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स्वास्थ्य

वायु प्रदूषण हो सकता है खतरनाक, इन बीमारियों की बनता है वजह

वायु प्रदूषण से हो सकती हैं ये बीमारियाँ

वायु प्रदूषण (Air Pollution) मानव शरीर पर हानिकारक प्रभाव डाल सकता है. रिपोर्ट्स तो यह भी कहती हैं कि प्रदूषित हवा में दिन भर रहना कई सिगरेट पीने के बराबर है…

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    October 29, 2020, 6:03 PM IST

वायु प्रदूषण (Air Pollution) घातक साबित हो सकता है. कभी-कभी वायु कुछ ही समय में प्रदूषकों को बहुत तेजी से पूरे वायुमंडल में फैलासकती है. प्रदूषित हवा में सांस लेने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए संक्रमण से बचना लगभग असंभव है. हालांकि प्रदूषण का स्तर, प्रदूषकों का रिएक्शन और हर व्यक्ति में प्रदूषक आधारित रोगों का संक्रमण अलग है. तथ्य यह है कि वायु प्रदूषण मानव शरीर पर हानिकारक प्रभाव डाल सकता है.

रिपोर्ट्स तो यह भी कहती हैं कि प्रदूषित हवा में दिन भर रहना कई सिगरेट पीने के बराबर है. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हवा किस स्तर तक दूषित हुई है. यहां प्रदूषण के कारण होने वाली पांच बीमारियों के बारे में बताया गया है.

ह्रदय सम्बन्धी समस्याएं
वायु प्रदूषण से दिल की बीमारियां हो सकती है. इसमें असंतुलित धड़कन, हार्ट फेल होना और हाइपरटेंशन है. हालांकि प्रदूषित वायु को लेकर सावधान रहने से इन समस्याओं को खुद से दूर रखा जा सकता है. इन समस्याओं के लक्षण शरीर पर दिखाई देने लग जाते हैं. सांस लेने में तकलीफ, गले में और सीने में दर्द आदि दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है.अस्थमा

यह सबसे आम बीमारियों में से एक है जो प्रदूषित हवा में सांस लेने वाले मनुष्यों को प्रभावित कर सकती है. यह एक पुरानी बीमारी है जिसमें मानव शरीर के श्वसन मार्ग में सूजन हो जाती है और व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ता है. सामान्य दिनचर्या गतिविधियों के दौरान भी भारी सांस आना इसका लक्षण है. अस्थमा के रोगियों को ताजा हवा का ही लेनी चाहिए.

लंग कैंसर
प्रदूषित हवा में ज्यादा समय गुजारने पर प्रदूषक तत्व फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं और उन्हें क्षतिग्रस्त भी करते हैं. वायु प्रदूषण को लंग कैंसर के प्रमुख कारणों में से एक माना गया है. यह फेफड़ों को सीधे प्रभावित करता है. प्रदूषण के कारण फेफड़ों में अनियंत्रित कोशिकाओं की वृद्धि होती है.

निमोनिया

प्रदूषित वायु उन जीवाणुओं को भी साथ लाती है, जो सांस लेने के रस्ते में प्रवेश कर जाते हैं और निमोनिया का कारण बनते हैं. प्रदूषित हवा में लगातार सांस लेने से यह बीमारी और भी बदतर हो सकती है. इसके अलावा प्रदूषण के कारण होने वाली अन्य बीमारियों के साथ यह ज्यादा घातक रूप ले सकती है.

किडनी की बीमारी
वायु प्रदूषण के कारण नेफ्रोपैथी नामक बीमारी हो सकती है, जो किडनी से सम्बन्धित है. इससे कई अन्य बीमारियों का जन्म भी हो सकता है. कार्बन प्रदूषक सांस के साथ अन्दर जाने से किडनी डैमेज का खतरा रहता है. इससे बचने के लिए बाहर जाते समय मास्क का उपयोग कर सकते हैं.



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