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स्वास्थ्य

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में अनुष्का शर्मा ने किया शीर्षासन, डॉक्टर से जानें आपको ऐसा करना चाहिए या नहीं

बॉलिवुड एक्ट्रेस और भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली की पत्नी अनुष्का शर्मा (Anushka Sharma) इन दिनों अपनी प्रेग्‍नेंसी (Pregnancy) की तीसरी तिमाही में हैं और बताया जा रहा है कि वह जनवरी 2021 में बच्चे को जन्म दे सकती हैं. अपनी पूरी प्रेगनेंसी के दौरान अनुष्का ने अपनी कई तस्वीरें और पोस्ट सोशल मीडिया (Social Media) पर शेयर किए लेकिन इन दिनों प्रेगनेंट अनुष्का की जो तस्वीर सबसे ज्यादा वायरल हो रही है वह है शीर्षासन योग (Sirsasana) यानी हेडस्टैंड करते हुए. गर्भावस्था की तीसरी और आखिरी तिमाही में अनुष्का शर्मा, सिर नीचे और पैर ऊपर करके शीर्षासन योग करती नजर आ रही हैं.

अपनी तस्वीर शेयर करते हुए अनुष्का ने लिखा कि डॉक्टर की सलाह और योग एक्सपर्ट की देखरेख में वह प्रेगनेंसी में भी उन सभी तरह के योगासनों को आसानी से कर पा रही हैं जिसे वह प्रेगनेंसी से पहले से करती आ रही हैं. अनुष्का की इस तस्वीर को देखने के बाद सभी लोग उनकी तारीफ कर रहे हैं. लेकिन क्या अन्य गर्भवती महिलाओं को भी इस तरह के इन्वर्जन यानी उलटने वाले योगासन करने चाहिए? गर्भावस्था में योग करने के फायदे नुकसान क्या-क्या हो सकते हैं? इस तरह के सभी सवालों के जवाब जानने के लिए हमने बात की माइ उपचार से जुड़ीं गाइनैकॉलजिस्ट डॉ अर्चना निरूला से.

प्रेगनेंसी में योग के फायदेवैसे तो प्रेगनेंसी के दौरान योग को फायदेमंद माना जाता है क्योंकि योग में सांस लेने की प्रक्रिया शरीर को अधिक ऑक्सीजन प्रदान करती है जो गर्भावस्था के दौरान बेहद जरूरी है. साथ ही योग करने के बाद गर्भ में पल रहे बच्चे को ऑक्सीजन से भरपूर खून का लाभ भी मिलता है. बावजूद इसके गर्भवती महिलाओं को योगासन के कुछ निश्चित पोज करते समय संयम बरतना चाहिए, खासकर इन्वर्जन वाले पोज करते वक्त वरना बच्चे को नुकसान होने का खतरा हो सकता है.

गर्भधारण करने से पहले से योग करती रही हैं तभी प्रेगनेंसी में भी करें योग
डॉक्टर अर्चना की मानें तो यदि गर्भवती महिला गर्भधारण करने से पहले से ही योग का अभ्यास करती रही है और योग के अलग-अलग आसन और पोज की बेहतर प्रैक्टिस उन्हें है तब तो वे व्यायाम और वर्कआउट के तौर पर प्रेगनेंसी के दौरान भी योग कर सकती हैं और योग के इन्वर्जन पोज जैसे- शीर्षासन आदि का अभ्यास भी कर सकती हैं. हालांकि कुछ ऐसे योगासन भी हैं, जिन्हें करने से गर्भवती महिलाओं को पूरी तरह से परहेज करना चाहिए, क्योंकि वे प्रेगनेंसी के लिए एक संभावित खतरा हो सकते हैं, लेकिन अगर गर्भवती महिला ने प्रेगनेंसी से पहले कभी भी योग का अभ्यास नहीं किया या फिर अगर उन्होंने सिर्फ हल्का-फुल्का योग किया है और शीर्षासन जैसे कठिन आसनों का अभ्यास नहीं किया है तब तो उन्हें गर्भावस्था के दौरान योग या फिर इस तरह के इन्वर्जन योगासन पोज का अभ्यास भूल से भी नहीं करना चाहिए.

