुकसान भी हैं.
नसोफिल्टर छींकने के दौरान निकलकर गिर भी सकते हैं या फिर उन्हें छींकने के लिए बार-बार उतारना एक समस्या है.
जरूरी नहीं नासोफिल्टर हर किसी की नाक के आकार पर फिट बैठें, ऐसे में यह पहनने में अधिक ढीले और टाइट भी हो सकते हैं.
अत्यधिक जुकाम की स्थिति में नासोफिल्टर उपयोगी नहीं हैं. इस दौरान फेस्क मास्क ही बेहतर साबित होते हैं.
फेस-मास्क की तरह नासोफिल्टर भी निशान छोड़ते हैं जो बाद में एलर्जी का कारण बनते हैं.
फेस मास्क की तुलना में नासोफिल्टर अधिक महंगे और कम टिकाऊ.
नासोफिल्टर को लगाने के बाद नाक में अकड़ापन महसूस होता है.



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