Health news gene mutation main cause of lung cancer in non smoker lak
स्वास्थ्य

सिर्फ बच्‍चों की बीमारी नहीं निमोनिया, डायबिटीज और ट्रासप्‍लांट मरीजों में बढ़ रहा खतरा – News18 हिंदी

नई दिल्‍ली. सर्दियां शुरू हो गई हैं. यह ऐसा मौसम है जिसमें न तो सर्दी और न ही गर्मी का पता चलता है. बदलते मौसम में कई बीमारियां अपना प्रकोप दिखाती हैं लेकिन निमोनिया इनमें से प्रमुख है. खासतौर पर फेफड़ों (Lungs) को प्रभावित करने वाले इस रोग से भारत के ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में हर साल हजारों बच्‍चों और बड़ों की मृत्‍यु होती है. 2018 में निमोनिया (Pneumonia) से देश में हर घंटे पर एक बच्‍चे की मौत रिकॉर्ड की गई थी. वहीं 2017 में इससे 14 फीसदी बच्‍चों की मौत हो गई थी. हालांकि विशेषज्ञों की मानें तो निमोनिया सिर्फ बच्‍चों की बीमारी नहीं है. इससे एक स्‍वस्‍थ जवान शरीर भी महज कुछ दिनों में खत्‍म हो सकता है.

इंडियन चेस्‍ट सोसायटी के सदस्‍य और लखनऊ के जाने माने पल्‍मोनोलॉजिस्‍ट व एलर्जिस्‍ट डॉ. ए के सिंह कहते हैं कि कोरोना के बाद से फंगल निमोनिया के मरीज देश में तेजी से बढ़े हैं. इस निमोनिया में फेफड़ों में इन्‍फेक्‍शन (Infection in Lungs) होता है जो एक्‍सरे में साफ-साफ दिखाई देता है. निमोनिया अपने आप में खतरनाक बीमारी है लेकिन चूंकि बच्‍चों और ज्‍यादा वृद्धों में यह बहुत गंभीर हो जाता है, इसी वजह से लोग आमतौर पर सोचते हैं कि यह बच्‍चों में होने वाली बीमारी है. जबकि यह जवान व्‍यक्ति को भी अपना शिकार बना सकता है. बहुत सारे मौतों के मामलों में देखा गया है कि 4-5 दिनों के अंदर गंभीर निमोनिया जान भी ले लेता है. ज्‍यादातर मामलों में देखा गया है कि निमोनिया के साथ एक बीमारी होती है सेप्सिस. सेप्सिस के साथ यह खतरनाक हो जाता है. इसमें निमोनिया फेफड़ों से होकर खून में पहुंच जाता है और मरीज को बहुत गंभीर तरीके से प्रभावित करता है.

इन बीमारियों के मरीजों में बढ़ा निमोनिया होने का खतरा
डॉ. सिंह कहते हैं कि निमोनिया तो सभी को हो सकता है लेकिन अब देखा जा रहा है कि जिन लोगों को डायबिटीज है, उनको निमोनिया तेजी से पकड़ रहा है. कोविड (Covid) के बाद बहुत सारे मरीजों में निमोनिया देखा जा रहा है. वायरल संक्रमण (Viral Infection) होने के बाद भी निमोनिया तेजी से चपेट में लेता है. अब देखा जा रहा है कि किडनी (Kidney Transplant) और लिवर ट्रांसप्‍लांट (Liver Transplant) वाले मरीजों में निमोनिया बहुत ज्‍यादा हो रहा है. पहले ट्रांसप्‍लांट भी कम होते थे, अब उनकी संख्‍या काफी बढ़ चुकी है और यही वजह है कि निमोनिया के मरीज बढ़ते जा रहे हैं. जिन मरीजों को बैकग्राउंड में फेफड़ों संबंधी बीमारियां जैसे आईएलडी, सीओपीडी (COPD) आदि होती हैं, उनमें भी निमोनिया होने का खतरा होता है.

जो लोग लंबे समय से स्‍टेरॉयड पर हैं या इम्‍यूनो सप्रेस्‍ड होते हैं, उनको भी निमोनिया जल्‍दी जकड़ रहा है. जीवनरक्षक दवाओं पर चल रहे लोगों को भी निमोनिया जल्‍दी पकड़ता है. एक बार अगर निमोनिया हो जाता है तो अस्‍पताल में भर्ती 5 से 10 फीसदी लोगों की मौत हो सकती है. अगर यही मरीज इतने बीमार हैं कि उन्‍हें आईसीयू (ICU) में रखना पड़ रहा है तो मृत्‍यु दर 30 फीसदी तक हो जाती है. इस बीमारी के लिए इम्‍यून फंक्‍शन जिम्‍मेदार है.

इन पांच बातों का ध्‍यान रखें लोग

. डॉ. सिंह कहते हैं कि निमोनिया हवा के द्वारा पैदा होने वाली बीमारी है और सीधे फेफड़ो पर हमला करती है. लिहाजा जरूरी है कि जब भी ठंड के मौसम में बाहर निकलें तो सावधानी से निकलें. फिर चाहे उस वक्‍त मौसम कुछ गर्म ही क्‍यों न हो. सितंबर से नवंबर तक कभी गर्मी कभी ठंड की वजह से लोग लापरवाही करते हैं और निमोनिया की चपेट में आ जाते हैं.

. अगर व्‍यक्ति को खांसी के साथ पीले रंग का बलगम आ रहा है. साथ ही तेज बुखार (Fever) आ रहा है और लंबी सांस लेने में व्‍यक्ति को काफी दर्द महसूस होता है तो निमोनिया है. यह दर्द सीने के एक तरफ भी हो सकता है और दोनों तरफ भी. हालांकि इन तीन लक्षणों में से अगर कोई भी दो लक्षण कॉमन हैं तो ऐसी स्थिति में व्‍यक्ति को डॉक्‍टर के पास जाकर जांच कराने की जरूरत है. कभी-कभी देखा गया है कि तेज बुखार नहीं होता लेकिन बाकी के दो लक्षण होते हैं तो भी निमोनिया होता है.

.बदलते मौसम में सेहत का बेहद ख्‍याल रखें. खासतौर पर किडनी या लिवर ट्रांसप्‍लांट और डायबिटीज वाले मरीज. खान-पान का ध्‍यान रखने के साथ ही बाहर निकलते वक्‍त सावधान रहें. सांस लेने में हो रही परेशानी को नजरअंदाज न करें.

. निमोनिया में लोग घरेलू उपचार भी करते हैं लेकिन दो दिन के बाद अगर बीमारी कम होने के बजाय बढ़ रही है तो बिना देर किए इलाज लें. इसमें फेफड़ो में संक्रमण बहुत तेजी से फैलता है और यह मौत तक ले जाता है.

.यह सबसे अहम बात है कि निमोनिया बड़ों को भी होता है और कोविड के बाद यह युवाओं से लेकर जवानों तक में होता है. ऐसे में लोग किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें. डायबिटीज को कंट्रोल करें. हाईजीन के साथ मरीज को आइसोलेट करें. मास्‍क पहनें. खानपान से इम्‍यूनिटी को मजबूत रखें. निमोनिया को लेकर वैक्‍सीन उपलब्‍ध हैं ऐसे में लोग वैक्‍सीन लगवाकर भी बचाव कर सकते हैं. चूंकि यह कोविड की तरह जरूरी नहीं की गई हैं इसलिए लोग इन्‍हें नहीं लगवाते हैं लेकिन पहले से बीमारियों की चपेट में रहने वाले लोग इन वैक्‍सीन का इस्‍तेमाल जरूर करें.

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published.