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प्रेगनेंसी हार्मोन रिलैक्सिन की वजह से गिरने का खतरा
डॉ अर्चना बताती हैं कि गर्भावस्था की पहली तिमाही यानी 1 से 3 महीने के समय में शरीर में एक हार्मोन उत्पन्न होता है जिसे रिलैक्सिन कहते हैं. यह हार्मोन पेल्विक मांसपेशियों को लूज करने का काम करता है, ताकि बच्चेदानी का साइज बढ़ सके और बढ़ते बच्चे को बच्चेदानी में समायोजित करने में किसी तरह की कोई समस्या न आए. सिर्फ पेल्विक मांसपेशियां ही नहीं बल्कि पैर और घुटने के लिगामेंट्स को भी रिलैक्सिन हार्मोन ढीला कर देता है. ऐसे में अगर गर्भवती महिला शीर्षासन जैसे उलटने वाले योग करती हैं तो उसका बैलेंस बिगड़ने और उसके गिरने का भी खतरा हो सकता है. हालांकि अगर गर्भवती महिला गर्भधारण से पहले से ही इस तरह के योग का अभ्यास करती रही हैं तो योग एक्सपर्ट की देखरेख, डॉक्टर की परमिशन और किसी की मदद के साथ वह इस आसन को कर सकती हैं.

जैसा कि हमने अनुष्का की तस्वीर में भी देखा कि उन्होंने शीर्षासन करते वक्त दीवार का सपोर्ट लिया और उनके पति विराट कोहली भी उन्हें सपोर्ट करते नजर आए. अनुष्का प्रेगनेंट होने से पहले भी योग खासकर शीर्षासन करती रही हैं और वह इसमें अभ्यस्त हैं, इसलिए प्रेगनेंसी में भी उन्होंने इसे आसानी से कर लिया.

गर्भावस्था के शुरुआती 3 महीनों में न करें योग
डॉ अर्चना की मानें तो प्रेगनेंसी के शुरुआती 3 महीनों में मिसकैरेज का खतरा सबसे अधिक होता है इसलिए इस दौरान गर्भवती महिला को किसी भी तरह का रिस्क लेने से बचना चाहिए और इसमें योग और वर्कआउट जैसी चीजें भी शामिल हैं. अगर आपने पहले कभी योग न किया हो तो प्रेगनेंसी के दौरान प्रीनेटल योगा क्लासेज प्रेगनेंसी के 3 महीने गुजर जाने के बाद ही जॉइन करें और इस दौरान भी उस तरह का योग न करें जिसमें पेट पर किसी तरह का दबाव पड़ता हो. गर्भावस्था की दूसरी और तीसरी तिमाही में मॉर्निंग सिकनेस की समस्या दूर हो जाती है और मिसकैरेज का खतरा भी कम हो चुका होता है. ऐसे में डॉक्टर की सलाह और योग एक्सपर्ट की देखरेख में योग आसानी से किया जा सकता है.

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प्रेगनेंसी में इन्वर्जन योग के फायदे
अगर आप शीर्षासन जैसे इन्वर्जन योग पहले भी करती रही हैं तो आप इसे प्रेगनेंसी के दौरान भी कर सकती हैं और इसके निम्नलिखित फायदे हो सकते हैं:

  • प्रेगनेंसी के दौरान पीठ और कमर में लंबे समय तक दर्द बना रहता है और यह प्रेगनेंसी की एक कॉमन समस्या है. ऐसे में इन्वर्जन योगासान करना बैक पेन की समस्या को दूर करने में मदद कर सकता है.
  • शरीर को उल्टा करके जब आप योगासन करती हैं तो खून की सप्लाई मस्तिष्क में बढ़ जाती है जिससे गर्भवती महिला का मन और नर्वस सिस्टम दोनों शांत हो जाते हैं, जिससे अच्छी नींद भी आती है.
  • साथ ही इस तरह के योगासनों से फ्लेक्सिब्लिटी बढ़ती है और शरीर डिलिवरी के लिए बेहतर तरीके से तैयार होने लगता है.

अधिक जानकारी के लिए पढ़ें हमारा आर्टिकल गर्भावस्था में योगासन और प्राणायाम

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