पालतू कुत्तों के साथ खेलने से बच्चों के मानसिक विकास में मिलती है मदद : अध्ययन
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पालतू कुत्तों के साथ खेलने से बच्चों के मानसिक विकास में मिलती है मदद : अध्ययन | health – News in Hindi

नया शोध हाल ही में बाल चिकित्सा शोध पत्रिका में प्रकाशित हुआ है.

शोध (Research) में पता चला है कि घर में पालतू कुत्ते (Pet) के साथ जो बच्चे खेलते हैं उनमें असामाजिक व्यवहार की संभावना 30% कम हो जाती है.

घर में पातलू जानवरों को रखना चाहिए. इस बात का एक शोध (Research) में जिक्र किया गया है. लॉकडाउन (Lockdown)की वजह से यह और भी खास हो जाता है क्योंकि इस समय बच्चे घरों में बंद हैं और वह कहीं जा नहीं सकते. ऐसे में वह अपने घर के जानवरों (Animals) के साथ खेलकर समय व्यतीत कर सकते हैं. नया शोध हाल ही में बाल चिकित्सा शोध पत्रिका में प्रकाशित हुआ है. इसमें कहा गया है कि जिन घरों में पालतू कुत्ते होते हैं और बच्चे उसके साथ खेलते हैं उन बच्चों की भावनाओं के साथ समग्र कठिनाइयां 23 प्रतिशत कम हो जाती हैं.

शोध में क्या कहा गया है
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया और टेलीथॉन किड्स इंस्टीट्यूट विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की एक टीम ने विस्तृत प्रश्नावली के साथ दो से पांच साल की उम्र के 1,646 घरों के बच्चों पर शोध किया है. अध्ययन में बताया गया है कि जिन परिवारों में कुत्ते होते हैं. उनके बच्चों के असामाजिक व्यवहार में संलग्न होने की संभावना 30 प्रतिशत कम हो जाती है. जबकि अन्य बच्चों में यह समस्या 34 प्रतिशत तक बढ़ जाती है.

शोध में पता चला है, ‘ घर में कुत्ता रखने से बच्चों का मानसिक विकास सही तरीके से होता है. ऐसा करने से बच्चों और कुत्तों के बीच एक तरह का लगाव होता है. ऐसे में बच्चों और उनके पालतू के बीच साथ खेलने और उनके साथ समय बिताना सामाजिक और भावनात्मक विकास को बढ़ावा दे सकता है. शोध में ऐसी ही कई बातें सानमे आई हैं.ये पांच आदतें बताती हैं आप डिप्रेशन का शिकार हैं, लें डॉक्टर की मदद

सिजोफ्रेनिया से बचाता है कुत्ते का साथ
साल 2019 में जॉन्स हॉपकिन्स मेडिसिन, यूएस द्वारा किए गए एक शोध में पता चला था कि जिन घरों में पेट्स होते हैं, उन घरों के बच्चों को बड़ी उम्र में मानसिक बीमारी सिजोफ्रेनिया नहीं होती है. हॉपकिन्स मेडिसिन के मैनेजमेंट डायरेक्टर और इस शोध के लीड जॉन्स ने बताया था कि मानसिक रोगों से जुडे़ इस शोध में पता चला है कि अधिकांश मेंटल डिसऑडर्स बचपन में मिले नैचुरल एक्सपोजर और माहौल से जुड़े होते हैं. क्योंकि बचपन में मिला पर्यावरण शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को विकसित करता है. बच्चों का अपने घर के पेट्स के साथ बहुत क्लोज कनेक्शन होता है, यह लॉजिक हमारी स्टडी में बहुत महत्वपूर्ण साबित होता है.



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