फेफड़ों को नुकसान पहुंचाकर आपको COPD का मरीज बना सकता है वायु प्रदूषण(प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
स्वास्थ्य

वायु प्रदूषण पहुंचा रहा है फेफड़ों को भारी नुकसान, COPD के मरीज बन सकते हैं आप

शायद आप यह बात नहीं जानते होंगे लेकिन दुनियाभर में जिन वजहों से सबसे ज्यादा लोगों की मौत होती है उस सूची में वायु प्रदूषण चौथे नंबर पर है. स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2020 की रिपोर्ट की मानें तो साल 2019 में दुनियाभर में वायु प्रदूषण के संपर्क में आने की वजह से 67 लाख लोगों की मौत हो गई जिसमें से भारत में होने वाली मौतों का आंकड़ा 16 लाख है. कोविड-19 महामारी की वजह से लगे लॉकडाउन के कारण कुछ महीनों तक तो वातावरण साफ और स्वच्छ रहा. लेकिन अब जब सर्दियों का मौसम शुरू हो गया है और सड़कों पर गाड़ियां वापस आ गई हैं, फैक्ट्रियां खुल गई हैं, निर्माण कार्य फिर से शुरू हो गया है, इन सबको देखते हुए एक बार फिर देश के ज्यादातर शहरों की हवा फिर से प्रदूषित हो गई है.

वायु प्रदूषण के कारण हो सकती हैं ये समस्याएं
हवा में मौजूद प्रदूषण के कण जब सांस के जरिए शरीर के अंदर जाते हैं तो व्यक्ति के वायुमार्ग में खुजली और जलन होने लगती है जिसकी वजह से खांसी आती है, सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है, सांस लेते वक्त घरघर की आवाज आती है, अस्थमा का अटैक आ सकता है और सीने में भी दर्द हो सकता है.लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से सीओपीडी का खतरा

वायु प्रदूषण और फेफड़ों को होने वाले नुकसान को लेकर अब तक जितनी भी रिसर्च हुई है उसमें यह बात सामने आयी है कि लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने की वजह से ही फेफड़ों से जुड़ी बीमारी सीओपीडी यानी क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज होने का खतरा अधिक होता है. यह एक ऐसी बीमारी है जो कई सालों में धीरे-धीरे विकसित होती है और इसलिए आप समझ नहीं पाते कि आपको यह बीमारी कब से है. यह रोग सांसों को अवरुद्ध करता है और इस वजह से सांस लेने में मुश्किल होने लगती है.

वायु प्रदूषण और सीओपीडी के बीच लिंक
अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से प्रदूषित हवा के संपर्क में रहता है और प्रदूषित हवा को ही सांस के जरिए शरीर के अंदर लेता है तो उसे सीओपीडी होने का खतरा अधिक हो सकता है. इसके अलावा अगर वह व्यक्ति धूम्रपान भी करता है तो सीओपीडी का जोखिम और भी अधिक हो जाता है. जिन लोगों को सीओपीडी पहले से है, उनके लिए वायु प्रदूषण वाले स्थान पर रहना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. यह उनके लक्षणों को बदतर बना सकता है और उन्हें सीओपीडी का अटैक अधिक बार हो सकता है.

दरअसल, प्रदूषित हवा की वजह से फेफड़ों को होने वाला नुकसान ही सीओपीडी का कारण बनता है. प्रदूषित हवा में बेहद छोटे-छोटे कण (पार्टिकुलेट मैटर पीएम कण), ओजोन, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और लेड जैसे खतरनाक केमिकल्स होते हैं जिन्हें इरिटैंट या उत्तेजक कहते हैं जो फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं.

फेफड़ों को होने वाला यह नुकसान 2 तरीके से हो सकता है :

  • उत्तेजक कणों की एक छोटी मात्रा को लंबे समय तक सांस के जरिए शरीर के अंदर लेना
  • कम समय में ही बहुत अधिक मात्रा में उत्तेजक कणों को सांस के जरिए अंदर खींच लेना

आउटडोर ही नहीं इंडोर पलूशन भी है खतरनाक

वायु प्रदूषण सिर्फ घर के बाहर ही नहीं होता बल्कि कई बार घर के अंदर की हवा भी प्रदूषित हो जाती है जिसे इंडोर पलूशन कहते हैं और इसके 2 प्रमुख कारण हैं- तंबाकू या सिगरेट का धुआं और घर के अंदर जलने वाले ईंधन से निकलने वाला धुआं. आपको जानकर हैरानी होगी कि जो व्यक्ति सिगरेट पीता है सिर्फ उसे ही नहीं बल्कि जो सिगरेट नहीं पीता लेकिन सिगरेट के धुएं के संपर्क में नियमित रूप से बना रहता है उसे भी सीओपीडी होने का खतरा अधिक होता है.

सीओपीडी मरीजों की स्थिति हो सकती है बदतर
जिन लोगों को पहले से सीओपीडी की बीमारी है अगर वे लोग नियमित रूप से प्रदूषित हवा के संपर्क में रहें फिर चाहे वह घर के अंदर इंडोर पलूशन हो या फिर घर के बाहर आउटडोर पलूशन- उनके जीवन की गुणवत्ता के लिए यह प्रदूषण बेहद हानिकारक हो सकता है.

वायु प्रदूषण सीओपीडी के मरीजों को निम्नलिखित तरीकों से प्रभावित कर सकता है :

  • बीमारी के लक्षण बदतर हो जाते हैं
  • श्वसन संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है
  • श्वसन संक्रमण की वजह से मरीज में होने वाले सीओपीडी के अटैक का खतरा भी बढ़ जाता है

प्रदूषण के कारण होने वाले नुकसान को कैसे करें कम
वे लोग जो ऐसी जगहों पर रहते हैं जो वायु प्रदूषण के उच्च स्तर से प्रभावित है, उन्हें कुछ जरूरी उपाय करने चाहिए जिससे प्रदूषण के कारण रोजाना होने वाले नुकसान में कमी की जा सके. इसमें शामिल है :

  • बाहरी, प्रदूषित वातावरण में एक्सरसाइज न करें (इसकी जगह जिम या हवादार कमरे का उपयोग करें)
  • बहुत अधिक पलूशन वाली जगहें जैसे मेन रोड पर जाने से बचें
  • जब प्रदूषण का लेवल अपने उच्चतम स्तर पर हो, ऐसे समय में बाहर निकलने से बचें
  • अगर आप पहले से अस्थमा या सीओपीडी के मरीज हैं तो अपनी दवाइयां और इनहेलर हमेशा अपने पास रखें
  • जब कार में सफर कर रहे हों तो खिड़कियां बंद रखें और एसी को इस तरह से सेट करें कि अंदर की हवा रीसाइकिल होती रहे (अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल सीओपीडी के लक्षण, जोखिम कारक और बचाव के तरीकों के बारे में पढ़ें।) (न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं। सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है। myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं।)



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