मेनोपॉज के बाद महिलाओं को कई तरह की शारीरिक परेशानियां होने लगती हैं.
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समय से पहले मेनोपॉज बढ़ाता है टाइप-2 डायबिटीज का खतरा, इन बातों का रखें ख्याल

मेनोपॉज के बाद महिलाओं को कई तरह की शारीरिक परेशानियां होने लगती हैं.

मेनोपॉज (Menopause) से महिलाओं में टाइप 2 मधुमेह (Type 2 Diabetes) शुरू हो जाता है. मासिक धर्म और मेनोपॉज में बहुत अंतर होता है. मेनोपॉज की अवस्था में महिलाएं शारीरिक तौर पर कई समस्याओं (Physical Problems) का शिकार हो जाती हैं.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    November 17, 2020, 2:07 PM IST

मेनोपॉज (Menopause) वो समय है जब आपके एस्ट्रोजन (Estrogen) का स्तर गिरने लगता है और आपका अंडाशय (Ovary) अंडे का उत्पादन करना बंद कर देते हैं. आपकी मासिक धर्म (Menstruation) की अवधि समाप्त हो जाती है. मासिक धर्म और मेनोपॉज में बहुत अंतर होता है. मेनोपॉज की अवस्था में महिलाएं शारीरिक तौर पर कई समस्याओं का शिकार हो जाती हैं. आमतौर पर 45 साल की उम्र की महिलाओं में यह समस्या आती है. 40 साल की उम्र में मेनोपॉज से महिलाओं में टाइप 2 मधुमेह (Type 2 Diabetes) आमतौर पर शुरू हो जाता है.

चार गुना अधिक होता है खतरा
यह अंदरूनी परिवर्तन महिलाओं की मनोदशा में बदलाव और योनि में सूखापन जैसे लक्षण का भी कारण बनता है. कई शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि समयपूर्व मेनोपॉज और टाइप-2 मधुमेह में अंतःपरस्पर संबंध हैं. चिकित्सा विज्ञान अभी भी समय पूर्व मेनोपॉज और टाइप-2 मधुमेह के बीच एक सीधा प्रभाव संबंध स्थापित करने के लिए सबूत की तलाश कर रहा है. एक डच अध्ययन के अनुसार सामान्य मेनोपॉज वाली महिलाओं की तुलना में समयपूर्व मेनोपॉज वाली महिलाओं में मधुमेह टाइप-2 का खतरा चार गुना अधिक होता है. दूसरी ओर यदि किसी महिला को पहले से ही टाइप 2 मधुमेह है, तो वह समय से पहले मेनोपॉज का अनुभव कर सकती है.

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-मेनोपॉज के दौरान महिलाओं को कुछ शारीरिक परिवर्तन महसूस होते हैं. एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर में भिन्नता इंसुलिन की मात्रा पर प्रभाव डालती है.
-इस स्थिति में हॉर्मोन का स्तर असंतुलित होने के कारण अग्न्याशय शरीर में इंसुलिन की पर्याप्त मात्रा उत्पादित नहीं कर पाता है. इससे शरीर में मौजूद कोशिकाओं में ग्लूकोज की मात्रा भी घट जाती है. इसलिए शरीर में रक्त शर्करा का स्तर बढ़ता है.

-इंसुलिन वसा को मिटाने में सहायक होता है जो शरीर को सक्रिय करने में मदद करता है. अनियंत्रित उच्च रक्त शर्करा मधुमेह जटिलताओं को जन्म दे सकता है.
-आपकी कोशिकाएं आपके द्वारा उत्पादित इंसुलिन के लिए भी प्रतिक्रिया नहीं देती हैं.
-आपका पाचन सिस्टम धीमा हो जाता है और आप कैलोरी को कुशलता से नहीं घटा पाते हैं, जिससे वजन बढ़ने लगता है.

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इन बातों का जरूर रखें ख्याल
-समयपूर्व मेनोपॉज से बचने के लिए जरूरी है कि आप समय-समय पर अपने खून की जांच करवाते रहें.
-मधुमेह की दवाइयों को समायोजित करें, इस स्थिति में अन्य दवाइयों के सेवन से पहले डॉक्टर से सलाह लेना न भूलें.
-थाली में पौष्टिक भोजन की मात्रा बढ़ाएं, मेनोपॉज में शरीर का वजन सामान्य से ज्यादा बढ़ता है, इसलिए अधिक वसायुक्त भोजन से दूर रहें.
-हरी सब्जियां, साबुत अनाज, प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ का सेवन करें. रोजाना 30 मिनट तक व्यायाम भी करें.
-टाइप-2 मधुमेह ग्रस्त महिलाओं में हृदय संबंधी कई बीमारियां होती हैं. ऐसे में समय पूर्व मेनोपॉज दिल के रोगों का खतरा अधिक बढ़ा देता है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)



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