विश्व गर्भनिरोधक दिवस 2020: गर्भनिरोधक के इस्तेमाल से जुड़े 7 मिथक जिनकी सच्चाई जानना है जरूरी
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विश्व गर्भनिरोधक दिवस 2020: गर्भनिरोधक के इस्तेमाल से जुड़े 7 मिथक जिनकी सच्चाई जानना है जरूरी | health – News in Hindi

हर साल 26 सितंबर को विश्व गर्भनिरोधक दिवस मनाया जाता है और इसकी शुरुआत पहली बार साल 2007 में हुई थी. विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO समेत कई अंतरराष्ट्रीय, सरकारी और गैर-सरकारी संगठन, गर्भनिरोधक, परिवार नियोजन और महिलाओं की सेहत के बारे में लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए विश्व गर्भनिरोधक दिवस को मनाते हैं. इस वार्षिक जागरूकता अभियान का उद्देश्य महिलाओं को बेहतर प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े विकल्प चुनने के लिए सक्षम और सशक्त बनाना है.

अब तो दुनिया भर में कई तरह के गर्भनिरोध के तरीके उपलब्ध हैं- जिनमें कंडोम, मौखिक गर्भनिरोधक गोलियां, अंतर्गर्भाशयी उपकरण या आईयूडी और इंजेक्शन के जरिए दिए जाने वाले गर्भनिरोधक शामिल हैं. इतना ही नहीं, वैज्ञानिक तो अब एक महीने में एक बार ली जाने वाली मौखिक गर्भनिरोधक गोली का भी विकास करने में जुटे हैं जो महिलाओं के स्वास्थ्य में बड़ा बदलाव ला सकती है.

इतना सब होने के बावजूद, अब भी यौन स्वास्थ्य, प्रजनन स्वास्थ्य और गर्भनिरोधक के उपयोग को लेकर लोगों के बीच जानकारी की कमी है और साथ ही इससे जुड़े स्टिगमा के कारण भी लोग इन मुद्दों पर चर्चा नहीं करना चाहते. इसकी वजह से लोगों के मन में गर्भनिरोधक को लेकर कई तरह के मिथक पैदा होते हैं, जिस कारण महिलाएं गर्भनिरोधक के इन उपायों का इस्तेमाल नहीं कर पाती हैं. हम आपको दुनियाभर में फैले गर्भनिरोधक के इस्तेमाल से जुड़े कुछ ऐसे ही मिथकों के बारे में बता रहे हैं जिनकी हकीकत को सामने लाना जरूरी है ताकि महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सके.मिथक1: गर्भनिरोधक के बारे में जानने या उपयोग करने के लिए आपका सेक्शुअली सक्रिय होना आवश्यक है
हकीकत: सेक्शुअली ऐक्टिव होने से पहले ही गर्भनिरोधकों के बारे में अच्छी तरह से जानना आपकी खुद की सुरक्षा के साथ ही आपके (वर्तमान या भविष्य) साथी की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है. गर्भनिरोधक का उपयोग कैसे करना है इस बारे में जानकारी हासिल करने में आपको किसी तरह की शर्म महसूस नहीं होनी चाहिए. वास्तव में, गर्भनिरोधक के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए किसी अविश्वसनीय या अव्यवहारिक सूत्रों पर निर्भर रहने की बजाय, आपको किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिक्षक, माता-पिता या जिस व्यक्ति पर आप भरोसा करते हों, उनसे बात करनी चाहिए.

साथ ही, प्रेगनेंसी से बचने के लिए अलावा भी गर्भनिरोधक से जुड़ी कई और बातें हैं. यौन संचारित संक्रमणों (एसटीआई) और यूरिन इंफेक्शन (यूटीआई) से बचने के लिए कॉन्डम जैसे गर्भनिरोधकों का उपयोग आवश्यक है क्योंकि इस तरह की बीमारियों का खतरा महिलाओं को अधिक होता है. इसके अलावा पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस), गर्भाशय फाइब्रॉयड्स और एंडोमेट्रियोसिस जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए भी बहुत सी महिलाओं को मौखिक गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करने की सलाह दी जाती है.

मिथक2: इंजेक्शन या गोली वाले गर्भनिरोधकों का लंबे समय तक उपयोग बांझपन का कारण बन सकता है
हकीकत: साल 2015 में इंटरनैशनल पर्सपेक्टिव्स ऑन सेक्शुअल एंड रिप्रोडक्टिव हेल्थ नाम के जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी बताती है कि इस मिथक की उत्पत्ति इस तथ्य से हो सकती है कि जो महिलाएं इंजेक्शन लगाने वाली गर्भनिरोधक या मौखिक गर्भनिरोधक गोलियों का उपयोग करती हैं, उन्हें अपने ओव्यूलेशन और मासिक धर्म की बहाली में कुछ देरी का अनुभव हो सकता है. लेकिन इन गर्भनिरोधकों के इस्तेमाल से सिर्फ इतनी ही “बांझपन” से जुड़ी समस्या होती है और इसके बाद बहुत जल्द सारी चीजें सामान्य हो जाती हैं.

