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पेट से जुड़ी बीमारी आईबीएस में विटामिन डी नहीं है कारगर- रिसर्च/Vitamin D supplements are ineffective for treating painful IBS Lak– News18 Hindi

Vitamin D ineffective in IBS: किसी-किसी इंसान की आंत में विकार पैदा हो जाता है. इसके कारण पेट में अक्सर मरोड़ (cramps) आना, पेट फूलने की बीमारी (bloating), डायरिया (diarrhoea) और कब्ज (constipation) आदि की समस्याएं हो जाती हैं. इसे इरीटेबल बाउल सिंड्रोम (Irritable Bowel Syndrome -IBS) कहते हैं. अभी तक विटामिन डी से इसका इलाज किया जाता है लेकिन एक नई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि विटामिन डी से आईबीएस ठीक नहीं होता है.

एचटी की खबर के मुताबिक यूनिवर्सिटी ऑफ शेफिल्ड (University of Sheffield) के अध्ययन में यह बात सामने आई है. इस स्टडी के निष्कर्ष को यूरोपियन जर्नल (European Journal of Nutrition) में प्रकाशित किया गया है.

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12 सप्ताह तक विटामिन डी का सप्लीमेंट दिया
यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पेट से संबंधित इस विकार से पीड़ित लोगों को अध्ययन में शामिल किया. शोधकर्ता यह देखना चाहते थे कि अध्ययन में शामिल पीड़ित लोगों की विटामिन डी के सप्लीमेंट देने से पेट की परेशानी खत्म होती है कि नहीं. इसके अलावा यह भी देखना चाहते थे कि इस सप्लीमेंट से परेशानी किस हद तक कम हुई है या फिर कोई फर्क नहीं पड़ा है.

इसके अलावा उन व्यक्तियों की जीवन की गुणवत्ता (quality of life)में सुधार हुआ या नहीं. शोधकर्ताओं ने इन लोगों को 12 सप्ताह तक विटामिन डी-3 का ओरल स्प्रे दिया लेकिन आईबीएस में किसी तरह का सुधार नहीं देखा गया. न ही इन लोगों की बीमारी की गंभीरता में कमी आई और न ही जीवन की गुणवत्ता में किसी तरह के सुधार के लक्षण देखे गए.

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आगे भी रिसर्च की जरूरत
आईबीएस पेट से संबंधित गंभीर विकार है जो हमेशा के लिए बीमारी की तरह शरीर में लग जाता है. इससे हमेशा पेट से संबंधित समस्याएं रहती ही हैं. कुछ लोगों में यह कुछ दिनों के लिए ठीक हो जाता है लेकिन कुछ समय बाद फिर उसी स्थिति में बीमारी आ जाती है. मरीज अक्सर इस बीमारी से शर्मिंदगी महसूस करता है. इससे भारी मानसिक और शारीरिक परेशानी होती है.

कुल मिलाकर यह बीमारी व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित कर देती है. यूनिवर्सिटी ऑफ शेफील्ड के बर्नाड कॉर्फे (Bernard Corfe) ने बताया, दुर्भाग्य से आईबीएस से गंभीर रूप से पीड़ित व्यक्ति को विटामिन डी से कोई फायदा नहीं हुआ. हालांकि अब तक इसके कारणों के बारे में पता नहीं है और न ही इसका कोई इलाज है. इसलिए इस विकार को लेकर अभी और रिसर्च करने की जरूरत है.

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