उम्र से पहले ही अगर त्वचा पर बुढ़ापे के निशान दिखने लगें तो इसके लिए वायु प्रदूषण भी काफी हद तक जिम्मेदार माना जाता है.
स्वास्थ्य

स्किन को गंभीर नुकसान पहुंचाता है प्रदूषण, त्वचा को बचाने के लिए करें ये उपाय

जब भी हम वायु प्रदूषण (Air Pollution) के सेहत पर पड़ने वाले असर की बात करते हैं तो हम रेस्पिरेटरी सिस्टम यानी श्वसन तंत्र को होने वाले नुकसान, लंग्स, हार्ट और बाकी के अंदरूनी अंगों और तंत्रों पर होने वाले नुकसान की ही बात करते हैं. लेकिन हमारे शरीर का जो सबसे अहम और पहला सुरक्षात्मक कवच है- हमारी त्वचा (Skin) उस पर पॉल्यूशन का क्या असर होता है, इस बारे में कम ही बात की जाती है. बीते कुछ सालों में वायु प्रदूषण जिस तेजी से बढ़ा है उसका हमारी त्वचा पर भी गंभीर असर देखने को मिल रहा है. प्रदूषित हवा न सिर्फ हमारी त्वचा से नमी खींचकर उसे ड्राई बना देती है बल्कि त्वचा में जलन, लालिमा, एक्जिमा जैसी समस्याओं का भी कारण बनती है.

डॉक्टरों की मानें तो लंबे समय तक सूरज की हानिकारक यूवी किरणों के साथ ही प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने की वजह स्किन पर भी बुरा असर पड़ता है. त्वचा पर उम्र से पहले ही बारीक रेखाएं और झुर्रियां पड़ने लगती हैं, स्किन लाल हो जाती है, मुंहासे बढ़ने लगते हैं, त्वचा पर दाने या छाले जैसी समस्याएं होने लगती हैं. इसके अलावा प्रदूषित हवा में मौजूद प्रदूषण के कण जैसे ओजोन, नाइट्रोन ऑक्साइड, पार्टिक्यूलेट मैटर आदि की वजह से स्किन एलर्जी, डार्क स्पॉट्स्, एटोपिक डर्मेटाइटिस, सोरायसिस और गंभीर मामलों में स्किन कैंसर होने का भी खतरा रहता है.

प्रदूषण के कारण हो सकती हैं स्किन से जुड़ी ये 4 समस्याएं :1. उम्र से पहले बूढ़ा होना (प्रीमैच्योर एजिंग)
उम्र से पहले ही अगर त्वचा पर बुढ़ापे के निशान दिखने लगें तो इसके लिए वायु प्रदूषण भी काफी हद तक जिम्मेदार माना जाता है. साल 2010 में हुई रिसर्च में बताया गया था कि ट्रैफिक से संबंधित वायु प्रदूषण हवा में जो पार्टिक्यूलेट मैटर को बढ़ाते हैं उसकी वजह से माथे और गाले पर पिग्मेंट स्पॉट्स में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है. तो वहीं, साल 2017 में एक फॉलोअप स्टडी की गई जिसमें पीएस 2.5 बारीक कणों का स्किन एजिंग पर क्या असर होता है यह जानने की कोशिश की गई. नतीजों से पता चला कि सिर्फ बाहर ही नहीं बल्कि घर के अंदर भी अगर पीएम 2.5 का लेवल अधिक हो तो इससे स्किन पर पिग्मेंट स्पॉट्स और झुर्रियां बढ़ सकती हैं.

2. त्वचा में जलन और इन्फ्लेमेशन
अगर आपको पहले से स्किन से जुड़ी कोई समस्या नहीं है, तब भी प्रदूषित हवा में मौजूद प्रदूषण के कणों की वजह से आपको स्किन में किसी न किसी तरह की समस्या जरूर दिखेगी. जिस तरह स्किन पर धूल और गंदगी के कण जमा हो जाते हैं जिन्हें हटाने के लिए हम फेसवॉश करते हैं, ठीक उसी तरह से प्रदूषित हवा में मौजूद बारीक कण भी स्किन पर जमा हो जाते हैं जो आंखों से दिखाई नहीं देते. इन बारीक कणों की वजह से त्वचा में जलन, मुंहासे और इन्फ्लेमेशन (आंतरिक सूजन और जलन) जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इतना ही नहीं, वायु प्रदूषण की वजह से स्किन की ड्राइनेस, ह्यूमिडिटी, सूरज की रोशनी, यूवी रेडिएशन और रोगाणुों से लड़ने की क्षमता भी कम हो जाती है.

