लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से कुछ मामलों में गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है.
स्वास्थ्य

प्रदूषित हवा में सांस लेना प्रेग्नेंसी को कर सकता है प्रभावित, जानें कैसे

प्रेग्नेंसी (Pregnancy) के दौरान हम तमाम सावधानियों जैसे खान-पान, उठना-बैठना, एक्टिविटी इत्यादि का ध्यान रखते हैं. इससे गर्भवती महिला के साथ-साथ उसके बच्चे का भी स्वास्थ अच्छा बना रहता है, लेकिन यदि आप इन सभी सावधानियों को बरतने के बावजूद शुद्ध हवा में सांस नहीं ले रही हैं, तो यह आप दोनों के लिए चिंता का विषय हो सकता है. जी हां, हम प्रदूषित हवा (Air Pollution) की बात कर रहे हैं, जिसमें सांस लेने से गर्भवती महिला व उसके बच्चे पर बुरा असर पड़ सकता है. 30 नवंबर 2020 को ‘यूएस एअर क्वालिटी इंडेक्स’ के अनुसार दुनिया में सबसे प्रदूषित शहरों की लिस्ट में पाकिस्तान का लाहौर शहर नंबर एक, जबकि दूसरे स्थान पर भारत की राजधानी दिल्ली है. यही नहीं, देश के कुछ अन्य शहरों में रह रहे लोग भी वायु प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं. ऐसे में प्रदूषित हवा में सांस लेने से शिशु को जन्म से पहले ही कई तरह की बीमारियां घेर सकती हैं.

प्रदूषित हवा में सांस लेने से होने वाली बीमारियां

वायु प्रदूषण कई रूपों में आता है. आमतौर पर यह नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, वाहन से निकलने वाले धुएं, स्मोक, धूल और फैक्टरी से निकलने वाली हवा में केमिकल की वजह से होता है. इसके संपर्क में आने से खांसी, घरघराहट, आंख और साइनस में जलन, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा और वातस्फीति जैसी श्वसन संबंधी बीमारियां, तेज थकान, फेफड़ों की क्षमता में कमी और सांस की तकलीफ, फेफड़ों और दिल को नुकसान, कैंसर जैसी घातक बीमारियां हो सकती हैं. इसका सबसे अधिक प्रभाव गर्भवती महिलाओं, बच्चों, शिशुओं और बुजुर्गों पर पड़ता है.ऐसे कई शोध हुए हैं जिनसे पता चला है कि प्रदूषित हवा गर्भवती महिलाओं और उनके बच्चों के लिए गंभीर परेशानियों का खतरा है.

(1) गर्भ में पल रहे बच्चे पर असर

यदि कोई गर्भवती महिला प्रदूषित हवा में सांस लेने को मजबूर है तो इसका सीधा असर उसकी प्रेग्नेंसी पर देखने को मिल सकता है. यूनाइटेड किंगडम में मौजूद यॉर्क विश्वविद्यालय में स्टॉकहोम एनवायरनमेंट इंस्टीट्यूट (एसईआई) के एक अध्ययन के अनुसार, वायु प्रदूषण के कारण हर साल लगभग 30 लाख (तीन मिलियन) बच्चे समय से पहले पैदा होते हैं, बता दें ऐसे में बच्चे में कुपोषण की समस्या हो सकती है. इसके अलावा उसे डायबिटीज, हृदय से संबंधित बीमारियां और हाई ब्लड प्रेशर का भी खतरा हो सकता है.

(2) गर्भवती महिला पर असर

लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से कुछ मामलों में गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा समय से पहले प्रसव का भी जोखिम रहता है. कई शोधों से इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि प्रदूषित वायु में सांस लेने से महिलाओं और पुरुषों में प्रजनन क्षमता में फर्क आता है.

प्रदूषित वायु से कैसे करें खुद का बचाव

वायु प्रदूषण का इलाज काफी व्यापक है, लेकिन प्रेग्नेंसी के दौरान हम कुछ सावधानियां बरतकर इससे बचाव कर सकते हैं. आप एअर प्यूरीफायर घर ला सकते हैं, जो स्मोक, एलर्जी पैदा करने वाले कारकों, मोल्ड और कीटाणुओं को हटाने में मदद करता है. बाजार में ऐसे तमाम तरह के पौधे आते हैं, जिन्हें धूप में रखना जरूरी नहीं होता और यह पौधे प्राकृतिक शुद्ध हवा देने में सक्षम होते हैं. इसके अलावा ऐसे रसायनों से दूर रहें, जो सांस के जरिए शरीर के अंदर जा सकते हैं जैसे हेयर स्प्रे, पेंट इत्यादि.

यदि आपके क्षेत्र में वायु प्रदूषण की समस्या है तो गर्भवस्था के दौरान घर के अंदर रहना ही उचित है. सिर्फ डॉक्टर विजिट या इर्मे​जेंसी में ही घर से बाहर निकलें और दूषित वायु से बचने के लिए कुछ जरूरी कदम उठाएं जैसे एंटी पॉल्यूशन मास्क पहनना, खुद की गाड़ी या कैब से जाना इत्यादि. उपर्युक्त बातों का ध्यान रखकर आप अपने और बच्चे के लिए एक सुरक्षित वातावरण बना सकते हैं.अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, जानें दीपावली पर होने वाले प्रदूषण का गर्भवती और शिशु पर क्या प्रभाव पड़ता है पढ़ें. न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है. myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *