भगवान शिव की पूजा में विशेष महत्व रखता है बेल, जानें इसका धार्मिक महत्व और आयुर्वेद के अनुसार गुण-दोष
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भगवान शिव की पूजा में विशेष महत्व रखता है बेल, जानें इसका धार्मिक महत्व और आयुर्वेद के अनुसार गुण-दोष

बेल का फल (Wood Apple) और बेल का वृक्ष (bilva tree) विशेषताओं में अद्भुत है. यह एक भारतीय फल है और प्राचीन ग्रंथों में इसे दिव्य फल कहा गया है. उसका कारण यह है कि यह
शरीर विशेषकर पाचन सिस्टम के लिए इतना लाभकारी है, जितना शायद ही दूसरा फल होगा. यह उन विशेष फलों में से एक है, जिसे पूजा भी जाता है. भिन्न स्वाद होने के बावजूद बेल मनमोहक है.

प्राचीनतम फलों में से एक है बेल
बेल भारत के प्राचीनतम फलों में से एक है. इसी कारण प्राचीन धार्मिक व आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसका खूब वर्णन है. बेल के अलावा, उसके वृक्ष, पत्तियों तक की विशेषता बताई गई और इन्हें पूजनीय बताया गया है. बेल के उत्पत्ति की बात करें तो इसमें कोई शंका नहीं है कि यह भारतीय वृक्ष है और हजारों वर्षों से यह हिमालय की तराई इलाकों, सूखे पहाड़ी क्षेत्रों के अलावा मध्य व दक्षिण भारत में तो पाया ही जाता है साथ ही नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार के अलावा वियतनाम, लाओस, कंबोडिया, थाईलैंड आदि देशों में भी इसके वृक्ष बहुतायत में उगते हैं. ईस्वी 633 में चीन से भारत पहुंचे बौद्ध विद्वान जुआनज़ांग जब वापस चीन पहुंचे तो वह संस्कृत, बौद्ध दर्शन व भारतीय विचारों पर अनेक पुस्तकें ले गए और उनका अनुवाद किया. इसके लिए उन्होंने तत्कालीन शक्तिशाली राजा हर्ष का धन्यवाद भी दिया. उन्होंने भी बेल को एक भारतीय फल के रूप में वर्णित किया है. उन्होंने करीब 657 पुस्तकों का अनुवाद किया है.

यह भारतीय वृक्ष है और हजारों वर्षों से यह हिमालय की तराई इलाकों, सूखे पहाड़ी क्षेत्रों के अलावा मध्य व दक्षिण भारत में तो पाया जाता है.

बेल के फल का है धार्मिक महत्व
पहले बेल फल की धार्मिक व आध्यात्मिक विशेषताओं की बात करें तो शिवपुराण सहित अन्य धर्मग्रंथों में फल, वृक्ष और पत्तियों की विशेषताएं वर्णित की गई हैं. भगवान शिव की पूजा, उनका आशीर्वाद और सांसारिक सुख की प्राप्ति के लिए बेल फल व बेलपत्र को उत्तम बताया गया है. धार्मिक ग्रंथों में बेल वृक्ष को साक्षात शिव का स्वरूप कहा गया है. बेल का वृक्ष संपन्नता का भी प्रतीक है. ऐसी भी मान्यता है कि इसके वृक्ष में देवी लक्ष्मी का वास है. बेल की अन्य विशेषता यह है कि पेड़ में लगे हुए पुराने पीले हुए फल, एक साल के बाद दोबारा से हरे हो जाते हैं. पत्तों की विशेषता यह है कि उन्हें तोड़कर रखेंगे तो छह महीने तक ज्यों के त्यों बने रहते हैं.

सेहत के लिए फायदेमंद है बेल
प्राचीन भारतीय आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘चरकसंहिता’ में बेल (बिल्ब) को कफवात जीतने वाला बताया गया है. बेल स्निग्ध, गर्म व तीक्ष्ण होता है और अग्नि (Gastritis) को दीप्त करता है. दक्षिण भारत
स्थित कमुसारया के सैनापति व कवि चौवुंदराय (940-989 ईस्वी, आज के कर्नाटक) ने भी बेलफल के कई औषधीय गुण गिनाते हुए उसे विशेष फल बताया है. उन्होंने बेल के शर्बत को अति लाभकारी कहा है. उनका यह भी कहना है कि इसके वृक्ष की छाया ठंडक देती है और शरीर व मन को स्वस्थ बनाती है.

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बेल के फल में विटामिन सी, कैल्शियम, फाइबर, प्रोटीन और आयरन भी अधिक मात्रा में मिलते हैं.

बेल में कई विटामिन भरे हुए हैं. इसके सेवन से पाचन तंत्र ठीक रहता है, जिससे अपच और कब्ज़ जैसी समस्याओं से प्रभावी राहत मिलती है. आहार विशेषज्ञ व होमशेफ सिम्मी बब्बर के अनुसार बेल के फल में विटामिन और पोषक तत्व खूब पाए जाते हैं. बेल में मौजूद टैनिन और पेक्टिन तत्व मुख्य रूप से डायरिया और पेचिश के इलाज में बेहद लाभकारी हैं. इसके अलावा बेल के फल में विटामिन सी, कैल्शियम, फाइबर, प्रोटीन और आयरन भी अधिक मात्रा में मिलते हैं. बेल का मुरब्बा भी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और शरीर को शीतलता प्रदान करता है. पीलिया होने पर बेल का मुरब्बा खाने की सलाह दी जाती है. सिम्मी के अनुसार बेल का अधिक मात्रा में सेवन नुकसान कर सकता है. ज्यादा खाने से पेट में दर्द, सूजन, पेट फूलना और कब्ज की समस्या पैदा हो जाती है.

Tags: Health, Lifestyle

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