3. एक्जिमा की समस्या
एक्जिमा, त्वचा से जुड़ी एक ऐसी स्थिति है जिसमें स्किन पर लाल चकत्ते हो जाते हैं और खुजली होने लगती है और रिसर्च में यह बात साबित भी हो चुकी है कि वायु प्रदूषण जैसे वातावरण से जुड़े कारणों की वजह से एक्जिमा की समस्या ट्रिगर हो सकती है और बढ़ भी सकती है. इस बारे में अब तक कई अध्ययन हो चुके हैं जिसमें हवा में मौजूद प्रदूषक (पॉल्यूटेंट्स) और एक्जिमा के बीच संबंध देखने को मिला है. एक स्टडी में हवा में मौजूद प्रदूषण के कण जैसे- बेंजेन, पीएम 10, नाइट्रोजन ऑक्साइड के कम्पाउंड्स के संपर्क में आने की वजह से एक्जिमा के लक्षणों में बढ़ोतरी होने की बात भी सामने आयी थी.

4. प्रदूषण के कारण सोरायसिस
साइंटिफिक रिपोर्ट्स नाम के जर्नल में 2017 में प्रकाशित एक रिव्यू की मानें तो प्रदूषित हवा में मौजूद कैडमियम एक ऐसा प्रदूषक है जिसकी वजह से स्किन से जुड़ी बीमारी सोरायसिस होने का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा आईसीएमआर की रिव्यू स्टडी में भी त्वचा को नुकसान पहुंचाने में वायु प्रदूषकों की भूमिका की जांच की गई थी. इसमें पाया गया कि हवा में मौजूद प्रदूषण के कण जैसे- कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड आदि इन्फ्लेमेटरी डिजीज जैसे- सोरायसिस का खतरा बढ़ाते हैं.

हानिकारक प्रदूषण से ऐसे करें स्किन का बचाव
अब जब प्रदूषित हवा की वजह से स्किन को होने वाले नुकसान के बारे में आपने जान लिया तो ये भी जान लीजिए कि त्वचा को वायु प्रदूषण के नुकसान से बचाने के लिए आप अपनी तरफ से क्या कदम उठा सकते हैं.

  • शरीर में पानी की कमी न होने दें : दिनभर में जितना हो सके उतना पानी पिएं क्योंकि पानी शरीर में मौजूद गंदगी और विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है. आप चाहें तो पानी में आंवला या तुलसी डालकर डीटॉक्स वॉटर भी तैयार कर सकते हैं जो शरीर को अंदर से साफ और डीटॉक्स करने के साथ ही जरूरी एंटीऑक्सिडेंट्स भी देने का काम करेगा.
  • लेयर्स में करें स्किन की सुरक्षा : त्वचा, शरीर को सुरक्षित रखने का काम करती है, लिहाजा त्वचा को सुरक्षित रखने के लिए आप सीरम, मॉइश्चराइजर और फिर सनस्क्रीन- इस तरह के अलग-अलग सुरक्षात्मक लेयर बनाएं. ऐसा करने से हानिकारक यूवी किरणें और वायु प्रदूषण से त्वचा की रक्षा होगी और प्रदूषित हवा में मौजूद हानिकारक केमिकल्स शरीर के अंदर प्रवेश नहीं कर पाएंगे. इसके अलावा रोजाना अच्छी तरह से फेसवॉश करें ताकि चेहरे पर मौजूद धूल-गंदगी और प्रदूषकों को साफ करने में मदद मिल सके.
  • स्किन को करें स्क्रब : स्क्रबिंग का मतलब ये नहीं कि आप घंटों स्किन को रगड़ते या घिसते रहें. रोजाना सिर्फ 10 सेकंड स्किन को अच्छी तरह से स्क्रब करें ताकि स्किन में जमा डेड स्किन सेल्स, इन्फ्लेमेशन और केमिकल्स की लेयर जो प्रदूषण की वजह से जमा हो जाती है उसे दूर करने में मदद मिल सके. इसके लिए आप चाहें तो अखरोट को पीसकर उसमें चीनी और ऑलिव ऑयल की कुछ बूंदें मिलाकर घर में ही स्क्रब तैयार कर लें और रोजाना इससे स्किन की सफाई करें.
  • स्किन को करें मॉइश्चराइज : आपने अपनी त्वचा को स्क्रब कर लिया, वॉश कर लिया, तो अब बारी है स्किन में मॉइश्चर के लेवल को बैलेंस करने की और इसके लिए आप चाहें तो अपनी स्किन टाइप के हिसाब से मॉइश्चराइजर और सीरम का इस्तेमाल कर सकती हैं. सीरम और मॉइश्चराइजिंग क्रीम, जेल या लोशन एक दूसरे को अच्छी तरह से कॉम्प्लिमेंट करते हैं और स्किन के सुरक्षात्मक बैरियर को वापस लाने में मदद करते हैं.अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल प्रदूषण से त्वचा को सुरक्षित रखने के आसान तरीके पढ़ें. न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है. myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.



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