नियमित योगाभ्‍यास से स्वास्‍थ्‍य ठीक रहता है और तनाव से भी मुक्ति मिलती है.
स्वास्थ्य

नींद नहीं आती तो करें भ्रामरी प्राणायाम, 10 मिनट के योगाभ्‍यास से मिलेंगे कमाल के फायदे

आज के लाइव योग सेशन (Live Yoga Session) में हमने छोटे-छोटे कई योगाभ्यासों को सीखा. योग स्‍वास्‍थ्‍य को बेहतर बनाए रखते हैं. वहीं इम्युनिटी को बेहतर बनाए रखने में भी योग की महत्वपूर्ण भूमिका है. आज हमने नाड़ी शोधन प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम और कई चक्रों में कपालभाति का अभ्‍यास सिखाया गया. इन आसनों के जरिये स्वास्‍थ्‍य (Health) ठीक रहता है और तनाव (Stress) से भी मुक्ति मिलती है. आज कोरोना का प्रभाव फिर से बढ़ने लगा है और प्रदूषण की समस्‍या भी बनी हुई है. ऐसे में ये योगाभ्‍यास सेहत के लिए काफी फायदेमंद होंगे. योगाभ्‍यास करते समय इस बात का ध्‍यान रखें कि इन्‍हें धीरे-धीरे करना चाहिए. व्‍यायाम से पहले ये तीन नियम जरूर ध्‍यान रखें कि अच्‍छा गहरा लंबा श्‍वास लें, गति का पालन करें और अपनी क्षमता के अनुसार योग करें.

नाड़ी शोधन प्राणायाम
इस प्राणायाम को करने के लिए सबसे पहले पद्मासन की अवस्था में बैठ जाएं. इसके बाद अपने दाहिने हाथ को अपने मुंह के सामने ले जाएं और अपने हाथ की तर्जनी उंगली और बीच की उंगली को अपने माथे पर रखें. इसके बाद अपने अंगूठे से अपने दाहिने नासिकाछिद्र को दबाए और साथ ही अपनी बीच की उंगली को अपने बाएं नासिकाछिद्र के ऊपर रखें. अब अपने हाथ की उंगली ओर अंगूठे से इसे बारी-बारी दबाएं. इसे करते समय अपनी कमर को सीधा रखें.

नाड़ी शोधन प्राणायाम के फायदे

इसे करने से मस्तिष्‍क की कार्य क्षमता बढ़ती है.
इसके नियमित अभ्‍यास से रक्त का शुद्धिकरण होता है.
साथ ही श्वसन क्रिया में सुधार होता है और तनाव, अनिद्रा से भी छुटकारा मिलता है.

भ्रामरी प्राणायाम
यह प्राणायाम सुबह और शाम दोनों ही वक्त कर सकते हैं. प्राणायाम को करते वक्त ध्यान रहे कि आसपास का वातावरण शांत हो.

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भ्रामरी प्राणायाम करने का तरीका
– भ्रामरी प्राणायाम करने के लिए जमीन पर बैठ जाएं. इसके बाद दोनों हाथों की कोहनियों को मोड़कर कानों तक ले जाएं और अंगूठे के सहारे से कानों को बंद कर लें.

– कानों को बंद करने के बाद हाथों की तर्जनी उंगली और मध्यमा, कनिष्का उंगली को आंखों के ऊपर ऐसे रखें जिससे पूरा चेहरा कवर हो जाए. इसके बाद मुंह को बंद करके नाक से हल्की-हल्की सांस को अंदर और बाहर छोड़े.

– 15 सेकेंड तक ये आसान करने के बाद वापस से नॉर्मल स्थिति में आ जाएं. इस प्राणयाम को 10 से 20 बार दोहराएं. आप चाहे तो शुरुआत में इसे 5 से 10 भी कर सकती हैं.

कपालभाति
कपालभाति बहुत ऊर्जावान उच्च उदर श्वास व्यायाम है. कपाल अर्थात मस्तिष्क और भाति यानी स्वच्छता अर्थात ‘कपालभाति’ वह प्राणायाम है जिससे मस्तिष्क स्वच्छ होता है और इस स्थिति में मस्तिष्क की कार्यप्रणाली सुचारु रूप से संचालित होती है. वैसे इस प्राणायाम के अन्य लाभ भी हैं. लिवर किडनी और गैस की समस्या के लिए बहुत लाभ कारी है. कपालभाति प्राणायाम करने के लिए रीढ़ को सीधा रखते हुए किसी भी ध्यानात्मक आसन, सुखासन या फिर कुर्सी पर बैठें. इसके बाद तेजी से नाक के दोनों छिद्रों से सांस को यथासंभव बाहर फेंकें. साथ ही पेट को भी यथासंभव अंदर की ओर संकुचित करें. इसके तुरंत बाद नाक के दोनों छिद्रों से सांस को अंदर खीचतें हैं और पेट को यथासम्भव बाहर आने देते हैं. इस क्रिया को शक्ति व आवश्यकतानुसार 50 बार से धीरे-धीरे बढ़ाते हुए 500 बार तक कर सकते हैं लेकिन एक क्रम में 50 बार से अधिक न करें. क्रम धीरे-धीरे बढ़ाएं. इसे कम से कम 5 मिनट और अधिकतम 30 मिनट तक कर सकते हैं.

कपालभाति के फायदे
-ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है
-सांस संबंधी बीमारियों को दूर करमे में मदद मिलती है. विशेष रूप से अस्थमा के पेशेंट्स को खास लाभ होता है.
-महिलाओं के लिए बहुत लाभकारी
-पेट की चर्बी को कम करता है
-पेट संबंधी रोगों और कब्ज की परेशानी दूर होती है
-रात को नींद अच्छी आती है

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ये लोग कपालभाति न करें
-प्रेग्नेंट महिलाओं को इसे करने से बचना चाहिए
-जिनकी कोई सर्जरी हुई हो वह इसे न करें
-गैसट्रिक और एसिटिडी वाले पेशेंट्स इसे धीरे-धीरे करने की कोशिश करें.
-पीरियड्स में बिल्कुल न करें.
-हाई बीपी और हार्ट संबंधी रोगों के पैशेंट्स इसे करने से बचें.



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