मिथक3: गर्भनिरोधक लेने से वजन बढ़ने, मूड स्विंग और पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज जैसी अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं
हकीकत: मौखिक गर्भनिरोधक गोलियां खाने के संदर्भ में आपने इस मिथक को अधिक बार सुना होगा, लेकिन यह मिथक आईयूडी प्रत्यारोपण के साथ भी जुड़ा हुआ है. हालांकि कई अध्ययनों में यह बात सामने आयी है कि मौखिक गर्भनिरोधक गोली के इस्तेमाल के साथ ही धूम्रपान, उच्च रक्तचाप या अन्य जोखिम कारक हृदय संबंधी समस्याओं का कारण बन सकते हैं लेकिन वजन बढ़ने या मूड स्विंग के बारे में भी यही बात नहीं कही जा सकती.

जिन महिलाओं को पीसीओएस या अन्य समस्याओं के लिए मौखिक गर्भनिरोधक गोली प्रिस्क्राइब की जाती है वे महिलाएं वजन बढ़ने और मूड में बदलाव का अनुभव कर सकती हैं. इसके अलावा जब आप पहली बार मौखिक गर्भनिरोधक गोली लेना शुरू करती हैं तब भी आपको मूड स्विंग और वजन बढ़ने का अनुभव हो सकता है, लेकिन जैसे ही आपका शरीर गोली के प्रभाव के हिसाब से अडजस्ट होने लगता है ऐसे लक्षण पूरी तरह से कम हो जाते हैं. अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट्स का कहना है कि आईयूडी का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं को कभी-कभी दर्द और स्पॉटिंग का अनुभव हो सकता है, लेकिन इसके वास्तविक जोखिम बहुत कम हैं.

मिथक4: समय पर पुलआउट कर लेना भी गर्भनिरोधक का एक विश्वसनीय तरीका है
हकीकत: द क्लीवलैंड क्लिनिक की मानें तो किसी पुरुष द्वारा स्खलन होने से पहले ही समय पर पुलआउट कर लेना, खड़े होने की पोजिशन या विमिन ऑन टॉप पोजिशन में सेक्स करना या मासिक धर्म चक्र की सुरक्षित अवधि के दौरान असुरक्षित यौन संबंध बनाना- ये सारे गर्भनिरोधक के विश्वसनीय तरीके नहीं हैं. इन सभी तरीकों में कई खामियां हैं जिससे आपको न केवल प्रेगनेंसी और सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन (एसटीआई) होने का खतरा बना रहता है बल्कि चोट लगने, यौन असंतोष और निराशा भी महसूस हो सकती है.

मिथक5: मौखिक गर्भनिरोधक गोली लेने के तुरंत बाद ही ये असर करने लगती है
हकीकत: गर्भनिरोधक गोलियां प्रेगनेंसी को रोकने में असरदार साबित हो पाएं इसके लिए जरूरी है कि आप इन मौखिक गर्भनिरोधक गोलियों का एक सप्ताह तक सेवन करें और वह भी आपका मासिक धर्म शुरू होने के पांच दिनों के भीतर. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ऑव्यूलेशन को रोकने और महिला के शरीर में मौजूद प्राकृतिक हार्मोन के साथ परस्पर क्रिया करने के लिए गोली में मौजूद हार्मोन को आमतौर पर लगभग सात दिन का समय लगता है. आगे के मार्गदर्शन के लिए आपको अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ से बात करनी चाहिए या फिर गोलियों के साथ दिए गए निर्देशों को अच्छी तरह से पढ़ना चाहिए.

मिथक6: प्रेगनेंसी को रोकने में 100 फीसदी प्रभावी है गर्भनिरोधक
हकीकत: किसी भी प्रकार का गर्भनिरोधक 100 प्रतिशत प्रभावी नहीं होता है. यूके की नैशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) का कहना है कि अगर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो पुरुष कॉन्डम 98% प्रभावी होता है. यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) और मौखिक गर्भनिरोधक गोलियों के साथ जुड़ी हर निर्देश पुस्तिका में कहा जाता है कि अगर इन गोलियों का सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो ये गोलियां 99.7% प्रभावी हैं. सीडीसी यह भी बताता है कि आईयूडी प्रेगनेंसी को रोकने में 99% से अधिक प्रभावी है.

मिथक7: जब महिला स्तनपान करा रही हो तो गर्भनिरोधक की जरूरत नहीं
हकीकत: क्लीवलैंड क्लिनिक की मानें तो स्तनपान या बच्चे को अपना दूध पिलाना गर्भनिरोधक का एक प्रभावी तरीका सिर्फ तभी हो सकता है जब महिला को बच्चे को जन्म दिए 6 महीने से कम का समय हुआ हो, उसका सामान्य मासिक धर्म अब तक फिर से शुरू न हुआ हो और बच्चे को सिर्फ मां का दूध ही पिलाया जा रहा हो और कुछ नहीं. यदि इन मापदंडों में से कोई भी पूरा न हो रहा हो तो ऑव्यूलेशन की संभावना हो सकती है और असुरक्षित यौन संबंध बनाने से दूसरी प्रेगनेंसी हो सकती है. ऐसे मामलों में, स्तनपान कराने वाली मां को अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ के साथ बात करके गर्भनिरोधक के सुरक्षित तरीकों के बारे में सलाह लेनी चाहिए. (अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल गर्भनिरोधक गोलियों के उपयोग, फायदे, नुकसान के बारे में पढ़ें।) (न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं। सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है। myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं।)



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