स्कूल में दिनभर मास्क पहनना फायदेमंद है या नुकसानदेह, विशेषज्ञों से जानें
स्वास्थ्य

स्कूल में दिनभर मास्क पहनना फायदेमंद है या नुकसानदेह, विशेषज्ञों से जानें

नई दिल्ली. देश में कोरोना के मामले एक बार फिर बढ़ने लगे हैं. वहीं सबसे खास बात यह है क‍ि इस बार बच्‍चे भी कोरोना संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं. दो साल के बाद इस सत्र से स्‍कूल खुले हैं लेकिन दिल्‍ली-एनसीआर के कई स्‍कूलों में बच्‍चों के संक्रमित होने की खबरें आ रही हैं. यही वजह है कि अब यूपी के 7 जिलों के अलावा पूरी दिल्‍ली और हरियाणा के कई शहरों में मास्‍क को फिर से अनिवार्य कर दिया गया है. वहीं सभी राज्‍यों में स्‍कूलों में भी बच्‍चों के अलावा स्‍कूल के शिक्षकों और अन्‍य स्‍टाफ को पूरे समय मास्‍क पहनने के निर्देश दिए गए हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि स्‍कूल में बच्‍चे 5-6 घंटों तक लगातार मास्‍क पहनकर क्‍लास में कैसे पढ़ें? वहीं इतने ही लंबे समय तक मास्‍क पहनकर, कक्षा में बोल-बोल कर शिक्षक बच्‍चों को कैसे पढ़ाएं ? अब इस संबंध में शिकायतें डॉक्‍टरों के पास पहुंच रही हैं और लोग मास्‍क के फायदे के अलावा नुकसानों के बारे में पूछ रहे हैं.

लंबे समय तक रोजाना मास्‍क पहनने से क्‍या अन्‍य बीमारियां पैदा हो सकती हैं, इस सवाल पर दिल्‍ली स्थित वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्‍पताल के पल्‍मोनरी क्रिटिकल केयर मेडिसिन के हेड ऑफ द डिपार्टमेंट डॉ. नीरज कुमार गुप्‍ता कहते हैं क‍ि कोरोना के संक्रमण से बचाव के लिए मास्‍क बेहद जरूरी है. यह वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने का सबसे प्रभावी हथियार है. यही वजह है कि एक बार‍ फिर कोरोना के केसेज बढ़ने पर बड़ों सहित बच्‍चों के लिए भी मास्‍क को अनिवार्य कर दिया गया है. मास्‍क का सबसे बड़ा फायदा भी यही है क‍ि जिंदगी बची रहे.

मास्‍क का बच्‍चों पर ये हो सकता है असर
डॉ. गुप्‍ता कहते हैं हालांकि मास्‍क पहनने को लेकर लोगों की शिकायतें मिलती रहती हैं कि वे ज्‍यादा देर तक मास्‍क नहीं पहन पाते हैं, इससे उन्‍हें सांस लेने में परेशानी होती है. अब स्‍कूल खुलने के बाद छोटे बच्‍चों के मास्‍क पहनने और स्‍कूली शिक्षकों को दिनभर मास्‍क पहनने से परेशानी का सवाल है तो बच्‍चों के लिए मास्‍क पहनना काफी मुश्किल है. वे पूरे दिन मास्‍क पहनकर रखेंगे, इसको लेकर भी ठोस तरीके से कुछ नहीं कहा जा सकता. इसके अलावा खेलते वक्‍त, लंच ब्रेक में खाना खाते समय मास्‍क को उतारना ही पड़ेगा. अगर संक्रमण आना है तो वह इस अवधि में भी आ सकता है. वहीं बच्‍चों को मास्‍क से परेशानी होना संभव है. मसलन उन्‍हें सांस लेने में ज्‍यादा जोर लगाना पड़ सकता है. पसीने आ सकते हैं. मास्‍क को पूरे दिन पहनने से थकान ज्‍यादा महसूस हो सकती है. सांस को खींचने में दिक्‍कत हो सकती है. हालांकि न तो वैज्ञानिक रूप से ही कहा जा सकता है और न ही अभी तक ऐसा कोई मामला सामने आया है क‍ि मास्‍क पहनने से शरीर में ऑक्‍सीजन का स्‍तर घटा हो या कार्बन डाई ऑक्‍साइड का स्‍तर बढ़ गया हो.

