नींद की गड़बड़ी बच्‍चों को बना सकती है ऑटिज्म का शिकार, जानें कैसे
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नींद की गड़बड़ी बच्‍चों को बना सकती है ऑटिज्म का शिकार, जानें कैसे | health – News in Hindi

बच्‍चों में नींद से जुड़ी परेशानियां आगे चलकर ऑटिज्म का कारण बन सकती हैं.

हिप्पोकैम्पस मानव मस्तिष्क (Brain) का एक भाग होता है जहां याद्दाश्त (Memory) स्टोर होती है. यह मस्तिष्क के दोनों भागों के बीच होता है और इसकी आकृति समुद्री घोड़े जैसी होती है.



  • Last Updated:
    July 24, 2020, 6:30 AM IST

अच्छी नींद हर किसी के लिए जरूरी होती है. नए शोध ने इस तथ्य को भी सामने रखा है कि शिशु के जीवन के पहले बारह महीनों में नींद से जुड़ी परेशानियां आगे चलकर ऑटिज्म (Autism) का कारण बन सकती हैं. इसके अलावा यह हिप्पोकैम्पस (Hippocampus) के विकास में भी बदलाव लाता है. हिप्पोकैम्पस मानव मस्तिष्क (Brain) का एक भाग होता है जहां याद्दाश्त (Memory) स्टोर होती है. यह मस्तिष्क के दोनों भागों के बीच होता है और इसकी आकृति समुद्री घोड़े जैसी होती है. अगर इसे जरा सी भी क्षति पहुंचती है तो याद्दाश्त का पूरा स्टोर या तो खत्म हो जाता है या कुछ-कुछ याद रहता है. नींद की गड़बड़ी और ऑटिज्म के इस संबंध पर अध्ययन किया गया है.

शोधकर्ताओं कहना है, ‘हिप्पोकैम्पस सीखने और स्मृति के लिए महत्वपूर्ण है. इसके आकार में बदलाव का संबंध वयस्कों और बड़े बच्चों में खराब नींद से है.’

myUpchar से जुड़े एम्स के डॉ. उमर अफरोज का कहना है कि ऑटिज्म एक मस्तिष्क का विकार है. ऑटिज्म में मस्तिष्क के विभिन्न क्षेत्र एक साथ काम करने में विफल हो जाते हैं. इसे ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार भी कहते हैं. ऑटिज्म से ग्रस्त व्यक्ति अन्य लोगों से अलग सुनते, देखते और महसूस करते हैं.अमेरिकन जर्नल ऑफ साइकेट्री ने इस शोध को प्रकाशित किया. इस तरह के निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए छह महीने और एक साल की उम्र के बच्चों से 400 से अधिक नमूने लिए गए थे. जिन शिशुओं को बाद में ऑटिज्म होने का पता चला था, उनमें नींद से जुड़े मुद्दे पाए गए थे. शोधकर्ताओं के अनुसार ‘यह हो सकता है कि नींद में बदलाव कुछ बच्चों के लिए ऑटिज्म का हिस्सा हो.’

इससे यह पता चलता है कि ऑटिज्म से पीड़ित कुछ बच्चों की नींद की समस्या के लिए एक बायलॉजिकल कम्पोनेंट हो सकता है. एकत्र किए गए नमूनों में से लगभग दो-तिहाई उन बच्चों के थे, जिन्हें नींद की समस्या थी. यह भी पाया गया है कि उन शिशुओं में एक बड़ा भाई था जो पहले ही उस बीमारी से पीड़ित था. लिए गए 432 नमूनों में से 127 को ‘कम जोखिम वाला’ घोषित किया गया. ऐसा इसलिए है, क्योंकि उनके संबंधित परिवारों में ऑटिज्म का कोई इतिहास नहीं था. बाद में बच्चों को तब डायग्नोस किया गया जब वे दो साल की उम्र के थे. वहां 300 प्रतिभागियों में से 71 जिन्हें शुरू में उच्च जोखिम वाले नमूनों के रूप में बताया गया था, उनमें ऑटिज्म पाया गया.

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अध्ययन में कहा गया है कि जिन माता-पिता ने अपने बच्चे के नींद से जुड़ी परेशानी या अनियमित नींद के चक्र के बारे में शिकायत की, वे बाद में अन्य बच्चों की तुलना में ऑटिज्म के शिकार निकले. यह माना जाना चाहिए कि बच्चों के स्लीप पैटर्न समय के साथ-साथ बदलते हैं.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, ऑटिज्म के प्रकार, कारण, लक्षण, परीक्षण, इलाज और दवा पढ़ें।

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