अपने प्रीमैच्योर बच्चे को जन्म के बाद शुरुआती कुछ हफ्तों तक घर से बाहर बिलकुल न लेकर जाएं, सिवाय डॉक्टर के पास नियमित चेकअप के लिए.
स्वास्थ्य

समय से पहले जन्मे बच्चों की ऐसे करें देखभाल

अपने प्रीमैच्योर बच्चे को जन्म के बाद शुरुआती कुछ हफ्तों तक घर से बाहर बिलकुल न लेकर जाएं, सिवाय डॉक्टर के पास नियमित चेकअप के लिए.

आमतौर पर 40 हफ्ते की प्रेगनेंसी (Pregnancy) को सामान्य माना जाता है, ऐसे में अगर कोई बच्चा गर्भावस्था के 37वें हफ्ते से पहले पैदा हो जाता है तो उसे प्रीमैच्योर (Premature) कहा जाता है.



  • Last Updated:
    November 17, 2020, 12:50 PM IST

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)की मानें तों दुनियाभर में हर साल करीब डेढ़ करोड़ (15 मिलियन) बच्चे प्रीमैच्योर यानी समय से पहले पैदा हो जाते हैं जिसका मतलब है कि वैश्विक स्तर पर हर 10 में से 1 बच्चा प्रीमैच्योर (Premature) होता है. समय से पहले जन्म लेने वाले इन प्रीमैच्योर बच्चों (Premature Child) की देखभाल के प्रति लोगों में जागरुकता पैदा करने के मकसद से ही हर साल 17 नवंबर को वर्ल्ड प्रीमैच्योरिटी डे सेलिब्रेट किया जाता है जिसकी शुरुआत साल 2009 में हुई थी. इस साल प्रीमैच्योरिटी डे की थीम है- जल्दी जन्म लेने वाले बच्चों के भविष्य की देखभाल के लिए एकसाथ आना, एकजुट होना.

37वें हफ्ते से पहले जन्म लेने वाले बच्चे प्रीमैच्योर कहलाते हैं
आमतौर पर 40 हफ्ते की प्रेगनेंसी को सामान्य माना जाता है, ऐसे में अगर कोई बच्चा गर्भावस्था के 37वें हफ्ते से पहले पैदा हो जाता है तो उसे प्रीमैच्योर कहा जाता है. वैसे तो हर माता-पिता यही चाहते हैं कि उनका बच्चा पूरी तरह से सुरक्षित रहे और स्वस्थ पैदा हो लेकिन कई बार प्रेगनेंसी के दौरान हाइपरटेंशन, डायबिटीज, गर्भावस्था में सही खानपान न होना, इंफेक्शन या फिर प्रसवपूर्व गर्भवती महिला की सही देखभाल न होने की वजह से बच्चा, समय से पहले ही यानी प्रीमैच्योर पैदा हो जाता है.प्रीमैच्योर बच्चों को NICU में भर्ती करने की जरूरत पड़ती है

समय से पहले पैदा होने वाले बच्चों का जन्म के समय न सिर्फ वजन कम होता है बल्कि उनके शरीर के कई अंग भी पूरी तरह से विकसित नहीं हुए होते हैं जिसमें ब्रेन और लंग्स जैसे अहम अंग शामिल हैं. लिहाजा प्रीमैच्योर बच्चों को सामान्य नवजात शिशुओं की तुलना में एक्सट्रा केयर की जरूरत होती है. सामान्य बच्चे जहां 1-2 दिन या 1 हफ्ते में अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर आ जाते हैं, वहीं प्रीमैच्योर बच्चों को कई हफ्तों या कई बार महीने भर से ज्यादा समय तक अस्पताल के नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (nicu) में रखने की जरूरत पड़ती है ताकि उनके कम विकसित अंगों को पर्याप्त सपोर्ट मिल पाए. चूंकि शिशु का जन्म प्रेगनेंसी के फुल टर्म से पहले ही हो गया है इसलिए प्रीमैच्योर बच्चों को न सिर्फ जन्म के शुरुआती दिनों में बल्कि जीवनभर किसी न किसी तरह के इंफेक्शन और बीमारियों का जोखिम बना रहता है, लिहाजा उन्हें हर वक्त एक्सट्रा केयर की जरूरत होती है.

प्रीमैच्योर बच्चों में होने वाली सामान्य बीमारियां
श्वसन संबंधी बीमारी :
समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों के फेफड़े पूरी तरह से विकसित नहीं होते हैं इसलिए जन्म के तुरंत बाद उन्हें रेस्पिरेटरी सपोर्ट की जरूरत होती है. कुछ बच्चों में तो फेफड़ों में होने वाली क्रॉनिक बीमारी ब्रॉन्कोपल्मोनरी डिसप्लासिया (बीपीडी) होने का भी जोखिम बढ़ जाता है और इन बच्चं को डिस्चार्ज होने के बाद भी दवा और सप्लिमेंटल ऑक्सीजन की जरूरत होती है. इसके अलावा प्रीमैच्योर बच्चों में स्लीप एपनिया की भी समस्या हो सकती है.