शिक्षकों को ये हो सकती हैं दिक्‍कतें
डॉ. गुप्‍ता कहते हैं क‍ि जहां तक शिक्षकों के मास्‍क पहनकर पूरे दिन बोल-बोल कक्षाओं में पढ़ाने की बात है तो निश्चित ही उन्‍हें दिक्‍कत हो सकती है. दिनभर मास्‍क पहनना वैसे भी थोड़ा मुश्किल होता है, ऊपर से मास्‍क पहनकर बोला भी जाए तो स्‍वास्‍थ्‍य पर उसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ना ही है. उनकी बोलने की क्षमता पर असर पड़ सकता है. फेफड़ों पर ज्‍यादा जोर लगाना पड़ सकता है. उन्‍हें थकान हो सकती है, बेहोशी भी हो सकती है. हालांक‍ि इन कारणों को देखते हुए मास्‍क न पहनने की वकालात नहीं की जा सकती है क्‍योंक‍ि वायरस ज्‍यादा खतरनाक है. इससे बचने के लिए मास्‍क पहनना ही होगा.

फेफड़ों के रोगों से जूझ रहे बच्‍चों को हो सकती है समस्‍या
दिल्‍ली म्‍यूनिसिपल कॉर्पोरेशन में पूर्व एडिशनल एमएचओ यानि म्‍यूनिसिपल हेल्‍थ ऑफिसर और डेंगू, मलेरिया, कॉलेरा के नोडल अधिकारी रहे डॉ. सतपाल कहते हैं कि स्‍वास्‍थ्‍य के लिहाज से देखें तो बच्‍चों को मास्‍क पहनने के दो फायदे होंगे कि एक तो वे कोरोना वायरस के संक्रमण से बचेंगे और वायु प्रदूषण से भी बचेंगे. हालांकि लंबे समय तक मास्‍क पहनना बच्‍चों के लिए कठिनाई भरा है. अभी तो बच्‍चों को मास्‍क पहनने की आदत भी नहीं है. पिछले दो सालों से घरों में रह रहे बच्‍चे अब स्‍कूल जाने लगे हैं तो उन्‍हें मास्‍क पहनना है. स्‍कूल में बच्‍चे सिर्फ कक्षा में बैठते ही नहीं हैं, खेलते भी हैं, बोलते भी हैं, प्रार्थना भी करते हैं, खाना भी खाते हैं, ऐसे में हर वक्‍त मास्‍क का पहरा कितना सफल रह सकता है, कहना कठिन है. मास्‍क के कुछ नुकसान ये हो सकते हैं, जैसे बच्‍चों को सांस लेने में दिक्‍कतें हो सकती हैं और इसकी वजह से वे बार बार मास्‍क को हाथ लगाएंगे और उतारेंगे. बच्‍चों के खेलने-कूदने पर भी असर पड़ेगा. वे स्‍कूल में जाकर भी खुद को थका हुआ और जकड़ा हुआ महससू कर सकते हैं. जो बच्‍चे फेफड़े की समस्‍या से जूझ रहे हैं तो उनको लगातार मास्‍क पहनने से भी परेशानियां होने की संभावना है.

मास्‍क को लेकर ये अपना सकते हैं विकल्‍प
डॉ. गुप्‍ता कहते हैं क‍ि मास्‍क तो पहनना है, ऐसे में जरूरी है क‍ि जिन्‍हें ज्‍यादा देर तक मास्‍क पहनना है वे सर्जिकल मास्‍क पहनें. इसमें एन 95 मास्‍क के मुकाबले ज्‍यादा आराम रहता है. सांस भी आसानी से ली जा सकती है. वहीं कपड़े का थ्री प्‍लाई या थ्री लेयर मास्‍क भी वायरस से बचाव में कारगर है ऐसे में मुलायम कपड़े का मास्‍क भी पहना जा सकता है. मास्‍क का कपड़ा चुनते समय ध्‍यान रखें क‍ि वह आरामदायक हो. सूती या कॉटन का कपड़ा सबसे बेहतर हो सकता है. चूंकि बाजार में स्‍टेंडर्ड साइज में मास्‍क उपलब्‍ध हैं और बच्‍चों के लिए सर्जिकल या अन्‍य किसी प्रकार के मास्‍क उपलब्‍ध नहीं हैं लिहाजा उन्‍हें कपड़े का ही मास्‍क पहनना होगा. ऐसे में ब्रीदिंग के आराम के लिए बच्‍चों को एकदम सादा बिना लेयर का मास्‍क भी न पहनाएं क‍ि उसका कोई फायदा ही न मिले. बच्‍चों को आरामदायक कपड़े का मास्‍क दें.

क्‍लासरूप में अगर बच्‍चे मास्‍क पहन रहे हैं और शिक्षक को बोलना है लेकिन मास्‍क से दिक्‍कत हो रही है तो फेस शील्‍ड का भी उपयोग कर सकते हैं, हालांकि मास्‍क के साथ फेसशील्‍ड ज्‍यादा उपयोगी है. इसके साथ ही सोशल डिस्‍टेंसिंग का ध्‍यान रखना जरूरी है. कम से कम 6 गज की दूरी का ध्‍यान रखें, ताकि संक्रमण से बचाव किया जा सके.

Tags: Corona Mask, Face mask, Mask, N95 Mask

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