रात में पसीना आना भी हो सकता है टीबी का लक्षण, बरतें ये सावधानियां
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रात में पसीना आना भी हो सकता है टीबी का लक्षण, बरतें ये सावधानियां | health – News in Hindi

ट्यूबरकुलोसिस (Tuberculosis) यानी टीबी एक संक्रामक रोग है, जो आमतौर पर माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस (एमटीबी) बैक्टीरिया (Bacteria) के कारण होता है. इसे तपेदिक या क्षय रोग भी कहते हैं. यह रोग आमतौर पर फेफड़ों (Lungs) को प्रभावित करता है, लेकिन शरीर के अन्य भागों को भी प्रभावित कर सकता है. myUpchar के अनुसार यह रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में हवा द्वारा फैलता है.

टीबी दो तरह के होते हैं लेटेंट और एक्टिव टीबी. लेटेंट टीबी का मतलब है कि बैक्टीरिया शरीर में है, लेकिन शरीर का इम्यून सिस्टम (Immune System) उसे सक्रिय नहीं होने दे रहा है. इसलिए टीबी के लक्षणों का अनुभव नहीं होता है. लेकिन लेटेंट टीबी है तो वह एक्टिव टीबी बन सकता है. एक्टिव टीबी का मतलब है कि बैक्टीरिया शरीर में विकसित हो रहा है और इसके लक्षण महसूस होंगे. अगर फेफड़े एक्टिव टीबी से संक्रमित हैं तो यह बीमारी दूसरों में भी फैल सकती है.

एक्टिव टीबी में दिखते हैं ये लक्षणयूं तो टीबी में शरीर का जो हिस्सा प्रभावित होता है, उसी आधार पर लक्षण विकसित होते हैं. एक्टिव टीबी से पीड़ित मरीज को श्वसन प्रणाली से जुड़े लक्षण महसूस होते हैं. अगर तीन सप्ताह से ज्यादा समय तक खांसी और इसके साथ बलगम में खून आए तो डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए. इसके अलावा अन्य लक्षणों में बुखार, थकान, छाती में दर्द, सांस फूलना, वजन कम होना, मांसपेशियों में क्षति भी शामिल हैं. एक और लक्षण बहुत महत्वपूर्ण है और वह यह है कि टीबी के शिकार व्यक्ति को रात में पसीना आता है.

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कुछ मामलों में टीबी फेफड़ों की बजाए अन्य जगहों पर हो सकता है, जैसे हड्डियों, जोड़ों, पाचन तंत्र, मूत्राशय, प्रजनन प्रणाली, मस्तिष्क, नसें आदि. इनके लक्षणों में पेट दर्द, दस्त, ग्रंथियों में सूजन, पीठ में अकड़न, दौरा पड़ना, प्रभावित हड्डी में दर्द और उसके काम करने की क्षमता में कमी होना आदि शामिल हैं.

ऐसे होती हैं जांच और इलाज
टीबी का पता लगाने के लिए छाती का एक्सरे और ट्यूबरकुलिन टेस्ट किया जाता है. उसके बाद कफ की जांच की जाती है. ब्लड टेस्ट यह पुष्टि करता है कि व्यक्ति को लेटेंट टीबी है या एक्टिव टीबी है. डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाओं से बैक्टीरिया को मारकर टीबी का इलाज करते हैं.

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ये सावधानियां जरूरी
myUpchar की डॉ. मेधावी अग्रवाल का कहना है कि एक्टिव टीबी होने पर कुछ सावधानियां बहुत जरूरी है. जब तक टीबी हो तब तक अकेले रहने की कोशिश करें, ताकि ये बीमारी किसी और में न फैले. वहीं खांसते, छींकते समय मुंह टिशू से ढंके और उसे कूड़ेदान में फेंक दे. विटामिन, मिनरल्स और अन्य पोषक तत्व को जरूर खानपान में शामिल करें. घर की और अपनी साफ-सफाई का जरूर ध्यान रखें. इस बात का विशेष ध्यान रखें कि डॉक्टर के बताए अनुसार ही दवा लें और तब तक सही तरीके से लें जब तक कि वे बंद करने के लिए न कहें.

एक्टिव टीबी से बचने के लिए भी कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें. जिस व्यक्ति को टीबी हो उसके साथ बंद कमरे में ज्यादा समय न रहें. मास्क पहनना, मुंह ढककर रखना और कमरे में वेंटीलेशन का इस्तेमाल करने से भी बैक्टीरिया फैलने से रोकथाम की जा सकती है.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, टीबी के लिए क्या करना चाहिए पढ़ें।

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