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ब्रेस्टफीडिंग कराने से 25 फीसदी कम हो सकता है ओवेरियन कैंसर का जोखिम: स्टडी | women-special – News in Hindi

जो महिलाएं अपने बच्चों को स्तनपान कराती हैं, उनमें अंडाशय के कैंसर (ओवेरियन कैंसर) के विकास का खतरा लगभग 25 प्रतिशत कम हो सकता है. यह खुलासा एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन से हुआ जिसमें क्यूआईएमआर बर्गोफर मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता जुड़े थे. शोध से यह भी पता चलता है कि महिला जितना लंबा स्तनपान कराती है, जोखिम में कमी उतनी ही अधिक होती है. अध्ययन को जामा ऑन्कोलॉजी जर्नल में प्रकाशित किया गया है. क्यूआईएमआर बर्गोफर के गायनेकोलॉजिस्ट कैंसर समूह के प्रमुख प्रोफेसर पेनेलोप वेब ने कहा कि स्तनपान सभी अंडाशय के कैंसर के विकास के कम जोखिम के साथ जुड़ा हुआ था, जिसमें सबसे घातक उच्च श्रेणी के ट्यूमर शामिल हैं.

प्रोफेसर वेब ने कहा, ‘कुल मिलाकर अंडाशय के कैंसर के विकास का जोखिम महिलाओं के लिए 24 प्रतिशत कम हो गया है, जो स्तनपान कराती हैं. यहां तक कि जिन लोगों ने अपने बच्चों को तीन महीने या उससे कम समय तक स्तनपान कराया, उनमें अंडाशय के कैंसर के विकास का लगभग 18 प्रतिशत कम जोखिम था.’ उन्होंने कहा, ‘जिन माताओं ने अपने बच्चों को 12 महीने से अधिक समय तक स्तनपान करवाया, उनमें 34 प्रतिशत कम जोखिम था. महत्वपूर्ण बात यह है कि स्तनपान का यह लाभ स्तनपान बंद करने के बाद कम से कम 30 साल तक रहा.’

ऑस्ट्रेलियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड वेलफेयर के मुताबिक, पिछले साल ऑस्ट्रेलिया में ओवेरियन कैंसर से एक हजार से ज्यादा महिलाओं की मौत हुई थी. अंडाशय के कैंसर से पीड़ित महिलाओं में से केवल 45 प्रतिशत ही उनके डायग्नोसिस के कम से कम पांच साल बाद जीवित रहती हैं. प्रोफेसर वेब ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में ओवेरियन कैंसर एसोसिएशन कंसोर्टियम के शोधकर्ता शामिल हैं, जिन्होंने अंडाशय के कैंसर से ग्रस्त 9973 महिलाओं के डाटा की जांच की.myUpchar से जुड़े डॉ. विशाल मकवाना का कहना है कि मां का दूध शिशु को वह सब देता है, जिसकी जरूरत उसे जिंदगी के पहले छह महीनों में बढ़ने के लिए होती है. मां का दूध विटामिन और पोषक तत्वों से युक्त होता है, जिसका लंबे समय तक बच्चे के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के विकास पर असर पड़ता है. सिर्फ बच्चों के लिए ही नहीं माताओं को भी नवजात शिशुओं को स्तनपान कराने से कई लाभ होते हैं.

myUpchar से जुड़े एम्स के डॉ. उमर अफरोज का कहना है कि अंडाशय (ओवरिज) महिलाओं में पाई जाने वाली प्रजनन ग्रंथियां हैं. यह प्रजनन के लिए अंडों का उत्पादन करता है. अंडाशय महिलाओं के हार्मोंस एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन का मुख्य स्त्रोत भी है. अंडाशय में शुरू होने वाला कैंसर ही अंडाशय का कैंसर है. अन्य किसी कैंसर की तरह अंडाशय का कैंसर कोशिकाओं के अनियमित और अनियंत्रित गुणन और विभाजन के कारण होता है. इसके होने के कुछ प्रमुख कारकों में बढ़ती उम्र, जीवनकाल में कुल ओव्युलेशन्स की अधिक संख्या, प्रजनन क्षमता की कमी, ब्रेस्ट कैंसर, हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी, मोटापा आदि हैं.

स्तन कैंसर के बाद अंडाशय के कैंसर के मरीज तेजी से बढ़ते जा रहे हैं. इसका कारण यह है कि लक्षण सामान्य होते हैं जो कि नजरअंदाज हो जाते हैं. अंडाशय कैंसर के लक्षणों में पेट फूलना, जल्दी से पेट भरा हुआ लगना या खाने में परेशानी, बार-बार पेशाब की इच्छा या कब्ज, पीरियड्स न होने पर भी ब्लीडिंग होना शामिल हैं. इन लक्षणों के होने पर डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, स्तनपान से जुड़ी समस्याएं और उनके समाधान पढ़ें.

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