फेफड़े के मरीजों में क्यों गंभीर हो जाता है कोरोनावायरस, स्टडी में आया सामने
स्वास्थ्य

फेफड़े के मरीजों में क्यों गंभीर हो जाता है कोरोनावायरस, स्टडी में आया सामने

Coronavirus and Lungs Problem: फेफड़े से जुड़ी बीमारियों वाले मरीजों में कोरोना के संक्रमण की स्थिति गंभीर होने का खतरा ज्यादा होता है, लेकिन रिसर्चर्स ने अब ये पता लगा लिया है कि क्रोनिक  ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज यानी सीओपीडी (COPD) वालों में कोविड संक्रमण आम लोगों की तुलना गंभीर क्यों होता है. इससे फेफड़े की बीमारी वाले लोगों को गंभीर स्थिति से बचाने का नया इलाज भी तलाशा जा सकेगा. ऑस्ट्रेलिया के सेंटनरी इंस्टीट्यूट और यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी सिडनी के रिसर्चर्स ने अपनी स्टडी पाया कि सोओपीडी की स्थिति में विंड पाइप (windpipe) यानी वायुनलिका ब्लॉक हो जाती है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है. दुनिया भर में इस बीमारी से करीब 40 करोड़ लोग पीड़ित हैं.

इस स्टडी का निष्कर्ष अमेरिकन जर्नल ऑफ रेस्पिरेटरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन (American Journal of Respiratory and Critical Care Medicine) में प्रकाशित किया गया है. स्टडी के लिए रिसर्चर्स ने सीओपीडी के रोगियों और हेल्दी लोगों की विंड पाइप से सेल्स निकाल कर उन्हें सार्स-कोव-2 (कोरोना के कारक) से संक्रमित कराया. उन्होंने पाया कि सोओपीडी से ग्रस्त विंड पाइप के सेल्स में हेल्दी सेल्स की तुलना में संक्रमण 24 गुना ज्यादा था.

यह भी पढ़ें-
नाखूनों में भी दिखते हैं विटामिन बी12 की कमी के संकेत, जानें स्वस्थ रहने के लिए क्यों जरूरी है ये पोषक तत्व

क्या कहते हैं जानकार
स्टडी के मेन ऑथर और सेंटनरी यूटीएस सेंटर फॉर इन्फ्लेमेशन के रिसर्चर मैट जोहानसेन (Dr Matt Johansen) ने बताया कि संक्रमित कोशिका की आरएनए सीक्वेंसिग के जरिए उसकी जीनेटिक सूचनाएं एकत्रित की गई. सात दिनों बाद पाया गया कि हेल्दी व्यक्ति से ली लिए गए सेल्स की तुलना में सीओपीडी से ग्रसित मरीजों के सेल्स में सार्स-कोव-2 संक्रमण वायल लोड 24 गुना अधिक था.

यह भी पढ़ें-
सेहत सुधारने के लिए खाते हैं ज्यादा पालक तो जान लें इसके नुकसान

उन्होंने आगे बताया, “सीओपीडी एक इंफ्लेमेटरी डिजीज है जिसमें हेल्दी लोगों की तुलना में मरीजो में बेसलाइन पर सूजन बढ़ जाती है. ऐसे में इसकी संभावना ज्यादा है कि सार्स-कोव-2 (SARS-CoV-2) इस मौजूदा हाई इंफ्लेमेशन को बढ़ा देता है, जिससे नतीजे और भी खराब हो जाते हैं”

स्टडी में क्या निकला
रिसर्च टीम ने स्टडी के दौरान ये भी पाया कि सीओपीडी वाली संक्रमित कोशिकाओं में ट्रांसमेंब्रेन प्रोटीज सेरीन2 (TMPRSS2) और कैथेप्सीन बी (CTSB) का लेवल बढ़ा था. सार्स-कोव-2 (SARS CoV 2) इन दोनों ही एंजाइमों का इस्तेमाल होस्ट सेल में एंटर करने के लिए करता है. क्योंकि सीओपीडी मरीजों में इन दो एंजाइमों का लेवल बढ़ा होता है, इसलिए हेल्दी इंसानों की तुलना में सीओपीडी से ग्रस्त लोगों में संक्रमण के लिए वहां स्थितियां ज्यादा अनुकूल होती हैं.

Tags: Health, Health News, Lifestyle

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published.