इंफेक्शन : फुल टर्म बच्चे की तुलना में प्रीमैच्योर बच्चे का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है और चूंकि उन्हें जन्म के तुरंत बाद स्तनपान के जरिए मां का दूध नहीं मिल पाता, इस वजह से भी उन्हें इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है खासकर वायरल इंफेक्शन. लिहाजा इंफेक्शन से बचने के लिए बेहद जरूरी है कि प्रीमैच्योर बच्चे के टीकाकरण शेड्यूल को फॉलो किया जाए.

प्रीमैच्योर बच्चे के लिए होमकेयर
जब NICU से डिस्चार्ज होकर प्रीमैच्योर बच्चा घर आ जाता है तो आपको हर वक्त सतर्क रहने की जरूरत होती है ताकि बच्चे को दोबारा अस्पताल में भर्ती करने की नौबत न आए. यह आसान काम नहीं है और दोनों पार्टनर को मिलकर बच्चे की बेहतर केयर करने की जरूरत होती है. लिहाजा हम आपको उन जरूरी होमकेयर टिप्स के बारे में बता रहे हैं जिसे आपको अपने समय से पहले जन्मे बच्चे की देखभाल के दौरान अपनाना चाहिए :

  • अपने प्रीमैच्योर बच्चे को जन्म के बाद शुरुआती कुछ हफ्तों तक घर से बाहर बिलकुल न लेकर जाएं, सिवाय डॉक्टर के पास नियमित चेकअप के लिए.
  • जहां तक संभव हो जब तक बच्चा 6 महीने का न हो जाए उसे पब्लिक प्लेस पर या भीड़भाड़ वाली जगहों पर न लेकर जाएं और अनजान लोगों से भी दूर ही रखें.
  • खासकर सर्दी के मौसम में वायरल इंफेक्शन होने का खतरा अधिक होता है लिहाजा, प्रीमैच्योर बच्चों को इंफेक्शन से बचाने के लिए जहां तक संभव हो उन्हें घर के अंदर ही रखें. घर में मेहमानों की आवाजाही भी कम से कम ही रखें, अगर कोई व्यक्ति बीमार हो तो उसे बच्चे के कमरे में जाने से मना करें. प्रीमैच्योर बच्चे को छूने से पहले अपने हाथों को साबुन-पानी से या फिर हैंड सैनिटाइजर से अच्छी तरह से साफ करें.
  • जिस घर में प्रीमैच्योर बच्चा हो उस घर में किसी को धूम्रपान भी नहीं करना चाहिए.
  • सुनिश्चित करें कि आपका घर और बच्चे का कमरा पूरी तरह से कंफर्टेबल हो और रूम का तापमान सामान्य हो. डॉक्टर से बात करें कि आपके बच्चे के लिए सही तापमान क्या है और कितना होना चाहिए.
  • प्रीमैच्योर बच्चों की त्वचा भी बेहद संवेदनशील होती है, लिहाजा बच्चे को नहलाने से पहले डॉक्टर से जरूर पूछ लें कि बच्चे को कितनी बार और कब नहलाना है.
  • प्रीमैच्योर बच्चे को पीठ के बल ही सुलाना चाहिए ताकि आकस्मिक नवजात मृत्यु सिंड्रोम के खतरे को कम किया जा सके.

प्रीमैच्योर बच्चे के लिए कंगारू केयर
कंगारू मदर केयर एक खास तरह का तरीका है जिसमें प्रीमैच्योर बच्चे या फिर वे बच्चे जिनका जन्म के समय वजन कम होता है उन्हें यह केयर दी जाती है ताकि उनके शरीर का तापमान बना रहे, ब्रेस्टफीडिंग में होने वाली समस्याओं को रोका जा सके और इंफेक्शन से भी बचाया जा सके. कई स्टडीज में यह बात साबित भी हो चुकी है कि कंगारू मदर केयर के जरिए समय से पहले जन्मे बच्चों को कई फायदा हो सकता है. WHO की मानें तो कंगारू मदर केयर के जरिए हर साल पैदा होने वाले करीब 4 लाख 50 हजार नवजात शिशुओं की जान बचायी जा सकती है.

कंगारू केयर में मां और शिशु के बीच स्किन टू स्किन संपर्क रखा जाता है जिससे शिशु के शरीर के तापमान को बनाए रखने में मदद मिलती है. साथ ही कंगारू केयर से मां का दूध भी बढ़ता है, प्रीमैच्योर शिशु को गहरी नींद आती है और उसका वजन भी बढ़ने लगता है.अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल प्रीमैच्योर बच्चे की ऐसे करें देखभाल पढ़ें. न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है. myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.

अस्वीकरण : इस लेख में दी गयी जानकारी कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों और उनके संभावित उपचार के संबंध में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी योग्य और लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवा, जांच, निदान और इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आप, आपका बच्चा या कोई करीबी ऐसी किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है, जिसके बारे में यहां बताया गया है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। यहां पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के ना करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको होने वाले किसी भी तरह से संभावित नुकसान के लिए ना तो myUpchar और ना ही News18 जिम्मेदार होगा।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *